Arhar Ki Kheti Kaise Kare : अरहर, जिसे Pigeonpea या तूर दाल के नाम से भी जाना जाता है, देश की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है। चने के बाद अरहर का स्थान सबसे महत्वपूर्ण दलहनी फसल के रूप में माना जाता है। अरहर की दाल प्रोटीन, आयरन, आयोडीन और कई आवश्यक अमीनो एसिड जैसे लाइसिन, थ्रेओनीन, सिस्टीन और आर्जिनिन से भरपूर होती है। यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से अरहर की खेती करें, तो कम लागत में अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
Arhar Ki Kheti Kaise Kare
अरहर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
अरहर मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की फसल मानी जाती है। इसकी खेती के लिए 26°C से 30°C तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। वहीं फसल की बढ़वार और पकने के समय 17°C से 22°C तापमान बेहतर रहता है। अरहर की फसल फूल आने और फली बनने के समय खराब मौसम के प्रति काफी संवेदनशील होती है। लगातार बारिश, बादल या अत्यधिक नमी फली निर्माण को प्रभावित कर सकती है। इसलिए किसान मौसम के अनुसार सही समय पर बुवाई करें।
मिट्टी और खेत की तैयारी
अरहर की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली काली मिट्टी, दोमट मिट्टी या हल्की क्षारीय मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का pH मान 7.0 से 8.5 के बीच होना चाहिए। खेती शुरू करने से पहले खेत की गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए। इसके बाद 2 से 3 बार हल्की जुताई करके खेत को भुरभुरा बना लें। जल निकासी की उचित व्यवस्था करना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि खेत में पानी भरने से फसल खराब हो सकती है।
अरहर की बुवाई का सही समय
जल्दी पकने वाली किस्मों की बुवाई जून के पहले पखवाड़े में करनी चाहिए। वहीं मध्यम और देर से पकने वाली किस्मों की बुवाई जून के दूसरे पखवाड़े में करना बेहतर माना जाता है। अरहर की बुवाई सीड ड्रिल, देसी हल या रिज एवं फरो विधि से की जा सकती है। किसान डिबलिंग विधि से भी इसकी बुवाई कर सकते हैं, जिससे पौधों की सही दूरी बनी रहती है।
बीज दर और पौधों की दूरी
जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए 20 से 25 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त माना जाता है। इसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। मध्यम और देर से पकने वाली किस्मों के लिए 15 से 20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। इसमें कतारों की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधों की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखी जाती है। Arhar Ki Kheti Kaise Kare
बीज उपचार क्यों आवश्यक है
अच्छे उत्पादन के लिए बीज उपचार करना बेहद जरूरी होता है। किसान बुवाई से पहले बीजों को थीरम, कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें। इससे फसल को फफूंद जनित रोगों से बचाने में मदद मिलती है। इसके अलावा राइजोबियम और पीएसबी कल्चर का उपयोग करने से पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण बढ़ता है और उत्पादन में सुधार होता है।
खाद और उर्वरक प्रबंधन
अरहर की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद और उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। सामान्य तौर पर बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर 25-30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40-50 किलोग्राम फास्फोरस और 30 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करना चाहिए। सल्फर और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी फसल की बढ़वार के लिए जरूरी होते हैं। सल्फर की कमी होने पर जिप्सम का उपयोग किया जा सकता है। वहीं जिंक की कमी होने पर जिंक सल्फेट का छिड़काव लाभकारी माना जाता है।Arhar Ki Kheti Kaise Kare
सिंचाई और जल निकासी प्रबंधन
अरहर गहरी जड़ वाली फसल होने के कारण सूखे को काफी हद तक सहन कर सकती है। फिर भी लंबे समय तक सूखा रहने पर तीन सिंचाई करना फायदेमंद रहता है। पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 30 दिन बाद शाखा बनने की अवस्था में, दूसरी सिंचाई फूल आने के समय और तीसरी सिंचाई फली बनने के समय करनी चाहिए। खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था बेहद जरूरी है, क्योंकि जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। Arhar Ki Kheti Kaise Kare
खरपतवार नियंत्रण कैसे करें
अरहर की फसल में शुरुआती 60 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान खरपतवार फसल की बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 20-25 दिन पश्चात और दूसरी 45-50 दिन पश्चात करनी चाहिए। खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमिथालिन का प्री-इमरजेंस छिड़काव भी किया जा सकता है। इससे शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है। Arhar Ki Kheti Kaise Kare
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कटाई और भंडारण
जब फसल की दो-तिहाई फलियां भूरे रंग की हो जाएं, तब कटाई का सही समय माना जाता है। पौधों को दरांती से काटकर 3 से 6 दिनों तक धूप में सुखाना चाहिए। इसके बाद थ्रेसिंग करके दानों को अलग किया जाता है। भंडारण से पहले बीजों की नमी 9-10 प्रतिशत तक कम करनी चाहिए। सुरक्षित भंडारण के लिए नीम की पत्ती का चूर्ण या वनस्पति तेल का उपयोग किया जा सकता है।
अरहर की खेती से किसानों को होगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार अरहर की वैज्ञानिक खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। बाजार में अरहर दाल की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है। यदि किसान सही किस्म, समय पर बुवाई और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाएं, तो अरहर की खेती से शानदार उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। Arhar Ki Kheti Kaise Kare
