GI Tag 2026: मध्य प्रदेश की चार पारंपरिक कृषि फसलों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) का दर्जा मिलने से किसानों और प्रदेश की कृषि को बड़ी पहचान मिली है। कृषि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जीआई टैग मिलने के बाद इन चारों उत्पादों की विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी। GI Tag 2026

इससे देश और विदेश के बाजारों में इनकी मांग बढ़ने की संभावना है, किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और उत्पादों को कानूनी संरक्षण भी प्राप्त होगा। यह उपलब्धि राज्य की पारंपरिक कृषि विरासत को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। GI Tag 2026
GI Tag 2026
मध्य प्रदेश के कृषि और उद्यानिकी उत्पादों को अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है। जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया में राज्य को बड़ी सफलता मिली है। हाल ही में छत्रिय धान, बैंगनी अरहर समेत चार पारंपरिक कृषि फसलों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया है। इन फसलों के लिए आवेदन भौगोलिक संकेत (Geographical Indications) रजिस्ट्री कार्यालय, चेन्नई भेजा गया था, जहां से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त कृषि और अन्य उत्पादों की संख्या 27 से अधिक हो गई है।
जीआई टैग मिलने से इन फसलों की गुणवत्ता और मौलिकता को कानूनी संरक्षण मिलेगा। साथ ही देश-विदेश के बाजारों में इनकी अलग पहचान बनेगी, मांग बढ़ने की संभावना रहेगी और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने में भी मदद मिलेगी। GI Tag 2026

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले महीने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की समीक्षा बैठक में बताया था कि राज्य के कई कृषि उत्पादों और पारंपरिक फसलों को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। उनका कहना था कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की देशभर में अलग पहचान बनेगी, बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सकेगा।
इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। साथ ही जीआई टैग मिलने के बाद इन फसलों की बाजार में विश्वसनीयता बढ़ती है, जिससे इनके खरीदारों का दायरा भी विस्तृत होता है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान हो जाती है। GI Tag 2026
4 पारंपरिक फसलों ने जीता जीआई टैग का तमगा
मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य की 4 पारंपरिक कृषि उपजों को जीआई टैग मिला है. जीआई टैग हासिल करने वाली फसलों में सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैंगनी अरहर और छत्रिय धान शामिल हैं. यह सभी फसलें मध्य प्रदेश की पारंपरिक फसलें हैं और आदिवासी इलाकों में इनकी खूब खेती की जाती है. ये चारों उपजें मुख्य रूप से डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, बालाघाट और शहडोल जैसे आदिवासी बहुल महाकौशल क्षेत्र में उगाई जाती हैं. GI Tag 2026

सिताही कुटकी को मिला जीआई टैग
सिताही कुटकी (Sitahi Kutki) मध्य प्रदेश की एक पारंपरिक लिटिल मिलेट (छोटा बाजरा) किस्म है, जिसे अब जीआई टैग मिल गया है। यह केवल 60 दिनों में तैयार होने वाली फसल है, इसलिए कम अवधि वाली खेती और देर से बुवाई के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। खास बात यह है कि यह वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार देती है और सूखा, नमी की कमी, शूट फ्लाई, ग्रेन स्मट तथा ब्राउन स्पॉट जैसी बीमारियों का बेहतर सामना करने की क्षमता रखती है। GI Tag 2026
इस किस्म की मध्यम ऊंचाई और मजबूत तनों के कारण फसल गिरने (लॉजिंग) की समस्या भी कम होती है। इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ और कम उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उगाया जा सकता है। मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में बैगा और गोंड जनजाति के किसान लंबे समय से इसकी खेती कर रहे हैं। वर्तमान में जिले में करीब 10,395 हेक्टेयर क्षेत्र में सिताही कुटकी की खेती की जा रही है और इसकी औसत उत्पादकता 10 से 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। जीआई टैग मिलने से इस पारंपरिक फसल को नई पहचान मिलेगी और किसानों को बेहतर बाजार व उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है GI Tag 2026
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बैंगनी अरहर को मिला जीआई टैग
बैंगनी अरहर (Purple Pigeon Pea), जो मध्य प्रदेश की पारंपरिक देसी अरहर की एक विशेष किस्म है, को जीआई टैग प्रदान किया गया है। इस किस्म की पहचान इसके पौधों और फलियों पर दिखाई देने वाली हल्की बैंगनी रंगत से होती है। पोषक तत्वों से भरपूर इस अरहर में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है और यह कई सामान्य रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता रखती है।
अच्छे प्रबंधन और अनुकूल परिस्थितियों में बैंगनी अरहर की पैदावार 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। जीआई टैग मिलने से इस किस्म को देश-विदेश के बाजारों में नई पहचान मिलेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। यही कारण है कि इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने किसानों को धान की जगह बैंगनी अरहर की खेती अपनाने की सलाह दी है, ताकि कम पानी में भी अच्छी आय प्राप्त की जा सके। GI Tag 2026
धनिया, मिर्च, लहसुन, आलू और केले को भी दिलाया जाएगा जीआई टैग
कृषि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने बताया कि जीआई टैग मिलने से कृषि उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों में अलग पहचान मिलती है। साथ ही इनकी गुणवत्ता को कानूनी संरक्षण मिलता है और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि जबलपुरी मटर को भी कुछ सप्ताह पहले ही जीआई टैग मिल चुका है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब गुना का कुंभराज धनिया, बुरहानपुर का केला, रतलाम का रियावन लहसुन, खरगोन की मिर्च, इंदौर का मालवी आलू और बरमन भटा समेत कई अन्य पारंपरिक कृषि उत्पादों को भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया पर तेजी से काम कर रही है। इन उत्पादों को जीआई टैग मिलने से मध्य प्रदेश की कृषि विरासत को नई पहचान मिलेगी और किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। GI Tag 2026
मध्य प्रदेश के 27 उत्पादों को मिल चुका है जीआई टैग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश के कृषि, खाद्य और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े 27 प्रतिष्ठित उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त हो चुका है। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों को उनकी भौगोलिक पहचान के आधार पर कानूनी संरक्षण मिलता है और देश-विदेश के बाजारों में अलग पहचान भी बनती है।
राज्य के प्रमुख जीआई टैग प्राप्त कृषि एवं खाद्य उत्पादों में बालाघाट का चिन्नौर चावल, झाबुआ का कड़कनाथ चिकन, रीवा का सुंदरजा आम और मुरैना की गजक शामिल हैं। अब छत्रिय धान, बैंगनी अरहर और कुटकी की पारंपरिक किस्मों को भी जीआई टैग मिलने से मध्य प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की सूची और मजबूत हो गई है, जिससे किसानों और स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार और अधिक मूल्य मिलने की उम्मीद है।
