Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की प्रगतिशील महिला किसान कंचन वर्मा ने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान नई तकनीक और आधुनिक खेती को अपनाने का साहस करें, तो पारंपरिक खेती से कहीं अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। केवल 7 दिन की ट्रेनिंग लेने के पश्चात उन्होंने हल्दी की खेती शुरू की और कुछ ही वर्षों में अपनी आय दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ा ली। आज वह जैविक हल्दी की खेती से लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story: 7 दिन की ट्रेनिंग ने बदल दी जिंदगी
Turmeric Farming की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई, जब कंचन वर्मा ने एक टीवी कार्यक्रम में हल्दी की खेती के बारे में जानकारी देखी। बेहतर मुनाफे की संभावना को समझते हुए उन्होंने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में 7 दिनों का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने पारंपरिक गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों के साथ हल्दी की खेती करने का फैसला किया। कंचन बताती हैं कि खेती में नए प्रयोग करने से ही बेहतर परिणाम मिलते हैं। यही सोच उन्हें पारंपरिक खेती से अलग हटकर हल्दी की खेती की ओर ले गई।
पारंपरिक खेती छोड़ नहीं, बल्कि उसमें जोड़ा नया विकल्प
कंचन पहले से गेहूं, मक्का और सब्जियों की खेती कर रही थीं। इन फसलों से एक एकड़ में लगभग 1.5 लाख रुपये की आय होती थी। लेकिन हल्दी की खेती अपनाने के बाद उनकी प्रति एकड़ आय बढ़कर करीब 3 लाख रुपये हो गई। इससे उनकी कुल कृषि आय लगभग दोगुनी हो गई।
सांगली किस्म की हल्दी का किया चयन
प्रशिक्षण के दौरान कंचन ने सांगली किस्म की हल्दी के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह किस्म ज्यादा करक्यूमिन (Curcumin) वाली होती है और औषधीय उपयोग के लिए काफी लोकप्रिय मानी जाती है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से लगभग 8 क्विंटल बीज हल्दी खरीदी और एक एकड़ खेत में इसकी बुवाई की। खेत की अच्छी तरह जुताई करने के बाद गोबर की खाद मिलाई गई और अंकुरित हल्दी की गांठों की बुवाई की गई। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
जैविक तरीके से तैयार की शानदार फसल
कंचन पूरी तरह जैविक खेती करती हैं। उन्होंने खेत में केवल गोबर की खाद और जीवामृत का उपयोग किया। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया गया। यदि कहीं कीटों का प्रकोप दिखाई देता है तो वह ट्राइकोडर्मा जैविक बायोपेस्टिसाइड का उपयोग करती हैं। उनका कहना है कि हल्दी में प्राकृतिक रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है, इसलिए इसमें कीट और रोगों का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
8 महीने में मिली 100 क्विंटल की बंपर पैदावार
जून-जुलाई में बुवाई के बाद हल्दी की फसल लगभग 8 महीने में तैयार हो जाती है। कंचन ने पहले ही वर्ष एक एकड़ से लगभग 100 क्विंटल कच्ची हल्दी का उत्पादन प्राप्त किया, जिसने उनकी उम्मीदों से कहीं बेहतर परिणाम दिए। बाद में खेती का रकबा बढ़ाने के साथ वर्ष 2023 में उन्होंने लगभग 400 क्विंटल हल्दी का उत्पादन हासिल किया, जिससे उनकी कुल आय करीब 12 लाख रुपये तक पहुंच गई। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
प्रोसेसिंग से बढ़ाया मुनाफा
कंचन केवल कच्ची हल्दी बेचने के बजाय उसका प्रोसेसिंग करके हल्दी पाउडर तैयार करती हैं। कटाई के बाद हल्दी को धोया जाता है, उबाला जाता है, धूप में सुखाया जाता है और फिर पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 15 दिन लगते हैं। 100 क्विंटल कच्ची हल्दी से लगभग 20 क्विंटल हल्दी पाउडर तैयार होता है। हालांकि वजन कम हो जाता है, लेकिन प्रोसेसिंग के बाद उत्पाद की कीमत कई गुना बढ़ जाती है, जिससे मुनाफा भी काफी ज्यादा मिलता है। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
खेत से ही बिक जाती है पूरी हल्दी
कंचन अपनी जैविक हल्दी का पैकेट बनाकर सीधे ग्राहकों को बेचती हैं। उनकी हल्दी की स्थानीय स्तर पर इतनी मांग है कि अधिकांश उत्पादन खेत से ही बिक जाता है। वह 150 रुपये प्रति किलो की दर से जैविक हल्दी बेचती हैं। उनका कहना है कि उत्पादन लागत कम होने के कारण उन्हें कम कीमत पर भी अच्छा मुनाफा मिल जाता है। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
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10 एकड़ तक बढ़ाया खेती का दायरा
पहले केवल एक एकड़ में शुरू की गई हल्दी की खेती आज बढ़कर 10 एकड़ तक पहुंच चुकी है। कंचन को इस सीजन में करीब 30 लाख रुपये की आय की उम्मीद है। उनकी सफलता देखकर आसपास के कई किसान भी अब हल्दी की खेती अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
किसानों के लिए प्रेरणा बनीं कंचन वर्मा
कंचन वर्मा का मानना है कि खेती में बदलाव अपनाने से ही बेहतर आय संभव है। उनका कहना है कि जैविक खेती न केवल उत्पादन लागत कम करती है, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और रसायन मुक्त खाद्य पदार्थ भी उपलब्ध कराती है। आज उनकी सफलता हजारों किसानों, विशेषकर महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
सफलता की सीख
कंचन वर्मा की कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण, वैज्ञानिक खेती और जैविक तरीकों को अपनाकर किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। केवल 7 दिन की ट्रेनिंग, नई सोच और मेहनत ने उन्हें एक सफल महिला किसान बना दिया। हल्दी की खेती से उन्होंने न सिर्फ अपनी आय कई गुना बढ़ाई, बल्कि यह भी साबित किया कि खेती में नवाचार ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। Kanchan Verma Turmeric Farming Success Story
