आंध्र प्रदेश सरकार ने किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 152 Karod Ki Sinchai Pariyojna की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत डॉवलेश्वरम स्थित ऐतिहासिक सर आर्थर कॉटन बैराज के 117 पुराने गेट बदले जाएंगे। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस परियोजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि इसका लाभ गोदावरी डेल्टा के लाखों किसानों को मिलेगा और खेतों तक समय पर सिंचाई का पानी पहुंचाया जा सकेगा।
152 Karod Ki Sinchai Pariyojna के तहत बदले जाएंगे 117 गेट
152 Karod Ki Sinchai Pariyojna के लिए राज्य सरकार ने 152.95 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस योजना के तहत सर आर्थर कॉटन बैराज के 117 पुराने गेट आधुनिक तकनीक वाले नए गेट से बदले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह काम अगले नौ महीनों के भीतर पूरा किया जाए, ताकि जून 2027 में होने वाले गोदावरी पुष्करालु से पहले परियोजना पूरी हो सके।
किसानों के खेतों तक पहुंचेगा पर्याप्त सिंचाई का पानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि 152 Karod Ki Sinchai Pariyojna का सबसे बड़ा उद्देश्य नहरों के अंतिम छोर तक किसानों के खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचाना है। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में लगभग 27,000 क्यूसेक पानी समुद्र में चला जाता है, जबकि 14,700 क्यूसेक पानी नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा है। नए गेट लगने के बाद पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
10.13 लाख एकड़ कृषि भूमि को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार सर आर्थर कॉटन बैराज से पूर्वी, मध्य और पश्चिमी गोदावरी डेल्टा के लगभग 10.13 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र की सिंचाई होती है। 152 Karod Ki Sinchai Pariyojna पूरी होने के बाद इस पूरे क्षेत्र में पानी की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी, जिससे किसानों को खेती में राहत मिलेगी।
सिंचाई परियोजनाओं पर सरकार का बड़ा निवेश
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि राज्य सरकार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सिंचाई क्षेत्र के विकास पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 152 Karod Ki Sinchai Pariyojna भी इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पोलावरम परियोजना का 89 प्रतिशत कार्य पूरा
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पोलावरम सिंचाई परियोजना का लगभग 89 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाएगा। साथ ही 990 करोड़ रुपये की लागत से डायफ्राम वॉल का पुनर्निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे परियोजना को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
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1,200 करोड़ रुपये से होगा बुनियादी ढांचे का विकास
सरकार ने घोषणा की है कि गोदावरी पुष्करालु 2027 को ध्यान में रखते हुए राजमहेंद्रवरम और गोदावरी पुष्कर घाटों के आसपास लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। इसके अलावा पिचुकालंका और बोब्बरलंका को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने, कोनसीमा तक नई रेलवे लाइन बिछाने और कोव्वूर में कोकोआ सिटी विकसित करने की भी योजना बनाई गई है।
किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने किसानों से बदलते मौसम और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौसम के अनुसार फसलों का चयन, आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग और बेहतर जल प्रबंधन अपनाकर किसान नुकसान कम कर सकते हैं और उत्पादन बढ़ा सकते हैं। 152 Karod Ki Sinchai Pariyojna भी इसी उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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