Top Moong Varieties : खरीफ सीजन में करें मूंग की इन टॉप-3 उन्नत किस्मों की खेती, मिलेगा शानदार उत्पादन और बंपर मुनाफा : देश में खरीफ सीजन की बुवाई तेजी से शुरू हो चुकी है और किसान अब ज्यादा उत्पादन देने वाली दलहनी फसलों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में मूंग की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है।
कृषि वैज्ञानिक लगातार नई और उन्नत दलहन किस्मों पर रिसर्च कर रहे हैं ताकि किसानों को कम समय में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल सके। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी Indian Council of Agricultural Research (ICAR) द्वारा विकसित मूंग की कई उन्नत किस्में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। यदि किसान खरीफ सीजन में मूंग की इन टॉप-3 उन्नत किस्मों की खेती करते हैं, तो कम समय में बेहतर पैदावार के साथ अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
Top Moong Varieties
पूसा विशाल (Pusa Vishal – 2000)
पूसा विशाल मूंग की एक लोकप्रिय और उन्नत किस्म है, जिसे खासतौर पर उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। यह किस्म जल्दी पकने और स्थिर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है। किसान यदि इस किस्म की खेती करते हैं, तो करीब 65 दिनों में लगभग 11.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पीला मोज़ेक वायरस (YMV) जैसी खतरनाक बीमारी के प्रति प्रतिरोधी मानी जाती है। इससे फसल को कम नुकसान होता है और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलता है। इसके दाने बड़े और आकर्षक होते हैं, जिसके कारण बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है।Top Moong Varieties
पूसा 1431 (Pusa 1431 – 2018)
पूसा 1431 मूंग की एक आधुनिक और अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्म है। यह किस्म उत्तरी भारत के कई राज्यों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यदि किसान इस खरीफ सीजन में पूसा 1431 की खेती करते हैं, तो लगभग 66 दिनों में 12.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
इस किस्म में लगभग 25.4 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है, जिससे इसकी बाजार मांग काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा यह लीफ स्पॉट, वेब ब्लाइट और एन्थ्रेक्नोज जैसी बीमारियों के प्रति भी प्रतिरोधी है। यही कारण है कि यह किस्म किसानों को बेहतर गुणवत्ता और अधिक लाभ देने में मदद करती है। Top Moong Varieties
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पूसा 1641 (Pusa 1641 – 2021)
पूसा 1641 मूंग की नई और अत्याधुनिक किस्मों में शामिल है, जिसे अधिक उत्पादन के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह किस्म विशेष रूप से उत्तर भारत के किसानों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। इसकी औसत पैदावार लगभग 13.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है, जो इसे सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली मूंग की किस्मों में शामिल करती है। Top Moong Varieties
यह किस्म करीब 63 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में फसल काटकर दूसरी फसल की तैयारी भी आसानी से कर सकते हैं। पूसा 1641 भी पीला मोज़ेक वायरस (YMV) के प्रति प्रतिरोधी है। इसके दानों का आकार अच्छा होता है और 100 दानों का वजन लगभग 4.2 ग्राम तक होता है, जिससे इसकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों बेहतर रहते हैं।Top Moong Varieties
मूंग की उन्नत किस्मों से किसानों को होगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार मूंग की उन्नत किस्मों की खेती करने से किसानों को कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल सकता है। मूंग की फसल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है, क्योंकि यह दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन स्थिरीकरण का काम करती है। साथ ही बाजार में मूंग दाल की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है। यदि किसान सही बीज, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक खेती तकनीकों का उपयोग करें, तो खरीफ सीजन में मूंग की खेती से शानदार उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। Top Moong Varieties
