May-June Me Badegi Bhishn Garmi, मई-जून में बढ़ेगी भीषण गर्मी, हीटवेव से फसलों पर असर की चेतावनी

May-June Me Badegi Bhishn Garmi, मई-जून में बढ़ेगी भीषण गर्मी, हीटवेव से फसलों पर असर की चेतावनी

May-June Me Badegi Bhishn Garmi

भारत में इस साल मई और जून के महीनों में भीषण गर्मी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम के इस बदलते पैटर्न का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है. IMD ने चेतावनी दी है कि ज्यादा गर्मी के कारण धान (बोरो), मक्का, मूंग, उड़द और सब्जियों जैसे टमाटर, मिर्च और बैंगन की फसल पर असर पड़ सकता है. गर्मी के कारण फूल झड़ना, दाने ठीक से न बनना और उत्पादन में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.
 देश में गर्मी के मौसम को लेकर मौसम विभाग (IMD) ने जो ताजा अनुमान जारी किया है, वह किसानों और आम लोगों दोनों के लिए अहम संकेत दे रहा है. अप्रैल महीने में जहां तापमान सामान्य या कुछ जगहों पर सामान्य से कम रहने की संभावना है, वहीं मई और जून में गर्मी अपने तेवर दिखा सकती है. May-June Me Badegi Bhishn Garmi

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IMD के अनुसार इस साल गर्मी का असर धीरे-धीरे बढ़ेगा और कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा हीटवेव यानी लू चलने के दिन देखने को मिल सकते हैं.

क्या है हीटवेव और क्यों बढ़ रहा है खतरा?

हीटवेव (Heatwave) एक ऐसी स्थिति होती है जब तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है और कई दिनों तक बना रहता है।
भारत में जब तापमान 45°C या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो इसे गंभीर हीटवेव माना जाता है। May-June Me Badegi Bhishn Garmi

इसके मुख्य कारण:

  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
  • वर्षा की कमी
  • सूखी हवाएं (लू)
  • शहरीकरण और हरियाली में कमी

अप्रैल में राहत, लेकिन हर जगह नहीं

मौसम विभाग का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में अप्रैल के दौरान दिन का तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है. इससे लोगों को शुरुआती गर्मी में कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ दक्षिणी प्रायद्वीप के इलाकों में सामान्य से अधिक गर्मी महसूस की जा सकती है. यानी देश के सभी हिस्सों में एक जैसा मौसम नहीं रहेगा. रात के तापमान की बात करें तो देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ क्षेत्रों में यह सामान्य या उससे कम भी रह सकता है. May-June Me Badegi Bhishn Garmi

मई-जून में बढ़ेंगे हीटवेव के दिन

IMD ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अप्रैल से जून के बीच कई इलाकों में लू के दिनों की संख्या सामान्य से ज्यादा हो सकती है. खासकर पूर्वी भारत, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप में हीटवेव का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.

अप्रैल महीने में ही ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में सामान्य से ज्यादा लू चलने की संभावना जताई गई है. इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी अतिरिक्त 2 दिन तक हीटवेव चल सकती है. May-June Me Badegi Bhishn Garmi

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अप्रैल में बारिश दे सकती है राहत

गर्मी के बीच एक अच्छी खबर यह है कि अप्रैल महीने में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान बारिश सामान्य से 112 प्रतिशत तक हो सकती है, जो औसत 39.2 मिमी से अधिक है.

हालांकि, उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है, जिससे वहां के किसानों को अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. May-June Me Badegi Bhishn Garmi

फसलों पर पड़ सकता है असर

मौसम के इस बदलते पैटर्न का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है. IMD ने चेतावनी दी है कि ज्यादा गर्मी के कारण धान (बोरो), मक्का, मूंग, उड़द और सब्जियों जैसे टमाटर, मिर्च और बैंगन की फसल पर असर पड़ सकता है. गर्मी के कारण फूल झड़ना, दाने ठीक से न बनना और उत्पादन में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.

देर से बोई गई गेहूं, चना और मसूर की फसलें भी जल्दी पक सकती हैं, जिससे दानों का विकास ठीक से नहीं हो पाएगा और उत्पादन घट सकता है.

उत्तर-पश्चिम भारत में गेहूं, सरसों और जौ की फसल पर अंतिम समय की गर्मी का असर पड़ सकता है, जिससे दाने सिकुड़ सकते हैं और पैदावार कम हो सकती है. इसके अलावा आम और केले जैसे फलों में भी फूल और फल गिरने की समस्या बढ़ सकती है, खासकर दक्षिण भारत में. May-June Me Badegi Bhishn Garmi

फसलों पर हीटवेव का असर

भीषण गर्मी का सीधा असर फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ता है।

1. फसलों का झुलसना

तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण पौधों की पत्तियां सूखने लगती हैं और फसल झुलस जाती है।

2. पानी की कमी

मिट्टी में नमी तेजी से खत्म होती है, जिससे सिंचाई की जरूरत बढ़ जाती है।

3. उत्पादन में गिरावट

  • गेहूं, धान, मक्का जैसी फसलों पर ज्यादा असर
  • फल और सब्जियों की गुणवत्ता घटती है

4. फूल और फल गिरना

उच्च तापमान के कारण फूल झड़ जाते हैं, जिससे पैदावार कम होती है।

किन फसलों को सबसे ज्यादा खतरा?

हिटवेव का सबसे ज्यादा असर गेहू, मक्का, धान,सब्जिया – टमाटर , मिर्च , आलू , फल – आम , अंगूर इन पर देखा जा सकता है

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किसानों के लिए जरूरी सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को इस स्थिति से निपटने के लिए कई सुझाव दिए हैं. फसलों को गर्मी से बचाने के लिए हल्की और बार-बार सिंचाई करने की सलाह दी गई है, खासकर फूल आने और दाना बनने के समय. इसके साथ ही, पोटैशियम नाइट्रेट या अन्य रसायनों का छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है, जिससे फसल गर्मी का सामना बेहतर तरीके से कर सके.

उत्तर-पश्चिम भारत के किसानों को खासतौर पर सलाह दी गई है कि वे गेहूं और सरसों की कटाई समय रहते पूरी कर लें, ताकि तेज गर्मी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

मौसम विभाग भी लगातार अपडेट जारी कर रहा है और जल्द ही मानसून 2026 का पहला अनुमान भी सामने आएगा, जिससे आने वाले समय की तस्वीर और साफ हो सकेगी. May-June Me Badegi Bhishn Garmi

निष्कर्ष

मई-जून में बढ़ती भीषण गर्मी और हीटवेव किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। लेकिन सही जानकारी और समय पर उठाए गए कदमों से फसलों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

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