1KG Hua Tamatar कृषि एक्सपर्ट निर्मल यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में तनाव के कारण भारत से केवल टमाटर ही नहीं, बल्कि चावल, आम, अंडे और अन्य खाद्य सामग्री के निर्यात पर भी असर पड़ा है. इससे बासमती सहित आम और अंडे की कीमतों में भी गिरावट आई है. 1 KG Hua Tamatar
टमाटर के रेट में अचानक गिरावट आने से किसानों को नुकसान हो रहा है. होलसेल मंडियों में रेट गिरकर एक रुपये किलो तक पहुंच गया है. ऐसे में किसानों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है. महाराष्ट्र और ओडिशा में तो और भी दयनीय स्थिति है. इन दोनों राज्यों में किसान सड़क किनारे टमाटर फेंक रहे हैं, ताकि और अधिक होने वाले नुकसान से बचा जा सके. बात अगर ओडिशा की करें तो गंजाम जिले में टमाटर किसान परेशान हैं. यह पर तो कीमत गिरकर 1 रुपये किलो तक पहुंच गई है. इसके बावजूद मंडी में एक रुपये किलो की दर से भी टमाटर के खरीदार नहीं मिल रहे हैं. 1 KG Hua Tamatar

कीमत में गिरावट आने से गंजाम जिले के अस्का, धराकोट और सोरड़ा इलाकों के टमाटर किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं. किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज की सुविधा न होने के कारण खेतों में ही टनों के हिसाब से टमाटर खराब हो रहे हैं. किसान अपनी उपज को न तो सुरक्षित रख पा रहे हैं और न ही बेच पा रहे हैं, इसलिए मजबूरी में उन्हें खेतों में ही छोड़ना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. हालात इतने खराब हैं कि व्यापारी 1 रुपये प्रति किलो के भाव पर भी टमाटर खरीदने को तैयार नहीं हैं, जिससे पके हुए टमाटर जमीन पर गिरकर सड़ रहे हैं. 1 KG Hua Tamatar
1 KG Hua Tamatar क्या कहते हैं टमाटर किसान
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्का ब्लॉक के कर्नाली गांव में स्थिति और गंभीर है, जहां सैकड़ों किसान लगभग 150 एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर दिन-रात मेहनत की, लेकिन अब बेचने के समय बाजार ही नहीं मिल रहा. इस वजह से किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ रहा है. कई किसान कर्ज चुकाने और घर चलाने में परेशान हैं. उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द कोल्ड स्टोरेज की सुविधा दी जाए, बेहतर बाजार व्यवस्था बनाई जाए और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए. 1 KG Hua Tamatar
टमाटर के दाम में गिरावट के मुख्य कारण
1. अधिक उत्पादन (Overproduction)
इस साल मौसम अनुकूल रहने के कारण टमाटर की फसल का उत्पादन बहुत ज्यादा हुआ। जब बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है और मांग स्थिर रहती है, तो कीमतें अपने आप गिर जाती हैं।
2. मांग में कमी
कई क्षेत्रों में टमाटर की मांग उतनी नहीं बढ़ी जितनी सप्लाई हुई। इसके अलावा प्रोसेसिंग इंडस्ट्री (जैसे सॉस और केचप कंपनियां) ने भी सीमित मात्रा में खरीदारी की, जिससे कीमतों पर असर पड़ा।
3. परिवहन और भंडारण की कमी
भारत में अभी भी कोल्ड स्टोरेज और बेहतर सप्लाई चेन की कमी है। किसान अपनी फसल को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रख पाते, जिससे उन्हें मजबूरी में सस्ते दाम पर टमाटर बेचना पड़ता है।
4. बिचौलियों की भूमिका
कई बार किसान को उसकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पाता क्योंकि मंडियों में बिचौलियों का दबदबा होता है। वे कम कीमत पर खरीदकर अधिक मुनाफा कमाते हैं।
5. मौसम का असर
अचानक मौसम में बदलाव या ज्यादा बारिश के कारण फसल जल्दी खराब होने लगती है। इससे किसान जल्दी बेचने को मजबूर होते हैं, जिससे कीमत गिर जाती है।
मदनपल्ले मंडी में 700 रुपये क्विंटल रेट
हालांकि, आंध्र प्रदेश स्थित एशिया की सबसे बड़ी टमाटर मंडी में स्थिति महाराष्ट्र और ओडिशा के मुकाबले कुछ अच्छी है. eNAM के आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले मंडी में 24 मार्च को टमाटर की कीमतों में अंतर देखा गया. यहां न्यूनतम कीमत 700 रुपये प्रति क्विंटल, मोडल कीमत 860 रुपये प्रति क्विंटल और अधिकतम कीमत 1,100 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई. जबकि, इसी दिन गुर्रमकोंडा मंडी में टमाटर की कीमतें अलग-अलग स्तर पर दर्ज की गई हैं. यहां न्यूनतम कीमत 700 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य कीमत 900 रुपये प्रति क्विंटल और अधिकतम कीमत 1,100 रुपये प्रति क्विंटल रही. 1 KG Hua Tamatar
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किसानों पर इसका प्रभाव
- आर्थिक नुकसान: लागत भी नहीं निकल पा रही, जिससे किसान कर्ज में डूब रहे हैं।
- मानसिक तनाव: लगातार घाटे के कारण किसानों में निराशा बढ़ रही है।
- फसल बर्बादी: कई किसान टमाटर को खेतों में ही छोड़ने या फेंकने पर मजबूर हो गए हैं।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
सरकार को इस समस्या का समाधान निकालने के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए:
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था
- कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस का विकास
- सीधे किसानों से खरीद (Direct Procurement)
- फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा
महाराष्ट्र में 4 रुपये किलो हुआ रेट
महाराष्ट्र की बात करें करें तो यहां के जालना जिले में टमाटर का रेट बहुत कम हो गया है. किसानों को 4 रुपये किलो से भी मार्केट में टमाटर का कम रेट मिल रहा है. ऐसे में किसान सड़क किनारे टमाटर फेंक रहे हैं. कहा जा रहा है कि ईरान- इजरायल युद्ध के चलते खाड़ी देशों में टमाटर का निर्यात प्रभावित हो गया है. इससे घरेलू मार्केट में टमाटर का स्टॉक बढ़ जाने से कीमतों में गिरावट आ गई है. व्यापारियों का कहना है कि अगर खाड़ी देशों में तनाव इसी तरह से बना रहा, तो आने वाले दिनों में टमाटर के साथ-साथ प्याज की कीमतों में भी गिरावट आ सकती है. 1 KG Hua Tamatar
अन्य खाद्य सामाग्री भी प्रभावित
वहीं, कृषि एक्सपर्ट निर्मल यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में तनाव के कारण भारत से केवल टमाटर ही नहीं, बल्कि चावल, आम, अंडे और अन्य खाद्य सामग्री के निर्यात पर भी असर पड़ा है. इससे बासमती सहित आम और अंडे की भी कीमतों में भी गिरावट आई है. 1 KG Hua Tamatar
497 करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित
बता दें कि पिछले हफ्ते ही केंद्र सरकार ने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष से पैदा हुई दिक्कतों को देखते हुए 497 करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित किया था, ताकि निर्यातकों को नुकसान से बचाया जा सके. 20 मार्च को नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण रही है और अलग-अलग देशों के नेता लगातार संपर्क में हैं. 1 KG Hua Tamatar
निष्कर्ष
टमाटर की कीमत का 1 रुपये प्रति किलो तक गिर जाना किसानों के लिए एक गंभीर समस्या है। यह केवल एक फसल की बात नहीं है, बल्कि पूरे कृषि तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं। 1KG Hua Tamatar

