El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga: El Niño (अल नीनो) का प्रभाव केवल खेती और बारिश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर पशुपालन पर भी पड़ता है। कम बारिश और लंबे समय तक सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण खेतों और चरागाहों में खरपतवार (Weeds) तेजी से फैलने लगती हैं। यही खरपतवार भेड़, बकरी और अन्य चरने वाले पशुओं के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं।
पशु विशेषज्ञों के अनुसार, कई जहरीली खरपतवार ऐसी होती हैं जो पशुओं के शरीर पर चिपककर उनकी त्वचा, आंखों और ऊन को नुकसान पहुंचाती हैं। वहीं कुछ खरपतवारों की पत्तियां और बीज खाने से पशुओं में पीलिया, दस्त, लीवर और किडनी संबंधी रोग, गर्भपात और यहां तक कि मौत का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए El Niño के दौरान पशुपालकों को चराई और पशु प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
कम बारिश में खरपतवार क्यों बढ़ती है?

जब मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और बारिश कम होती है, तब खेतों और खाली जमीन की नमी घटने लगती है। ऐसी परिस्थितियों में कई प्रकार की जंगली खरपतवार तेजी से विकसित होती हैं। ये खरपतवार फसलों के साथ पोषक तत्वों और पानी के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं, जिससे उत्पादन घटता है। इसी के साथ, चरागाहों में उपलब्ध हरे चारे की कमी होने पर भेड़ और बकरियां मजबूरी में जहरीली खरपतवार भी खा लेती हैं। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
भेड़-बकरियों को खरपतवार से कैसे होता है नुकसान?
खरपतवार पशुओं को दो तरह से नुकसान पहुंचाती हैं। पहली, जब पशु इन्हें खाते हैं और दूसरी, जब इनके कांटेदार फल, बीज या पत्तियां शरीर से चिपक जाती हैं। कई खरपतवार ऊन को खराब कर देती हैं, जबकि कुछ आंखों की रोशनी कम करने, त्वचा रोग और संक्रमण का कारण बनती हैं। कुछ जहरीली खरपतवार सीधे लीवर, किडनी और पाचन तंत्र पर हमला करती हैं, जिससे पशु गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
इन खरपतवारों से रहें सावधान
1. Xanthium Species (जैंथियम)
यह खरपतवार विशेष रूप से भेड़ और बकरियों के ऊन को नुकसान पहुंचाती है। इसके कांटेदार फल शरीर से चिपक जाते हैं, जिससे ऊन की गुणवत्ता खराब होती है और पशुओं को दर्द व संक्रमण हो सकता है।
2. Lantana camara (लैंटाना कैमरा)
इसकी पत्तियां खाने से पशुओं में पीलिया, आंखों की समस्या और लीवर संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। लंबे समय तक सेवन करने पर पशु की स्थिति गंभीर हो सकती है। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
3. Congress Grass (गाजर घास)
गाजर घास के संपर्क में आने से पशुओं की त्वचा पर खुजली, सूजन और एलर्जी की समस्या हो जाती है। लगातार संपर्क से त्वचा संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
4. Cocklebur (कॉकलेबर या छोटा धतूरा)
यह खरपतवार पशुओं के लीवर, किडनी और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इसे खाने से पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
5. Johnson Grass (जॉनसन घास)
यह जहरीली घास पशुओं के पूरे शरीर पर असर डालती है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर विषाक्तता (Toxicity) का खतरा बढ़ जाता है। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
6. Puncturevine (पंक्चरवाइन)
यह खरपतवार मुख्य रूप से सूखे क्षेत्रों में पाई जाती है। इसके कांटेदार फल भेड़ों के खुरों, आंखों और त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार यह पाचन तंत्र को भी प्रभावित करती है।
7. Xanthium strumarium (जैंथियम स्ट्रूमेरियम)
इसके कांटेदार फल पशुओं के शरीर और ऊन में चिपक जाते हैं, जिससे त्वचा में घाव और संक्रमण होने की संभावना रहती है।
8. Astragalus (एस्ट्राग्लाओस)
राजस्थान सहित कई शुष्क क्षेत्रों में मिलने वाली यह खरपतवार गर्भवती भेड़ और बकरियों के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। इसे खाने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
9. Rhododendron (रोडोडेंड्रोन)
यह खरपतवार मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों, खासकर कश्मीर में पाई जाती है। इसके सेवन से पशुओं को दस्त, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी की समस्या हो सकती है। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
10. Leafy Spurge (पत्तेदार स्परेज)
यह खरपतवार पाचन तंत्र को प्रभावित करती है और भेड़ों में दस्त तथा कमजोरी का कारण बनती है।
11. Chenopodium (चेनोपोडियम)
सूखे की स्थिति में यह खरपतवार तेजी से फैलती है। इसमें नाइट्रेट की मात्रा अधिक होने के कारण इसे खाने वाले पशुओं को सांस लेने में कठिनाई और विषाक्तता की समस्या हो सकती है।
12. Nettle (नीटल)
इस खरपतवार के महीन बाल पशुओं की त्वचा पर खुजली, जलन और एलर्जी पैदा करते हैं। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
El Niño के दौरान पशुपालक कैसे करें बचाव?
El Niño के प्रभाव के दौरान पशुपालकों को चराई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भेड़ और बकरियों को ऐसे क्षेत्रों में चराने से बचाएं जहां जहरीली खरपतवार ज्यादा मात्रा में मौजूद हों। चरागाहों की नियमित सफाई करें और खरपतवार को समय-समय पर हटाते रहें। पशुओं को पर्याप्त हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराएं ताकि वे भूख के कारण जहरीली खरपतवार न खाएं। यदि किसी पशु में आंखों की समस्या, त्वचा पर सूजन, दस्त, कमजोरी या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
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पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
El Niño के दौरान सूखे और कम बारिश की स्थिति में चरागाहों की नियमित निगरानी करें। जहरीली खरपतवार की पहचान कर उन्हें समय रहते नष्ट करें। गर्भवती भेड़ और बकरियों को सुरक्षित स्थान पर रखें तथा उन्हें केवल स्वच्छ और सुरक्षित चारा ही खिलाएं। नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण भी पशुओं को बीमारियों से बचाने में मदद करता है। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
निष्कर्ष
El Niño का प्रभाव केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि भेड़-बकरियों और अन्य चरने वाले पशुओं की सेहत पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। कम बारिश के कारण बढ़ने वाली जहरीली खरपतवार पशुओं में त्वचा रोग, आंखों की समस्या, पीलिया, गर्भपात, लीवर और किडनी की बीमारी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती हैं। यदि पशुपालक समय रहते चरागाह प्रबंधन, सुरक्षित चारा और नियमित पशु स्वास्थ्य जांच पर ध्यान दें, तो इन खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है। El Nino Se Bhed Bakri Ki Sehat Par Kaisa Asar Hoga
