Cotton Farming: कपास की फसल पर सफेद मक्खी का हमला, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी, तुरंत करें ये काम

Cotton Farming: कपास की फसल पर सफेद मक्खी का हमला, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी, तुरंत करें ये काम

Cotton Farming करने वाले किसानों के लिए पंजाब से बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना के ताजा सर्वे में राज्य के कई कपास उत्पादक क्षेत्रों में सफेद मक्खी (Whitefly) का प्रकोप तेजी से बढ़ता हुआ पाया गया है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि मौसम की मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो अगले कुछ दिनों में इसका असर और अधिक बढ़ सकता है। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कपास की फसल की नियमित निगरानी करें और समय रहते उचित प्रबंधन अपनाएं, ताकि उत्पादन पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

Cotton Farming में नियमित निगरानी क्यों है जरूरी

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार Cotton Farming में सफेद मक्खी की समय पर पहचान सबसे प्रभावी बचाव उपाय है। किसानों को खेत का लगातार निरीक्षण करना चाहिए और पौधों की पत्तियों के नीचे विशेष रूप से नजर रखनी चाहिए। यदि एक पत्ती पर औसतन छह सफेद मक्खियां दिखाई दें तो इसे आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level) माना जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत नियंत्रण के उपाय शुरू करना जरूरी होता है, क्योंकि देर होने पर कीट तेजी से फैलकर पूरी फसल को प्रभावित कर सकते हैं।

Cotton Farming में सफेद मक्खी नियंत्रण के लिए क्या करें

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ने पर किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार फ्लोनिकामिड (Flonicamid), एफिडोपायरोपेन (Afidopyropen) या पाइरिफ्लुक्विनाजोन (Pyrifluquinazon) में से किसी एक अनुशंसित कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करना चाहिए।

बिना सलाह के दवा बदलने या अधिक मात्रा में छिड़काव करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फसल और पर्यावरण दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। समय पर किया गया छिड़काव Cotton Farming में उत्पादन हानि को काफी हद तक कम कर सकता है।

Cotton Farming में ग्रीन लीफहॉपर पर भी रखें नजर

PAU ने किसानों को केवल सफेद मक्खी ही नहीं बल्कि ग्रीन लीफहॉपर की नियमित निगरानी करने की भी सलाह दी है। यदि खेत में विकसित पत्तियों के किनारे पीले पड़ने लगें और वे नीचे की ओर मुड़ने लगें, तो यह ग्रीन लीफहॉपर के हमले का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए। समय पर पहचान और उपचार करने से Cotton Farming में फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों सुरक्षित रहते हैं।

Cotton Farming में पिंक बॉलवर्म से बचाव कब करें

जल्दी बोई गई कपास की फसल में पिंक बॉलवर्म का खतरा अधिक रहता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जब खेत में लगभग 10 से 20 प्रतिशत पौधों पर फूल की कलियां दिखाई देने लगें, तभी नियंत्रण उपाय शुरू कर देना चाहिए। इसी समय अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है। यदि किसान सही समय पर प्रबंधन अपनाते हैं तो Cotton Farming में इस कीट से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

Cotton Farming में व्हाइट बॉलवर्म से बचाव का सही समय

देसी कपास की खेती करने वाले किसानों को व्हाइट बॉलवर्म पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए। विश्वविद्यालय के अनुसार जब लगभग 25 प्रतिशत पौधों पर फूल आने लगें, तभी अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए। सही समय पर किया गया प्रबंधन फसल को नुकसान से बचाता है और बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त करने में मदद करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि Cotton Farming में सभी प्रमुख कीटों की निगरानी एक साथ करना अधिक लाभदायक रहता है।

Cotton Farming के लिए 33 प्रतिशत बीज सब्सिडी, फिर भी किसानों की रुचि घटी

पंजाब सरकार कपास की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बीजों पर 33 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसके बावजूद किसानों का रुझान कम होता दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष केवल 19 हजार किसानों ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 52 हजार थी।

यानी एक साल में करीब 63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कीटों के हमले, मौसम की अनिश्चितता और उत्पादन में नुकसान के कारण कई किसान Cotton Farming छोड़कर दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

Cotton Farming करने वाले किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान सप्ताह में कम से कम दो बार अपने खेतों का निरीक्षण करें और पत्तियों के नीचे कीटों की संख्या पर विशेष ध्यान दें। आर्थिक क्षति स्तर तक पहुंचने पर ही अनुशंसित कीटनाशक का उपयोग करें। अनावश्यक दवा का छिड़काव करने से लागत बढ़ती है और लाभकारी कीट भी प्रभावित हो सकते हैं। संतुलित पोषण, उचित सिंचाई और समय पर निगरानी अपनाकर Cotton Farming में बेहतर उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फसल प्राप्त की जा सकती है।

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