El Nino Effect 2026 कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए पहले से ही सतर्क है और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई अहम कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम और कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए जलवायु के अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की गई है, ताकि किसानों को कम नुकसान हो और उत्पादन प्रभावित न हो। El Nino Effect 2026

इसके साथ ही सरकार ने संभावित सूखे और वर्षा की कमी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए एक व्यापक आकस्मिक योजना (Contingency Plan) भी तैयार की है। इस योजना के तहत किसानों को समय पर तकनीकी सलाह, वैकल्पिक फसलों की जानकारी, बीज उपलब्ध कराने और कृषि विभाग के माध्यम से आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी
अल नीनो के प्रभाव के कारण इस बार मॉनसूनी बारिश कमजोर पड़ती नजर आ रही है। इसका असर देश के कई राज्यों के साथ-साथ झारखंड में भी देखने को मिल रहा है, जहां सामान्य से कम वर्षा होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। बारिश की कमी से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है।
इसे देखते हुए राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि कृषि विभाग ने संभावित सूखे की चुनौती से निपटने के लिए एक विस्तृत आपातकालीन (Contingency) योजना तैयार की है। इसके तहत किसानों को आवश्यक कृषि सलाह, वैकल्पिक फसलों की जानकारी और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने भी कम वर्षा वाले क्षेत्रों के किसानों को सूखा सहन करने वाली फसल किस्मों की बुवाई अपनाने की सलाह दी है, ताकि कम बारिश के बावजूद उत्पादन पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।

रांची मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 12 जून को झारखंड में प्रवेश किया था, लेकिन इसकी रफ्तार सामान्य से काफी धीमी रही। यही वजह है कि 23 जून तक राज्य के 24 में से केवल 22 जिलों में ही मानसून पहुंच सका। मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने पीटीआई (PTI) से बातचीत में बताया कि फिलहाल झारखंड में मानसून कमजोर स्थिति में बना हुआ है, जिसके कारण अधिकांश क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं हो रही है। El Nino Effect 2026
हालांकि, मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर मानसून राज्य के शेष दो जिलों—गढ़वा और पलामू—तक भी पहुंच जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 26 जून के बाद मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है और खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है।
16 से अधिक जिलों में 60% से ज्यादा बारिश की कमी
झारखंड में इस बार मानसून की सुस्त रफ्तार का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। राज्य के अधिकांश जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि कार्य प्रभावित होने लगे हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गढ़वा और साहिबगंज शामिल हैं, जहां क्रमशः 99 प्रतिशत और 98 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा, रांची और दुमका को छोड़कर लगभग पूरे राज्य में 41 प्रतिशत से 99 प्रतिशत तक बारिश की कमी बनी हुई है। El Nino Effect 2026

आंकड़ों के अनुसार, 16 से अधिक जिलों में 60 प्रतिशत से ज्यादा वर्षा की कमी रिकॉर्ड की गई है, जो किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सामान्य परिस्थितियों में इस अवधि तक झारखंड में करीब 122.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन 23 जून तक राज्य में केवल 49.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिससे कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। El Nino Effect 2026
कम बारिश के कारण झारखंड में खरीफ सीजन की तैयारियां भी पिछड़ गई हैं। सामान्य तौर पर जून के अंत तक धान सहित अन्य खरीफ फसलों की नर्सरी और बुवाई का काम तेज हो जाता है, लेकिन इस बार पर्याप्त वर्षा नहीं होने से अधिकांश किसान अभी तक खेत तैयार नहीं कर पाए हैं। राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को जारी अपडेट में बताया कि कई जिलों में किसानों ने धान की बुवाई की शुरुआती तैयारियां भी शुरू नहीं की हैं, क्योंकि बारिश की कमी के चलते खेतों में नमी नहीं बन पाई है। El Nino Effect 2026
विभाग के अनुसार, राज्य में वर्षा की कमी पहले ही 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। ऐसे हालात में खरीफ फसलों का रकबा घटने के साथ-साथ उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। El Nino Effect 2026
बारिश नहीं होने से नर्सरी और खेत की तैयारी प्रभावित
लगातार कम बारिश के कारण झारखंड के कई जिलों में खरीफ सीजन की तैयारियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। कृषि विभाग के आधिकारिक बयान के अनुसार, पर्याप्त वर्षा नहीं होने से बड़ी संख्या में किसान अभी तक धान की बुवाई के लिए खेत तैयार नहीं कर पाए हैं। वहीं, जिन किसानों ने धान की पौध तैयार करने के लिए नर्सरी लगाई है, वे भी चिंतित हैं, क्योंकि लगातार नमी की कमी के चलते पौध सूखने का खतरा बढ़ गया है। El Nino Effect 2026
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गढ़वा भी शामिल है, जहां बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण कई गांवों में धान की नर्सरी तक तैयार नहीं हो सकी है। सामान्य वर्षों में जून के अंत तक नर्सरी तैयार हो जाती है और खेतों की जुताई एवं रोपाई की पूरी तैयारी पूरी कर ली जाती है। El Nino Effect 2026
इसके बाद जुलाई के पहले सप्ताह से धान की रोपाई का कार्य शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार कमजोर मानसून और कम बारिश के कारण खेती का पूरा कैलेंडर पीछे खिसकता दिखाई दे रहा है, जिससे खरीफ फसल के उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है
निष्कर्ष
झारखंड में अल नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून के कारण बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। कई जिलों में खेत और धान की नर्सरी तैयार नहीं हो पाई है, जबकि जहां नर्सरी तैयार की गई है वहां पौध सूखने का खतरा बना हुआ है। हालांकि, राज्य सरकार ने आकस्मिक योजना तैयार की है और किसानों को सूखा सहन करने वाली फसल किस्में अपनाने की सलाह दी जा रही है।
यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होकर अच्छी बारिश होती है तो खेती की स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन बारिश में और देरी होने पर किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और खरीफ उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
