Om Nursery Success Story Bhopal : कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों से जूझ रहे मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के रतुआ रतनपुर गांव के दो किसान भाइयों हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह ने आज कृषि क्षेत्र में ऐसी मिसाल कायम कर दी है, जो हजारों किसानों और युवाओं को प्रेरित कर रही है। जिन भाइयों ने कुछ वर्ष पहले मात्र 10 हजार पौधों के साथ एक छोटी नर्सरी शुरू की थी, वही आज हर महीने लगभग 15 लाख पौधों का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी “ओम नर्सरी” न केवल मध्य प्रदेश बल्कि राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक गुणवत्तापूर्ण पौधों की आपूर्ति कर रही है।
खेती को पारंपरिक तरीके से करने के बजाय दोनों भाइयों ने इसे एक व्यवसाय और स्टार्टअप के रूप में देखा। आधुनिक तकनीकों, पॉलीहाउस संरचना और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपने छोटे से प्रयास को एक बड़े कृषि उद्यम में बदल दिया।
साधारण किसान परिवार से शुरू हुआ सफर Om Nursery Success Story Bhopal
हेमंत और ओम कुशवाह एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। परिवार की आय मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी। सीमित जमीन और पारंपरिक खेती से होने वाली कम आमदनी के कारण आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ऐसे में दोनों भाइयों ने खेती में कुछ नया करने का निर्णय लिया। उन्होंने देखा कि सब्जियों और फूलों की खेती के लिए किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों की जरूरत होती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसे पौधों की उपलब्धता कम थी। इसी आवश्यकता को अवसर में बदलते हुए उन्होंने नर्सरी व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।
कृषि विभाग के प्रशिक्षण ने बदली सोच
वर्ष 2017-18 में दोनों भाइयों का संपर्क कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से हुआ। विभाग द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद उन्हें आधुनिक पौध उत्पादन, पॉलीहाउस तकनीक, ड्रिप सिंचाई, नर्सरी प्रबंधन और कृषि उद्यमिता की जानकारी मिली। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सीखा कि वैज्ञानिक तरीके से पौध उत्पादन कर बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। यही ज्ञान उनकी सफलता की मजबूत नींव बना। Om Nursery Success Story Bhopal
केवल 2000 वर्गफीट से शुरू की थी नर्सरी
दोनों भाइयों ने वर्ष 2018 में लगभग 2000 वर्गफीट क्षेत्र में पॉलीहाउस स्थापित कर नर्सरी की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उनके पास सीमित पूंजी थी और पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। कई बार सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था, जिससे पौध उत्पादन प्रभावित होता था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और स्वयं कुएं की खुदाई कर स्थायी जल स्रोत तैयार किया। इसके बाद उन्होंने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया और धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाना शुरू किया। Om Nursery Success Story Bhopal
45 लाख रुपये के ऋण से मिला विस्तार का अवसर
जैसे-जैसे व्यवसाय बढ़ता गया, नर्सरी के विस्तार की आवश्यकता महसूस होने लगी। वर्ष 2024 में दोनों भाइयों ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत 45 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने नर्सरी के विस्तार, पॉलीहाउस निर्माण, सिंचाई प्रणाली और अन्य आधुनिक सुविधाओं के विकास में किया। वर्तमान में उनकी नर्सरी लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और 4 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में दो अत्याधुनिक पॉलीहाउस संचालित किए जा रहे हैं। Om Nursery Success Story Bhopal
हर महीने तैयार हो रहे हैं 15 लाख पौधे
आज ओम नर्सरी हर महीने करीब 15 लाख पौधों का उत्पादन कर रही है। यहां फूलों और सब्जियों दोनों प्रकार के पौधे तैयार किए जाते हैं। फूलों में गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा जैसी प्रजातियां शामिल हैं, जबकि सब्जियों में टमाटर, बैंगन, मिर्च, खीरा, लौकी और गिलकी जैसी फसलों के हाईब्रिड पौधे तैयार किए जाते हैं। उन्नत तकनीक और नियंत्रित वातावरण में तैयार किए गए ये पौधे बेहतर अंकुरण, तेज वृद्धि और अधिक उत्पादन क्षमता के लिए जाने जाते हैं। Om Nursery Success Story Bhopal
कई राज्यों तक पहुंच रही है पौधों की सप्लाई
गुणवत्ता और भरोसे के कारण ओम नर्सरी के पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के किसान भी यहां से पौधे खरीद रहे हैं। सीजन के दौरान हजारों किसान सीधे नर्सरी पहुंचते हैं, जबकि कई व्यापारी और कृषि इनपुट डीलर भी यहां से पौधे खरीदकर अन्य क्षेत्रों में सप्लाई करते हैं। इससे नर्सरी का कारोबार तेजी से बढ़ा है। Om Nursery Success Story Bhopal
प्रतिष्ठित कंपनियों के बीजों से तैयार किए जाते हैं पौधे
ओम नर्सरी में सेमीनेस, फेजेंटा और अंकुर बीएनआर जैसी प्रतिष्ठित बीज कंपनियों की उन्नत किस्मों का उपयोग किया जाता है। इन बीजों से तैयार पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता, बेहतर उत्पादन और उच्च गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं। इसी कारण किसानों को इन पौधों से बेहतर परिणाम मिलते हैं और उनकी आय में वृद्धि होती है। यही वजह है कि नर्सरी के ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। Om Nursery Success Story Bhopal
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ग्रामीणों को मिला रोजगार
ओम नर्सरी केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि ग्रामीण रोजगार का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। वर्तमान में यहां 15 से 20 स्थानीय ग्रामीणों को नियमित रोजगार मिल रहा है। पौध तैयार करने, पैकिंग, सिंचाई, रखरखाव और विपणन जैसे कार्यों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। इससे गांव की आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। Om Nursery Success Story Bhopal
खेती को बनाया लाभकारी व्यवसाय
हेमंत कुशवाह का मानना है कि आज खेती केवल पारंपरिक व्यवसाय नहीं बल्कि एक सफल स्टार्टअप मॉडल बन सकती है। यदि किसान नई तकनीक अपनाएं, प्रशिक्षण लें और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें तो वे खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र में अभी भी असीम संभावनाएं हैं और युवा यदि आधुनिक कृषि उद्यमों की ओर कदम बढ़ाएं तो गांवों में भी रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। Om Nursery Success Story Bhopal
किसानों के लिए प्रेरणा है ओम नर्सरी
रतुआ रतनपुर की ओम नर्सरी आज इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मेहनत, लगन, सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग के दम पर कोई भी किसान अपनी किस्मत बदल सकता है। हेमंत और ओम कुशवाह की सफलता कहानी उन किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेती को आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि सोच बड़ी हो और प्रयास लगातार किए जाएं, तो छोटी शुरुआत भी करोड़ों के कृषि उद्यम में बदल सकती है। Om Nursery Success Story Bhopal
