चावल निर्यात पर संकट: 72 घंटे में बासमती के 10% तक गिरे दाम, निर्यातकों ने मांगी कोविड जैसी राहत Chawal niryat par sankat :72 ghante me basmati ke 10% tak ghire daam , niryatko ne maangi covid jaisi rahat

चावल निर्यात पर संकट: 72 घंटे में बासमती के 10% तक गिरे दाम, निर्यातकों ने मांगी कोविड जैसी राहत Chawal niryat par sankat :72 ghante me basmati ke 10% tak ghire daam , niryatko ne maangi covid jaisi rahat

घरेलू बाजार में भी निर्यात प्रभावित होने का असर देखने को मिल रहा है. पिछले 72 घंटों के अंदर बासमती चावल की कीमतों में लगभग 7 से 10% गिरावट दर्ज की गई है. निर्यात कम होने से बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे दाम नीचे आ रहे हैं.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संकट का असर अब भारत के चावल निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है. समुद्री मार्गों में अस्थिरता और जहाजों की आवाजाही बंद होने से निर्यातकों के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं.

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टेलीग्राफ इंडिया की खबर के अनुसार, फेडरेशन ने अपनी समस्याओं को लेकर एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) को एक प्रतिनिधित्व भेजा है, जिसमें मौजूदा संकट से हो रहे नुकसान का पूरी तरह से दिखाया गया है.

कंटेनर की कमी और जहाजों की रद्द होती कॉल

बढ़ गया मालभाड़ा और बीमा खर्च

स्थिति और मुश्किल इसलिए हो गई है क्योंकि समुद्री परिवहन की लागत भी तेजी से बढ़ गई है. फेडरेशन के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मालभाड़ा लगभग 15 से 20% तक बढ़ गया है. इसके अलावा खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाजों पर युद्ध जोखिम शुल्क (War Risk Surcharge) और बीमा प्रीमियम भी काफी बढ़ गया है. समुद्री जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी बंकर फ्यूल की कीमत भी बढ़कर करीब 580 डॉलर प्रति टन हो गयी है, जो पहले लगभग 520 डॉलर प्रति टन थी. इन सभी कारणों से निर्यातकों की लागत काफी बढ़ गई है.

घरेलू बाजार में भी गिरने लगे दाम

पोर्ट चार्ज में छूट की मांग

निर्यातकों ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि जिन मामलों में जहाज रद्द होने या देरी के कारण माल बंदरगाहों पर अटक गया है, वहां स्टोरेज और डेमरेज जैसे पोर्ट चार्ज माफ किए जाएं. इससे निर्यातकों को आर्थिक राहत मिल सकती है और उनका नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है.

कार्गो को वापस लाने या डायवर्ट करने की सुविधा

फेडरेशन ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन कंटेनरों को निर्धारित गंतव्य तक भेजना संभव नहीं है, उन्हें जरूरत पड़ने पर वापस लाने, दूसरे बंदरगाह पर भेजने या किसी अन्य देश की ओर मोड़ने की अनुमति दी जाए. इसके लिए निर्यातकों ने कस्टम विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से दस्तावेजी प्रक्रिया और भुगतान नियमों में अस्थायी राहत देने की मांग की है.Chawal niryat par sankat :72 ghante me basmati ke 10% tak ghire daam , niryatko ne maangi covid jaisi rahat

‘फोर्स मेज्योर’ जैसी स्थिति घोषित करने की मांग

बैंकों से भी राहत की उम्मीद

फेडरेशन ने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि बैंकों को निर्देश देकर निर्यातकों के लिए अस्थायी कार्यशील पूंजी सीमा बढ़ाई जाए और कर्ज चुकाने की अवधि में थोड़ी ढील दी जाए. निर्यातकों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी इसी तरह की बैंकिंग राहत दी गई थी, जिससे व्यापार को संभालने में काफी मदद मिली थी.

समाधान निकला तो संभल सकता है निर्यात

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