Makka Rate Today MSP से कम मक्का का भाव, किसानों ने उठाई सरकारी खरीद शुरू करने की मांग

Makka Rate Today MSP से कम मक्का का भाव, किसानों ने उठाई सरकारी खरीद शुरू करने की मांग

Makka Rate Today करनाल जिले की मंडियों में समर मक्का की आवक लगातार बढ़ रही है। इस सीजन में अब तक करीब 3.58 लाख क्विंटल मक्का मंडियों में पहुंच चुका है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। इसके बावजूद अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसान अपनी उपज निजी व्यापारियों को 1,100 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने के लिए मजबूर हैं, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का MSP 2,410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल सैकड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। किसानों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार जल्द से जल्द समर मक्का की MSP पर खरीद शुरू करे, तो किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा और आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी Makka Rate Today

हरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों में गर्मी (समर) की मक्का की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद व्यवस्था लागू न होने के कारण उन्हें अपनी उपज निजी व्यापारियों को MSP से काफी कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। Makka Rate Today

किसानों ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द समर मक्का की MSP पर खरीद शुरू करने की मांग की है, ताकि उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। Makka Rate Today

गर्मी की मक्का रबी और खरीफ सीजन के बीच उगाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण फसल है। इसकी बुवाई आमतौर पर फरवरी-मार्च में आलू, सरसों और मटर जैसी फसलों की कटाई के बाद की जाती है, जबकि इसकी कटाई जून से शुरू होकर जुलाई तक चलती है। बेहतर उत्पादन और बाजार में बढ़ती आवक के बावजूद सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। Makka Rate Today

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 23 जून तक हरियाणा के करनाल जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में 3.58 लाख क्विंटल से अधिक समर मक्का की आवक दर्ज की जा चुकी है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुई 1.89 लाख क्विंटल आवक की तुलना में लगभग दोगुनी है, जो इस बार बेहतर उत्पादन और बढ़े हुए रकबे का संकेत देती है। Makka Rate Today

जिले की मंडियों में सबसे अधिक 1.63 लाख क्विंटल मक्का की आवक करनाल अनाज मंडी में दर्ज की गई है। इसके अलावा इंद्री मंडी में करीब 97,500 क्विंटल, घरौंडा मंडी में 67,116 क्विंटल, निसिंग मंडी में 26,935 क्विंटल और कुंजपुरा मंडी में 3,335 क्विंटल मक्का पहुंच चुकी है। आवक में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद MSP पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को अपनी उपज निजी व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। Makka Rate Today

MSP से कम दाम पर बिक रही मक्का

मंडियों में समर मक्का की आवक लगातार बढ़ने के बावजूद किसानों का आरोप है कि सरकार ने अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद शुरू नहीं की है। सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को अपनी उपज निजी व्यापारियों को 1,100 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बेचनी पड़ रही है, जबकि केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का MSP 2,410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल सैकड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। Makka Rate Today

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भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता बहादुर सिंह मेहला का कहना है कि सरकार किसानों को धान की बजाय मक्का और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित करती है, लेकिन जब फसल बेचने का समय आता है तो MSP पर खरीद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाती। उन्होंने बताया कि हर साल मक्का का समर्थन मूल्य घोषित किया जाता है, लेकिन मंडियों में सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं होने से किसानों को मजबूर होकर निजी व्यापारियों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है। Makka Rate Today

किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही MSP पर समर मक्का की खरीद शुरू करती है, तो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और उन्हें आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकेगी। साथ ही इससे भविष्य में अधिक किसान मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे। Makka Rate Today

मंडियों में मक्का की 100% सरकारी खरीद की मांग

किसानों का कहना है कि केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी मंडियों में मक्का की समय पर और 100 प्रतिशत सरकारी खरीद हो। किसान सुखजिंदर सिंह का कहना है कि सरकार की खरीद नीति में खरीफ और रबी सीजन की तरह समर (गर्मी) की मक्का को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि MSP की केवल घोषणा से किसानों को लाभ नहीं मिलता, जब तक उस मूल्य पर फसल खरीद की प्रभावी व्यवस्था और कानूनी गारंटी न हो।

वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि खरीफ और रबी सीजन की मक्का की खरीद MSP पर की जाती है, जबकि समर मक्का को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। उनके अनुसार, सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसानों के पास अपनी उपज निजी व्यापारियों को MSP से काफी कम कीमत पर बेचने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। Makka Rate Today

उन्होंने सरकार से मांग की कि समर मक्का को भी MSP खरीद व्यवस्था में शामिल किया जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके और मक्का उत्पादन को बढ़ावा मिले। Makka Rate Today

निजी व्यापारियों को फसल बेचने को मजबूर मक्का किसान

विशेषज्ञों का कहना है कि समर मक्का की सरकारी खरीद व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज निजी व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनका मानना है कि यदि सरकार गर्मी (समर) की मक्का की भी MSP पर खरीद शुरू करे, तो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा और आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में मक्का के बजाय मूंग की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है। उन्होंने बताया कि मूंग की फसल में मक्का की तुलना में काफी कम पानी की आवश्यकता होती है।

जहां समर मक्का की फसल को लगभग 15 या उससे अधिक सिंचाई की जरूरत पड़ती है, वहीं मूंग की खेती 3 से 4 सिंचाई में ही अच्छी पैदावार दे सकती है। इसके अलावा मूंग जैसी दलहनी फसल मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से उसकी उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है।

वहीं, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि समर मक्का की MSP पर सरकारी खरीद शुरू करने का निर्णय स्थानीय मंडी समितियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस संबंध में अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाता है। ऐसे में किसान अब सरकार से जल्द निर्णय लेकर समर मक्का की खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

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