गन्ना किसानों के लिए सब्सिडी योजना के तहत बीज, कृषि यंत्र और खेती के लिए 2.5 लाख रुपये तक की सरकारी सहायता Sugarcane Farming

गन्ना किसानों के लिए सब्सिडी योजना के तहत बीज, कृषि यंत्र और खेती के लिए 2.5 लाख रुपये तक की सरकारी सहायता Sugarcane Farming

Sugarcane Farming: गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने बीज विकास योजना और गन्ना यंत्रीकरण योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने और खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी। Sugarcane Farming

Sugarcane Farming

इन योजनाओं के तहत उच्च गुणवत्ता वाले गन्ना बीज तैयार करने, सिंगल बड (Single Bud) तकनीक से पौध तैयार करने और आधुनिक कृषि यंत्र व मशीनें खरीदने पर 40 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इतना ही नहीं, पात्र किसानों को विभिन्न मदों में 2.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता भी मिल सकती है, जिससे गन्ने की खेती अधिक लाभदायक और उत्पादक बनने की उम्मीद है। Sugarcane Farming

Sugarcane Farming
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गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें बीज विकास योजना और गन्ना यंत्रीकरण योजना शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले गन्ना बीज तैयार करने, आधुनिक कृषि यंत्र एवं मशीनें खरीदने तथा खेती की लागत कम करने के लिए आकर्षक आर्थिक सहायता और सब्सिडी प्रदान की जाएगी। Sugarcane Farming

इससे गन्ने की खेती अधिक उत्पादक, लाभदायक और तकनीक आधारित बन सकेगी। सबसे खास बात यह है कि दोनों योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जबकि स्वीकृत अनुदान की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और आसान बनी रहेगी।

बीज उत्पादन पर मिलेगा आकर्षक अनुदान

बीज विकास योजना के तहत सत्यापित (Certified) गन्ना बीज तैयार करने वाले किसानों को सरकार की ओर से आकर्षक आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला बीज उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि गन्ने की पैदावार बढ़े और किसानों की आय में भी इजाफा हो सके। Sugarcane Farming

योजना के तहत सामान्य वर्ग के किसानों को 260 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाएगा। वहीं, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के किसानों को 310 रुपये प्रति क्विंटल की आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण बीज के उपयोग और उत्पादन को बढ़ावा देने से गन्ने की खेती अधिक उत्पादक और लाभकारी बनेगी।

Sugarcane Farming
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आधार और प्रजनक बीज उत्पादन पर मिलेगी लाखों रुपये की सहायता

गन्ने की बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने आधार (Foundation Seed) और प्रजनक (Breeder Seed) बीज उत्पादन पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत ईख अनुसंधान संस्थान, पूसा और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, मोतीपुर केंद्र में उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार किए जाएंगे। इस कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार प्रति हेक्टेयर 2.50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराएगी। Sugarcane Farming

इसके साथ ही इस अभियान में चीनी मिलों, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और प्रगतिशील किसानों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि उन्नत और प्रमाणित गन्ना बीज अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके। वहीं, योजना के तहत आधार बीज उत्पादन करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर अधिकतम 70 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और गन्ने की उत्पादकता में सुधार होगा। Sugarcane Farming

सिंगल बड तकनीक अपनाने पर मिलेगा विशेष अनुदान

गन्ने की खेती को अधिक लाभदायक और कम लागत वाली बनाने के लिए सरकार इस बार सिंगल बड (Single Bud) तकनीक को विशेष रूप से बढ़ावा दे रही है। इस तकनीक से कम बीज में अधिक पौध तैयार की जा सकती है, जिससे बीज की खपत घटती है, पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती है और खेती की लागत में भी कमी आती है। Sugarcane Farming

योजना के तहत इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ अधिकतम 15 हजार रुपये तक का विशेष अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा, सत्यापित (Certified) बीज को भी प्रमाणित बीज के समान अनुदान का लाभ मिलेगा, जिससे अधिक से अधिक किसान इस आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। Sugarcane Farming

3,218 कृषि यंत्रों का होगा वितरण

गन्ना खेती में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने गन्ना यंत्रीकरण योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत खेत की तैयारी, गन्ने की रोपाई, सिंचाई, फसल की देखभाल, कीट एवं खरपतवार नियंत्रण और कटाई जैसे सभी कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले आधुनिक कृषि यंत्रों पर किसानों को आकर्षक सरकारी अनुदान मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,218 कृषि यंत्रों का वितरण करने के साथ-साथ 80 यंत्र बैंक स्थापित करना है। इन यंत्र बैंकों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसान भी आवश्यकता के अनुसार कम किराये पर आधुनिक मशीनें प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेती का काम तेज, आसान और कम खर्चीला होगा, वहीं श्रम लागत में भी कमी आएगी।

एससी-एसटी और ईबीसी किसानों को मिलेगा अधिक अनुदान

सरकार ने विभिन्न वर्गों के किसानों के लिए अलग-अलग सब्सिडी का प्रावधान किया है, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ उठा सकें।

  • सामान्य वर्ग के किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी।
  • अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।
  • फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) से जुड़े कृषि यंत्रों पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी।
  • बीज उपचार (Seed Treatment) मशीनों की खरीद पर 80 प्रतिशत तक सरकारी सहायता प्रदान की जाएगी।
  • वहीं, यंत्र बैंक (Custom Hiring Center) स्थापित करने के लिए अधिकतम 8 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।

इन योजनाओं का उद्देश्य गन्ना खेती में आधुनिक मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देना, उत्पादन लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

ऑनलाइन आवेदन करें, अनुदान की राशि सीधे बैंक खाते में मिलेगी

सरकार ने दोनों योजनाओं की आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया है, ताकि किसानों को बिना किसी परेशानी के योजना का लाभ मिल सके। इसके तहत बीज विकास योजना के लिए किसान केन केयर पोर्टल (Cane Care Portal) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, जबकि गन्ना यंत्रीकरण योजना का आवेदन कृषि विभाग के डीबीटी (DBT) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।

योजना के लिए पात्र पाए जाने वाले किसानों को स्वीकृत अनुदान की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों को समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकेगी। सरकार का उद्देश्य डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक आसानी और तेजी से पहुंचाना है।

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