छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने इस वर्ष अल नीनो के संभावित प्रभाव और सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है. विभाग ने किसानों को मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फसल चयन करने और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी है. इसके तहत दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की कुल 9 फसलों की सूची जारी की गई है,

जिनकी बुवाई सूखे या कम बारिश की स्थिति में अपेक्षाकृत सुरक्षित और लाभदायक मानी जाती है. कृषि विभाग का कहना है कि मौसम के अनुसार फसल चयन करने से उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है और किसानों की आय को भी सुरक्षित रखा जा सकता है. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
सूखे इलाकों में इन 9 फसलों की खेती करें
अल नीनो के संभावित प्रभाव और सामान्य से कम बारिश की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह जारी की है. सरकार का उद्देश्य सूखे जैसी परिस्थितियों में किसानों को फसल नुकसान और आर्थिक हानि से बचाना है. कृषि विभाग ने किसानों को अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती अपनाने की सलाह दी है. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
इसी के तहत विभाग ने 9 उपयुक्त फसलों की सूची जारी की है, जिन्हें कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाना अधिक सुरक्षित और लाभदायक माना गया है. किसानों को इन फसलों की खेती के लिए उन्नत गुणवत्ता वाले बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और बेहतर उपज मिल सके. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti

इसके अलावा राज्य सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है. जो किसान धान की जगह दलहन और तिलहन की खेती करेंगे, उन्हें प्रति एकड़ 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी. सरकार का मानना है कि यह पहल कम वर्षा की स्थिति में किसानों की आय सुरक्षित रखने, पानी की बचत करने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
अगले तीन दिन तेज बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट
छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय हो चुका है और इसका असर प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग के अनुसार आगामी दो से तीन दिनों के दौरान मानसून के राज्य के शेष हिस्सों में भी आगे बढ़ने की संभावना है. इसके प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
मौसम विज्ञानी डॉ. गायत्री वाणी ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई इलाकों में मेघगर्जन के साथ अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जबकि कुछ स्थानों पर वज्रपात भी हुआ है. मौसम विभाग ने लोगों और किसानों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने तथा खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
बारिश की गतिविधियां बढ़ने के कारण मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में अगले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है. बारिश की गतिविधियां बढ़ने के कारण मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में अगले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
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जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है. बारिश की गतिविधियां बढ़ने के कारण मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में अगले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
कम पानी वाली फसलों की बुवाई करने की सलाह
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने इस वर्ष अल नीनो के संभावित प्रभाव और सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए किसानों के लिए विशेष फसल सलाह जारी की है. विभाग ने किसानों से मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फसल चयन करने और अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों के बजाय कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों की खेती अपनाने का आग्रह किया है. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
कृषि विभाग ने विशेष रूप से धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और अन्य कम पानी वाली खरीफ फसलों की खेती को बढ़ावा देने की बात कही है. विभाग का मानना है कि यदि किसान इस खरीफ सीजन में कम सिंचाई वाली फसलों की बुवाई करेंगे, तो संभावित सूखे और कम वर्षा की स्थिति में फसल नुकसान का खतरा कम होगा. साथ ही पानी की बचत होगी, उत्पादन लागत घटेगी और किसानों को आर्थिक नुकसान से भी काफी हद तक बचाया जा सकेगा. Sukhe Ilakon Me 9 Fasalon Ki Kheti
विशेषज्ञों के अनुसार मौसम के अनुरूप फसल चयन, उन्नत बीजों का उपयोग और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाकर किसान विपरीत मौसम की परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन और स्थिर आय सुनिश्चित कर सकते हैं.

किसानों को इन फसलों की खेती अपनाने की सलाह
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने संभावित कम वर्षा और सूखे की स्थिति को देखते हुए किसानों को दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती को प्राथमिकता देने की सलाह दी है. विभाग के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलें किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और लाभदायक साबित हो सकती हैं.
विभाग ने किसानों को अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों की बुवाई करने की सलाह दी है. ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं और विपरीत मौसम की परिस्थितियों में फसल नुकसान का जोखिम कम करती हैं.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दलहन और तिलहन फसलें न केवल कम लागत में बेहतर उत्पादन देती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और पोषक तत्वों के संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. वहीं मोटे अनाज की फसलें जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ खेती का बेहतर विकल्प मानी जाती हैं. किसानों को इन फसलों की खेती के लिए राज्य सरकार की ओर से उन्नत गुणवत्ता वाले बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि उन्हें बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिल सके.
दलहन-तिलहन की खेती पर सरकार देगी 15 हजार रुपये प्रति एकड़
कम वर्षा और सूखे की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को धान के बजाय दलहन और तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने का फैसला किया है. इसके तहत कम पानी वाले क्षेत्रों में इन फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी. इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पानी की बचत और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है.
इसके अलावा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दलहन और तिलहन फसलों की खरीद प्रधानमंत्री आशा योजना (PM-AASHA) के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी. इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी और बाजार में कीमतों को लेकर अनिश्चितता भी कम होगी.
सरकारी प्रोत्साहन, उन्नत बीजों की उपलब्धता और समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था को देखते हुए राज्य के कई किसानों ने इस खरीफ सीजन में दलहन और तिलहन फसलों की बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए अधिक लाभदायक और टिकाऊ खेती का विकल्प साबित हो सकती है.
