Dairy Farming India: डेयरी किसानों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है। ICAR-NDRI ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नस्ल सुधार मॉडल की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले दुधारू पशु विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस तकनीक के जरिए बेहतर नस्ल का चयन और प्रजनन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। Dairy Farming India
विशेषज्ञों का मानना है कि यह AI आधारित मॉडल न केवल पशुओं की नस्ल और उत्पादकता में सुधार करेगा, बल्कि डेयरी किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर देशभर में लागू किया जाता है, तो भारत के डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और पशुपालकों को बेहतर गुणवत्ता वाले पशु तैयार करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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भारत में डेयरी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक के साथ नई दिशा देने की दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination-AI) आधारित उन्नत नस्ल सुधार मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया है। इस पहल का उद्देश्य देश में उच्च गुणवत्ता वाली दुधारू नस्लों का विकास करना और पशुपालकों को बेहतर उत्पादक पशु उपलब्ध कराना है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक की मदद से कम लागत में बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशु तैयार किए जा सकेंगे, जिससे दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही पशुओं की नस्ल में सुधार, प्रजनन क्षमता में वृद्धि और डेयरी फार्मिंग की उत्पादकता भी बढ़ेगी। Dairy Farming India

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को बड़े स्तर पर देशभर में लागू किया जाता है, तो यह डेयरी उद्योग को नई मजबूती देने के साथ-साथ लाखों पशुपालकों और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। Dairy Farming India
100 गांवों में चला विशेष अभियान, 39,803 पशुओं पर किया गया कृत्रिम गर्भाधान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के 100 गांवों में वर्ष 2022 से विशेष नस्ल सुधार अभियान शुरू किया। इस परियोजना का उद्देश्य आधुनिक कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination-AI) तकनीक के माध्यम से दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार करना और डेयरी उत्पादन बढ़ाना है। Dairy Farming India
इस अभियान के तहत संस्थान के उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले सांडों के सीमेन का उपयोग करते हुए 39,803 गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया। इनमें से 16,200 पशु सफलतापूर्वक गर्भवती हुए, जिनमें अधिकांश ने स्वस्थ और बेहतर नस्ल के बछड़ों को जन्म दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन नवजात पशुओं में बेहतर आनुवंशिक गुण देखने को मिल रहे हैं, जिससे भविष्य में अधिक दूध उत्पादन, बेहतर स्वास्थ्य और उच्च उत्पादकता की उम्मीद है। Dairy Farming India
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया जाता है, तो यह देश में डेयरी क्षेत्र के विकास, पशुओं की नस्ल सुधार और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। Dairy Farming India

बेहतर नस्ल, तेज विकास और कम लागत में अधिक मुनाफा
ICAR-NDRI के वैज्ञानिकों के अनुसार, कृत्रिम गर्भाधान (AI) आधारित इस उन्नत नस्ल सुधार मॉडल से पैदा होने वाले पशु बेहतर आनुवंशिक गुणों के कारण तेजी से विकसित होते हैं और कम उम्र में ही अधिक उत्पादक बनने लगते हैं। इससे पशुपालकों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली दुधारू नस्ल के पशु तैयार करने का अवसर मिलता है, जिससे पालन-पोषण की लागत घटती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है। Dairy Farming India
बेहतर नस्ल के कारण इन पशुओं की दूध देने की क्षमता भी अधिक होती है, जिससे डेयरी व्यवसाय की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना रहती है। इसके अलावा, स्वस्थ और अधिक उत्पादक पशुओं से लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो यह न केवल पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि देश के डेयरी क्षेत्र को भी अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। Dairy Farming India
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25 प्रशिक्षित कर्मियों ने गांव-गांव पहुंचकर दी कृत्रिम गर्भाधान की सेवाएं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ICAR-NDRI के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के वित्तीय सहयोग से संचालित की गई। इस अभियान को सफल बनाने के लिए मुजफ्फरनगर के लालूखेड़ी स्थित किसान सेवा केंद्र को आधार बनाया गया, जहां से 25 प्रशिक्षित कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination-AI) तकनीशियनों की टीम ने 100 गांवों में पहुंचकर पशुपालकों को आधुनिक नस्ल सुधार तकनीक की जानकारी दी और घर-घर जाकर कृत्रिम गर्भाधान की सेवाएं उपलब्ध कराईं। Dairy Farming India
इस पूरी परियोजना पर करीब 3.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, पशुपालकों के सहयोग और प्रशिक्षित टीम की लगातार निगरानी के कारण अभियान सफल रहा। परियोजना के तहत तैयार हुई बेहतर नस्ल की गायों और भैंसों से भविष्य में अधिक दूध उत्पादन और बेहतर उत्पादकता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। Dairy Farming India
पूरे देश में लागू हो सकता है यह सफल नस्ल सुधार मॉडल
ICAR-NDRI का मानना है कि यह AI आधारित नस्ल सुधार मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण साबित हो सकता है। यदि राज्य सरकारें और पशुपालन विभाग इस मॉडल को अपने-अपने क्षेत्रों में अपनाते हैं, तो दुधारू पशुओं की नस्ल में तेजी से सुधार होगा, दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक के व्यापक स्तर पर लागू होने से पशुपालकों की आय बढ़ाने, बेहतर गुणवत्ता वाले दुधारू पशु तैयार करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है। इसी उद्देश्य से ICAR इस मॉडल को देशभर में विस्तार देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान और पशुपालक इसका लाभ उठा सकें।
निष्कर्ष
ICAR-NDRI द्वारा विकसित AI आधारित नस्ल सुधार मॉडल भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। आधुनिक कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के जरिए बेहतर नस्ल के दुधारू पशु तैयार किए जा रहे हैं, जिससे दूध उत्पादन बढ़ने और पशुपालकों की आय में सुधार की उम्मीद है। यदि इस मॉडल को देशभर में प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह नस्ल सुधार कार्यक्रमों को नई गति देने के साथ-साथ डेयरी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
