Top 3 Arhar Varieties: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान ऐसी फसलों की तलाश में रहते हैं, जिनसे कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सके। ऐसे में अरहर की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित अरहर की उन्नत किस्में किसानों को बेहतर पैदावार देने में सक्षम हैं।
आज हम आपको अरहर की टॉप 3 उन्नत किस्मों — पूसा अरहर 16, पूसा अरहर 151 (पूसा श्रीजीता) और पूसा अरहर 2017-1 के बारे में बताएंगे, जो किसानों को प्रति हेक्टेयर 27 क्विंटल तक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।
1. पूसा अरहर 16 किस्म
पूसा अरहर 16 किसानों के लिए जल्दी तैयार होने वाली और अधिक उत्पादन देने वाली किस्म मानी जाती है। इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान मात्र 120 दिनों में इसकी फसल तैयार कर सकते हैं।
प्रमुख विशेषताएं:
- फसल अवधि: लगभग 120 दिन
- संभावित उत्पादन: 19 से 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- जल्दी पकने वाली उन्नत किस्म
- फसल कटाई के बाद गेहूं, सरसों और आलू जैसी फसलों की खेती संभव
यह किस्म उन किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है, जो कम समय में अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं। Top 3 Arhar Varieties
2. पूसा अरहर 151 (पूसा श्रीजीता)
पूसा अरहर 151, जिसे पूसा श्रीजीता के नाम से भी जाना जाता है, किसानों के लिए अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों में शामिल है। ICAR द्वारा विकसित यह किस्म बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
प्रमुख विशेषताएं:
- फसल अवधि: लगभग 241 दिन
- संभावित उत्पादन: 20.8 से 27.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- 23.6% तक प्रोटीन की मात्रा
- उकठा (Wilt) रोग प्रतिरोधी किस्म
यह किस्म किसानों को बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन दोनों प्रदान करती है। Top 3 Arhar Varieties
3. पूसा अरहर 2017-1 किस्म
पूसा अरहर 2017-1 जल्दी पकने वाली अरहर की उन्नत किस्मों में से एक है। यह किस्म खासतौर पर दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
प्रमुख विशेषताएं:
- फसल अवधि: लगभग 122 दिन
- संभावित उत्पादन: 21.2 से 21.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- कम समय में अधिक पैदावार
- खरीफ सीजन के लिए बेहतर विकल्प
यह किस्म कम समय में अच्छी उपज देने के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। Top 3 Arhar Varieties
अरहर की बुवाई का सही समय

अगर किसान इस खरीफ सीजन में अरहर की इन उन्नत किस्मों की खेती करना चाहते हैं, तो जून के दूसरे पखवाड़े यानी 15 जून के बाद से जुलाई के पहले सप्ताह तक बुवाई करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। मानसून की शुरुआती बारिश मिलने पर फसल की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। Top 3 Arhar Varieties
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अरहर की खेती से कितनी होगी कमाई?
अगर किसान पूसा अरहर 16, पूसा अरहर 151 (पूसा श्रीजीता) और पूसा अरहर 2017-1 जैसी उन्नत Arhar Varieties की खेती करते हैं, तो उन्हें प्रति हेक्टेयर 20 से 27 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो सकता है। बाजार में अरहर दाल की लगातार बढ़ती मांग के कारण किसानों को अच्छे दाम भी मिलते हैं।
इन उन्नत किस्मों की खेती से किसान प्रति एकड़ लगभग ₹35,000 से ₹48,000 तक की कमाई कर सकते हैं। ऐसे में अरहर की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल साबित हो सकती है।
निष्कर्ष
अरहर की उन्नत किस्मों की खेती किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमाने का शानदार अवसर है। अगर किसान सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद प्रबंधन और उन्नत तकनीकों का उपयोग करें, तो वे कम समय में अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। खरीफ सीजन में पूसा अरहर 16, पूसा अरहर 151 और पूसा अरहर 2017-1 जैसी किस्में किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं। Top 3 Arhar Varieties
