कम बारिश का अलर्ट, फिर भी मूंगफली की बुवाई तेज, क्या है वजह? Groundnut Production

कम बारिश का अलर्ट, फिर भी मूंगफली की बुवाई तेज, क्या है वजह? Groundnut Production

Groundnut Production: किसानों का कहना है कि प्री-मानसून के दौरान हुई अच्छी बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी, जिसका लाभ उठाते हुए उन्होंने मूंगफली, मूंग और बाजरा जैसी खरीफ फसलों की समय पर बुवाई कर दी। किसानों का मानना है कि शुरुआती नमी के कारण बीजों का अंकुरण बेहतर हुआ है, जिससे अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

इसके साथ ही बाजरा और अन्य फसलों से पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा भी उपलब्ध हो सकेगा, जिससे पशुपालन करने वाले किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, अब फसलों की आगे की बढ़वार पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो उत्पादन में और सुधार की संभावना है, लेकिन बारिश में अधिक देरी होने पर फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसान अब अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। Groundnut Production

Groundnut Production

मानसूनी बारिश को लेकर बनी अनिश्चितता के बावजूद राजस्थान के किसानों ने इस बार मूंगफली की खेती पर बड़ा दांव लगाया है। हैरानी की बात यह है कि मूंगफली अपेक्षाकृत अधिक पानी की आवश्यकता वाली तिलहनी फसल मानी जाती है, जबकि कृषि वैज्ञानिक लगातार किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली और सूखे का बेहतर सामना करने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। Groundnut Production

Groundnut Production
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इसके बावजूद राज्य के कई किसान बेहतर बाजार भाव, पिछले वर्षों के अच्छे अनुभव और शुरुआती बारिश से खेतों में बनी नमी को देखते हुए मूंगफली की बुवाई कर रहे हैं।

खासकर नागौर बेल्ट में इस खरीफ सीजन के दौरान तिलहन और दलहन फसलों की बुवाई पर किसानों का विशेष जोर देखने को मिला है। राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून के अंत तक राजस्थान में मूंगफली की बुवाई का रकबा बढ़कर 7.13 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। Groundnut Production

दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्तर पर मूंगफली की बुवाई में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।ऐसे में राजस्थान का बढ़ता रकबा यह संकेत देता है कि यहां के किसान मानसून से जुड़े जोखिम के बावजूद बेहतर उत्पादन और मुनाफे की उम्मीद में मूंगफली की खेती पर भरोसा जता रहे हैं। Groundnut Production

राजस्थान के नागौर जिले और उससे सटे इलाकों को दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। यहां हर खरीफ सीजन में बड़ी संख्या में किसान मूंग, मूंगफली, तिल और अन्य तिलहनी फसलों की खेती करते हैं। इस बार भी अल नीनो के प्रभाव और सामान्य से कम मानसूनी बारिश की आशंकाओं के बावजूद किसानों का रुझान इन फसलों की ओर बना हुआ है। खासकर मूंगफली की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। Groundnut Production

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नागौर क्षेत्र के किसानों का मानना है कि प्री-मानसून की अच्छी बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो गई थी, जिसका लाभ उठाते हुए उन्होंने समय पर बुवाई कर दी। अब उन्हें उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सामान्य रहता है, तो मूंगफली समेत अन्य खरीफ फसलों से अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा मिल सकता है।

राजस्थान में बढ़ा मूंगफली की बुवाई का रकबा

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किसानों की सकारात्मक उम्मीदों का असर इस बार मूंगफली की बुवाई पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक राजस्थान में मूंगफली की बुवाई का रकबा 23.57 फीसदी बढ़कर 7.13 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 5.76 लाख हेक्टेयर था। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि किसानों ने शुरुआती बारिश और बेहतर बाजार संभावनाओं को देखते हुए बड़े पैमाने पर मूंगफली की खेती का रुख किया है। Groundnut Production

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जोखिम भरा भी साबित हो सकता है। कम बारिश की आशंका और कई क्षेत्रों में सिंचाई के सीमित साधनों के बावजूद मूंगफली जैसी अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसल का रकबा बढ़ना किसानों के लिए चुनौती बन सकता है। Groundnut Production

यदि मानसून समय पर और पर्याप्त मात्रा में नहीं बरसा, तो फसल की वृद्धि और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में अब राजस्थान के किसान अच्छी और नियमित मानसूनी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि आने वाले सप्ताह उनकी फसल और मुनाफे दोनों के लिए बेहद अहम साबित होंगे। Groundnut Production

मूंगफली की बुवाई बढ़ाने के पीछे हैं कई मजबूत वजहें

कम बारिश की आशंका के बावजूद किसान मूंगफली की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि अन्य खरीफ फसलों की तुलना में मूंगफली से बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है। उनका मानना है कि यदि बारिश कम होने से उत्पादन कुछ घट भी जाए, तब भी मूंगफली की खेती लाभदायक रहती है। एक हेक्टेयर में औसतन 10 क्विंटल तक उत्पादन मिलने के साथ-साथ फसल के अवशेष पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में भी उपयोग किए जाते हैं, जिससे पशुपालन करने वाले किसानों को अतिरिक्त फायदा मिलता है। Groundnut Production

कृषि अधिकारियों के अनुसार, कपास के बाद राजस्थान में मूंगफली सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में शामिल है। अच्छी बाजार मांग, अपेक्षाकृत बेहतर कीमत और दोहरा लाभ (अनाज के साथ चारा) मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने इस खरीफ सीजन में भी मूंगफली की बुवाई को प्राथमिकता दी है। Groundnut Production

अब सिर्फ MSP नहीं, कई फैक्टर देखकर फसल चुन रहे किसान

दिलचस्प बात यह है कि किसानों का रुझान मूंगफली की ओर ऐसे समय में बढ़ा है, जब मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मूंगफली से अधिक है। फसल वर्ष 2026-27 (जुलाई–जून) के लिए मूंगफली का MSP 7,517 रुपये प्रति क्विंटल, मूंग का 8,780 रुपये प्रति क्विंटल और बाजरा का 2,900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। Groundnut Production

इसके बावजूद किसान केवल MSP को आधार बनाकर फसल का चयन नहीं कर रहे हैं। अब वे प्रति हेक्टेयर उत्पादन, बाजार में वास्तविक मांग, संभावित मुनाफा, फसल की लागत, जोखिम और फसल अवशेषों के उपयोग जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं। यही वजह है कि कम बारिश की आशंका के बावजूद इस बार राजस्थान में मूंगफली की बुवाई का रकबा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। Groundnut Production

देशभर में घटी मूंगफली की बुवाई, राजस्थान बना अपवाद

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक देशभर में मूंगफली की बुवाई के रकबे में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इस अवधि तक केवल 8.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक यह आंकड़ा 15.29 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार राष्ट्रीय स्तर पर करीब 6.42 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कमजोर मानसून की आशंका और पानी की उपलब्धता को लेकर बढ़ी चिंता प्रमुख कारण हैं। राजस्थान को छोड़कर कई राज्यों के किसानों ने इस बार अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत वाली फसलों की ओर रुख किया है। इनमें पिपरमेंट, डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलें शामिल हैं। ऐसे में जहां देश के अधिकांश हिस्सों में मूंगफली की बुवाई घटी है, वहीं राजस्थान ने इसके विपरीत रुझान दिखाते हुए मूंगफली के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है।

निष्कर्ष

कम बारिश की आशंका और मानसून की अनिश्चितता के बावजूद राजस्थान के किसानों ने इस बार मूंगफली की खेती पर भरोसा जताया है। बेहतर मुनाफा, पशुओं के लिए पौष्टिक चारा और बाजार में अच्छी मांग जैसे कई कारण किसानों को इस फसल की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

हालांकि, मूंगफली अधिक पानी की जरूरत वाली फसल है, इसलिए इसकी सफलता अब काफी हद तक समय पर और पर्याप्त मानसूनी बारिश पर निर्भर करेगी। यदि मौसम किसानों का साथ देता है, तो उन्हें बेहतर उत्पादन और अच्छी आय मिल सकती है, लेकिन बारिश में लंबी देरी होने पर जोखिम भी बढ़ सकता है।

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