अल नीनो के खतरे के बीच किसानों को बड़ी सलाह, सोयाबीन की जल्दी और मध्यम अवधि वाली किस्में लगाएं, उत्पादन रहेगा सुरक्षित Soybean Varieties for El Nino

अल नीनो के खतरे के बीच किसानों को बड़ी सलाह, सोयाबीन की जल्दी और मध्यम अवधि वाली किस्में लगाएं, उत्पादन रहेगा सुरक्षित Soybean Varieties for El Nino

Soybean Varieties for El Nino : देशभर में इस साल अल नीनो (El Nino) के संभावित प्रभाव को लेकर कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। अल नीनो की स्थिति बनने पर सामान्य से कम बारिश, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे अंतराल जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इसका सीधा असर खरीफ फसलों, विशेषकर सोयाबीन की खेती पर पड़ सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस सीजन में जल्दी पकने वाली (Early Maturity) और मध्यम अवधि (Medium Duration) की सोयाबीन किस्मों को प्राथमिकता दें। इससे कम बारिश, सूखा और कीट-रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है और उत्पादन में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

अल नीनो क्यों बढ़ा रहा है किसानों की चिंता? Soybean Varieties for El Nino

अल नीनो एक वैश्विक मौसमीय घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है। इसका प्रभाव भारत के मॉनसून पर भी पड़ता है। कई बार अल नीनो के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की जाती है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि बारिश देर से आती है या बीच-बीच में लंबे सूखे अंतराल बनते हैं, तो लंबी अवधि वाली किस्मों को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए कम अवधि और मध्यम अवधि वाली किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।

एक से अधिक किस्मों की बुवाई करने की सलाह

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल एक ही किस्म पर निर्भर न रहें। खेत में अलग-अलग अवधि वाली दो या तीन उन्नत किस्मों की बुवाई करने से जोखिम कम हो जाता है। यदि मौसम प्रतिकूल रहता है और किसी एक किस्म का प्रदर्शन कमजोर होता है, तो दूसरी किस्मों से उत्पादन की भरपाई हो सकती है। यह रणनीति जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। Soybean Varieties for El Nino

सहफसली खेती से बढ़ेगी सुरक्षा और आय

मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र सहित उन इलाकों में जहां किसान साल में तीन फसलें लेते हैं, वहां कम अवधि वाली सोयाबीन किस्मों को अपनाने की सलाह दी गई है। इससे सोयाबीन की कटाई जल्दी हो जाती है और किसान समय पर आलू, लहसुन, प्याज, गेहूं या चना जैसी अगली फसलें ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सहफसली खेती और फसल विविधीकरण अपनाने से किसानों की आय बढ़ती है और मौसम संबंधी जोखिम भी कम होता है। Soybean Varieties for El Nino

सोयाबीन बुवाई का सही समय क्या है?

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन की बुवाई जून के दूसरे सप्ताह से लेकर जुलाई के पहले सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। हालांकि बुवाई तभी करनी चाहिए जब क्षेत्र में लगभग 100 मिमी या उससे अधिक बारिश हो चुकी हो और मिट्टी में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो। समय पर बुवाई करने से बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है, जिससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। Soybean Varieties for El Nino

बीज खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज का चयन बेहद आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि बुवाई से पहले बीज की गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता की जांच अवश्य करें। बीज की अंकुरण क्षमता कम से कम 70 प्रतिशत होनी चाहिए। इसके अलावा किसानों को उर्वरक, बीज उपचार रसायन, खरपतवारनाशी और फफूंदनाशी की व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए ताकि बुवाई के समय किसी प्रकार की परेशानी न हो। Soybean Varieties for El Nino

खेत की तैयारी कैसे करें?

विशेषज्ञों के अनुसार हर तीन वर्ष में एक बार खेत की गहरी जुताई करना लाभदायक रहता है। इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है और कीट एवं रोगों का प्रकोप कम होता है। इसके बाद क्रिस-क्रॉस हैरोइंग और पाटा चलाकर खेत तैयार करना चाहिए। खेत में 5 से 10 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद या 2.5 टन प्रति हेक्टेयर पोल्ट्री खाद का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है। Soybean Varieties for El Nino

BBF तकनीक किसानों के लिए क्यों फायदेमंद?

बदलते मौसम और अनियमित वर्षा को देखते हुए वैज्ञानिकों ने ब्रॉड बेड फरो (BBF) और रिज-फरो तकनीक अपनाने की सलाह दी है। इस तकनीक की मदद से अधिक बारिश की स्थिति में जलभराव नहीं होता, जबकि कम बारिश के दौरान नमी संरक्षण बेहतर बना रहता है। इससे फसल को सूखे और जलभराव दोनों स्थितियों से सुरक्षा मिलती है। Soybean Varieties for El Nino

मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के लिए उन्नत सोयाबीन किस्में

सेंट्रल जोन के किसानों के लिए JS 24-33, JS 21-72, JS 23-03, JS 23-09, NRC 150, NRC 142, NRC 157, NRC 165, MAUS 725, MAUS 731, गुजरात सोया-4, RSC 10-46, RSC 10-52, MACS 1520 और AMS-MB-5-18 जैसी उन्नत किस्मों की सिफारिश की गई है। इन किस्मों में बेहतर उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मौसमीय जोखिम सहन करने की क्षमता पाई जाती है। Soybean Varieties for El Nino

उत्तर भारत के किसानों के लिए सिफारिश की गई किस्में

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों के लिए पूसा सोयाबीन-21, पंत सोयाबीन-27, पंत सोयाबीन-26, PS 1670, PS 1368, SL 1074, SL 1028 और NRC 149 जैसी उन्नत किस्मों को अपनाने की सलाह दी गई है। Soybean Varieties for El Nino

दक्षिण भारत और पूर्वी राज्यों के लिए उपयुक्त किस्में

दक्षिण भारत के किसानों के लिए NRC 142, NRC 132, MACS 1460, KDS 753, KBS 23 और ALSB 50 जैसी किस्में उपयुक्त मानी गई हैं। वहीं छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए RSC 11-35, RSC 10-71, MACS 1407 और NRC 128 जैसी किस्मों की सिफारिश की गई है। Soybean Varieties for El Nino

निष्कर्ष

अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को इस बार सोयाबीन की जल्दी और मध्यम अवधि वाली उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए। समय पर बुवाई, गुणवत्तापूर्ण बीज, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और BBF जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान मौसम की चुनौतियों के बावजूद बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। बदलते जलवायु परिदृश्य में वैज्ञानिक खेती ही किसानों की आय और फसल सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार बन सकती है। Soybean Varieties for El Nino

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