उत्तर प्रदेश सरकार ने Sugarcane Farmers के हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश की सभी चीनी मिलें किसानों को बिना गुणवत्ता जांच के खाद, उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व या कीटनाशक नहीं बेच सकेंगी। सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल प्रमाणित और गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले कृषि उत्पाद ही किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। इस फैसले का उद्देश्य नकली और घटिया कृषि सामग्री पर रोक लगाना, खेती की लागत कम करना और गन्ने का उत्पादन बढ़ाना है।
अब केवल प्रमाणित कृषि सामग्री ही मिलेगी
गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने प्रदेश की सभी चीनी मिलों को नए नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। अब चीनी मिलें केवल वही उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कीटनाशक उपलब्ध करा सकेंगी जो तय गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरे उतरेंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से Sugarcane Farmers को भरोसेमंद कृषि इनपुट मिलेंगे और गन्ने की फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों के उपयोग से उत्पादन बढ़ने और किसानों की आय में सुधार की भी उम्मीद जताई गई है।
NABL लैब जांच के बाद ही होगा वितरण
नई व्यवस्था के तहत किसी भी कृषि उत्पाद का वितरण करने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच सरकार से मान्यता प्राप्त NABL प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य होगा। हर बैच की जांच पूरी होने और सभी मानकों पर सही पाए जाने के बाद ही उसे किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे Sugarcane Farmers को नकली या कम गुणवत्ता वाले उत्पादों से राहत मिलेगी और खेती में उपयोग होने वाली सामग्री की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
सभी कृषि इनपुट को सरकारी मानकों पर खरा उतरना होगा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कीटनाशक संबंधित सरकारी नियमों और गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन करेंगे। यदि कोई उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसे किसानों के बीच वितरित नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था का सीधा लाभ Sugarcane Farmers को मिलेगा क्योंकि उन्हें केवल सुरक्षित और प्रमाणित कृषि सामग्री ही उपलब्ध होगी।
प्रतिबंधित कीटनाशकों पर पूरी तरह रहेगी रोक
सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित सभी कीटनाशकों के वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित उर्वरकों और फसल सुरक्षा उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे Sugarcane Farmers वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती कर सकेंगे और फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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किसान की सहमति के बिना नहीं होगी कोई बिक्री
नई व्यवस्था में किसानों के अधिकारों को विशेष महत्व दिया गया है। अब किसी भी किसान को उसकी इच्छा के विरुद्ध खाद, कीटनाशक या अन्य कृषि सामग्री नहीं दी जा सकेगी। कृषि इनपुट केवल किसान की आवश्यकता और उसके गन्ने के रकबे के अनुसार उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे Sugarcane Farmers पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और वे अपनी जरूरत के अनुसार ही कृषि सामग्री खरीद सकेंगे।
नियम तोड़ने वाली चीनी मिलों पर होगी कड़ी कार्रवाई
यदि कोई चीनी मिल किसानों की सहमति के बिना कृषि सामग्री बेचती है या घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद वितरित करती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा है कि ऐसे मामलों में गन्ना भुगतान से कृषि इनपुट की राशि की कटौती या समायोजन की सुविधा तुरंत समाप्त की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकती है। इस सख्ती का उद्देश्य Sugarcane Farmers के हितों की रक्षा करना और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना है।
बाजार में भी होगी नियमित निगरानी
गन्ना विभाग और कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाजार में उपलब्ध कीटनाशकों, उर्वरकों और अन्य कृषि उत्पादों की नियमित सैंपलिंग करेंगे। उनकी गुणवत्ता की लगातार जांच की जाएगी ताकि किसानों तक केवल सुरक्षित और प्रमाणित उत्पाद ही पहुंच सकें। यदि कोई विक्रेता भ्रामक विज्ञापन करता है या सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी फैलाता है तो उसके खिलाफ कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इससे Sugarcane Farmers को बाजार में मिलने वाले उत्पादों की गुणवत्ता पर अधिक भरोसा मिलेगा।
गन्ना किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई व्यवस्था गन्ना खेती को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रमाणित कृषि इनपुट मिलने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और नकली उत्पादों से होने वाले नुकसान में कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे Sugarcane Farmers को बेहतर उत्पादन, कम लागत और अधिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।
