Kharif Crop Sowing Tips : देशभर में मॉनसून की शुरुआत के साथ ही किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियों में जुट जाते हैं। धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग और अन्य खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार काफी हद तक सही समय पर बुवाई पर निर्भर करती है। कई किसान पहली बारिश होते ही खेत में बीज डालना शुरू कर देते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि पर्याप्त नमी बनने से पहले बुवाई कर दी जाए और बाद में बारिश रुक जाए, तो बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है और फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
मॉनसून की पहली बारिश के बाद क्यों नहीं करनी चाहिए बुवाई?
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून की शुरुआती बारिश अक्सर अस्थायी होती है। कई बार एक-दो अच्छी बारिश के बाद लंबे समय तक वर्षा नहीं होती। ऐसी स्थिति में खेत में डाले गए बीज अंकुरित तो हो जाते हैं, लेकिन पर्याप्त नमी न मिलने के कारण सूख सकते हैं। इससे दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ता है और समय की भी हानि होती है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि केवल पहली बारिश देखकर बुवाई का निर्णय न लें। Kharif Crop Sowing Tips
बुवाई से पहले खेत की उचित तैयारी क्यों है आवश्यक?
अच्छे उत्पादन के लिए खेत की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश शुरू होने से पहले खेत की गहरी जुताई कर लेनी चाहिए। जुताई से खरपतवार, कीटों के अंडे और पुरानी फसल के अवशेष नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा खेत को समतल करने से वर्षा का पानी समान रूप से फैलता है और नमी लंबे समय तक बनी रहती है। खेत में सड़ी हुई गोबर खाद, कम्पोस्ट या जैविक खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर होती है। किसानों को खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था भी करनी चाहिए ताकि अधिक बारिश की स्थिति में पानी जमा न हो।
खरीफ फसलों की बुवाई के लिए कितनी बारिश जरूरी है? Kharif Crop Sowing Tips
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में 50 से 75 मिलीमीटर वर्षा होने के बाद खेत में पर्याप्त नमी बनती है, जो खरीफ फसलों की बुवाई के लिए उपयुक्त मानी जाती है। केवल एक दिन की तेज बारिश के आधार पर बुवाई शुरू नहीं करनी चाहिए। किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बारिश के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी हुई है और आगामी दिनों में भी मौसम अनुकूल रहने की संभावना है। Kharif Crop Sowing Tips
मिट्टी में 10 से 15 सेंटीमीटर गहराई तक नमी होना जरूरी
हर क्षेत्र की मिट्टी की बनावट और पानी धारण करने की क्षमता अलग-अलग होती है। काली मिट्टी, लाल मिट्टी, रेतीली मिट्टी और दोमट मिट्टी सभी अलग तरीके से नमी को बनाए रखती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ फसलों की बुवाई तभी करनी चाहिए जब मिट्टी में कम से कम 10 से 15 सेंटीमीटर गहराई तक पर्याप्त नमी पहुंच चुकी हो। इससे बीजों का अंकुरण समान रूप से होता है और पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत रहती है। Kharif Crop Sowing Tips
खेत की नमी की जांच कैसे करें?
किसान बिना किसी आधुनिक उपकरण के भी आसानी से खेत की नमी की जांच कर सकते हैं। इसके लिए खेत की मिट्टी को हाथ में लेकर मुट्ठी में दबाएं।
नमी कम होने की स्थिति
यदि मिट्टी दबाने के बाद तुरंत बिखर जाए, तो इसका मतलब है कि खेत में नमी अभी पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में बुवाई करने से बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है। Kharif Crop Sowing Tips
बुवाई के लिए आदर्श स्थिति
यदि मिट्टी का गोला बन जाए और हल्का दबाव देने पर टूट जाए, तो यह बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त स्थिति मानी जाती है। इस समय खेत में पर्याप्त नमी उपलब्ध होती है।
नमी अधिक होने की स्थिति
यदि मिट्टी हाथ में चिपकने लगे और कीचड़ जैसी दिखाई दे, तो समझना चाहिए कि खेत में जरूरत से ज्यादा नमी है। ऐसी स्थिति में कुछ दिन इंतजार करना बेहतर रहता है ताकि मिट्टी की स्थिति सामान्य हो सके। Kharif Crop Sowing Tips
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सही समय पर बुवाई से बढ़ेगा उत्पादन और मुनाफा
खरीफ फसलों की बेहतर पैदावार के लिए सही समय पर बुवाई, पर्याप्त नमी और खेत की वैज्ञानिक तैयारी बेहद आवश्यक है। यदि किसान मॉनसून की पहली बारिश के बजाय पर्याप्त वर्षा होने का इंतजार करें और मिट्टी की नमी की जांच के बाद ही बुवाई करें, तो फसल का अंकुरण बेहतर होगा, पौधों की बढ़वार मजबूत होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। इसलिए जल्दबाजी में बुवाई करने के बजाय मौसम की स्थिति और खेत की नमी का आकलन करके ही निर्णय लेना किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित होगा। Kharif Crop Sowing Tips
