महाराष्ट्र भारत के कुल अनार उत्पादन का आधे से भी अधिक हिस्सा पैदा करता है. वर्ष 2021- 22 में देश के कुल उत्पादन का लगभग 54.85 फीसदी अनार महाराष्ट्र में ही हुआ. यहां उगाई जाने वाली भगवा किस्म सबसे लोकप्रिय है, जो अपने गहरे लाल रंग, मुलायम बीज और लंबे समय तक खराब न होने की क्षमता के कारण निर्यात के लिए ज्यादा पसंद की जाती है. Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare

जब भी अनार की बात होती है, तो लोगों दिमाग में पहला नाम अफगानिस्तान का आता है. क्योंकि अफगानिस्तान का अनार अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. लेकिन लोगों को मालूम होना चाहिए की महाराष्ट्र के सोलापुर में उगाए जाने वाला अनार भी किसी मायने में कम ही है. अपनी खासियत और उमदा स्वाद के चलते सोलापुर के अनार को जीआई टैग भी मिला हुआ है. इसके बाद से इसकी मांग विदेशों में बढ़ गई है. फिरलहाल सोलापुर में उगाए जाने वाले अनार की सप्लाई दुबई सहित कई देशों में हो रही है. इससे किसानों की अच्छी कमाई हो रही है.
सोलापुर देश में अनार उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां की हल्की और रेतीली मिट्टी तथा अनुकूल जलवायु अनार की खेती, खासकर भगवा अनार किस्म के लिए बहुत उपयुक्त है. जिले के सांगोला तालुका के किसान सबसे अधिक अनार उगाते हैं. खास बात यह है कि यहां के किसान ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे कई किसान हर साल लाखों रुपये की कमाई रहे हैं Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare अनार उत्पादन में हिस्सेदारी लगभग 54.85 फीसदी
ऐसे महाराष्ट्र की देश के कुल अनार उत्पादन में हिस्सेदारी लगभग 54.85 फीसदी है. यहां की सूखी जलवायु, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और आधुनिक खेती तकनीकें उच्च गुणवत्ता वाले अनार की खेती के लिए अनुकूल हैं. राज्य में भगवा और गणेश जैसी लोकप्रिय किस्में उगाई जाती हैं. खासकर सोलापुर के असलावा नासिक, सांगली और अहमदनगर जिलों में भी किसान अनार उगाते हैं. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार महाराष्ट्र में करीब 17.6 लाख टन अनार का उत्पादन होता है. आधुनिक सिंचाई तकनीक और निर्यात पर ध्यान देने के कारण यहां के किसान ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं और महाराष्ट्र देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अनार निर्यात में अग्रणी बना हुआ है. Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
महाराष्ट्र में अनार का उत्पादन
महाराष्ट्र भारत के कुल अनार उत्पादन का आधे से भी अधिक हिस्सा पैदा करता है. वर्ष 2021- 22 में देश के कुल उत्पादन का लगभग 54.85 फीसदी अनार महाराष्ट्र में ही हुआ. यहां उगाई जाने वाली भगवा किस्म सबसे लोकप्रिय है, जो अपने गहरे लाल रंग, मुलायम बीज और लंबे समय तक खराब न होने की क्षमता के कारण निर्यात के लिए ज्यादा पसंद की जाती है. सोलापुर और सांगली जैसे जिलों को बड़े पैमाने पर खेती और निर्यात प्रोसेसिंग यूनिट होने की वजह से भारत का ‘अनार हब’ भी कहा जाता है. Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
अनार की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
अनार की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे बेहतर मानी जाती है। हल्की सर्दी और गर्म तापमान में इसके पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं।
मिट्टी की बात करें तो बलुई दोमट (Sandy Loam) मिट्टी अनार की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है। खेत की मिट्टी में पानी का अच्छा निकास होना चाहिए, क्योंकि अधिक पानी से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
मार्च में क्यों शुरू करें अनार की खेती?
मार्च का महीना पौध रोपण के लिए अनुकूल माना जाता है। इस समय मौसम संतुलित रहता है जिससे पौधों की जड़ें जल्दी विकसित होती हैं।
मार्च में अनार की खेती शुरू करने के फायदे:
- पौधों की ग्रोथ तेजी से होती है
- गर्मी शुरू होने से पहले पौधे मजबूत हो जाते हैं
- रोग और कीटों का खतरा कम रहता है
- पौधों की जीवित रहने की दर ज्यादा होती है Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
गर्म और शुष्क जलवायु अनार की खेती के लिए अनुकूल है
सोलापुर में अनार की खेती के लिए जुलाई- अगस्त (मॉनसून) या फरवरी-मार्च (वसंत) का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होती है. यहां की गर्म और अर्ध-शुष्क जलवायु अनार की खेती के लिए आदर्श है. अच्छी पैदावार के लिए अच्छी जल निकासी वाली हल्की से मध्यम बलुई दोमट मिट्टी (pH 6.5–7.5) सबसे बेहतर मानी जाती है. ऐसे किसान आमतौर पर भगवा किस्म लगाते हैं, जो व्यावसायिक रूप से सबसे ज्यादा लाभदायक है. रोपण के लिए 60×60×60 सेमी के गड्ढे बनाकर उन्हें 4-5 मीटर की दूरी पर खोदा जाता है. प्रत्येक गड्ढे में लगभग 20 किलो गोबर की खाद, 1 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट और 50 ग्राम क्लोरोपायरीफास मिलाया जाता है, ताकि पौधे को पोषण मिले और दीमक से बचाव हो सके. Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
गर्मियों में 4-5 दिन पर करें सिंचाई
अनार का पौधा सूखा सहन कर सकता है, लेकिन अच्छी उपज के लिए ड्रिप सिंचाई सबसे बेहतर मानी जाती है. गर्मियों में 4-5 दिन और सर्दियों में 10-12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए. महाराष्ट्र में ‘अंबे बहार’ प्रणाली सबसे लोकप्रिय है, जिसमें दिसंबर-जनवरी में फूल आते हैं और जून-जुलाई में फल तैयार होते हैं. बेहतर उत्पादन के लिए पौधों की नियमित कटाई-छंटाई, संतुलित सिंचाई और सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे बोरॉन का उपयोग भी जरूरी होता है. Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
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कीट और रोग नियंत्रण
अनार की खेती में कुछ कीट और रोग नुकसान पहुंचा सकते हैं, जैसे:
- फल छेदक कीट
- पत्ती धब्बा रोग
- तना सड़न रोग
इनसे बचाव के लिए खेत की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से दवा का छिड़काव करें।
कब मिला जीआई टैग का दर्जा
बता दें कि महाराष्ट्र से अनार का निर्यात अमेरिका और दुबई सहित कई देशों में होता है. कृषि विपणन बोर्ड ने पिछले साल कहा था कि वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को करीब 300 टन अनार निर्यात करने की योजना है. अमेरिकी बाजार में अनार की मांग तेजी से बढ़ रही है. वहां अनार का बाजार इस समय करीब 1.2 से 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर का माना जा रहा है. ऐसे सोलापुर के अनार को वर्ष 2016 में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला था, जिससे इसकी पहचान और महत्व बढ़ गया. यहां उगाया जाने वाला अनार वर्षों से किसानों के लिए सफलता की कहानी बन चुका है. महाराष्ट्र में लगभग 2 लाख परिवार अनार की खेती से अपनी आजीविका कमा रहे हैं और इससे किसानों की आय में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है. Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare
सोलापुर अनार की खासियत
- 2016 में मिला जीआई टैग
- अमेरिका होता है भारी निर्यात
- महाराष्ट्र अकेले करता है 17.6 लाख टन उत्पादन
- अनार उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 54.85 फीसदी
- 2 लाख परिवार अनार की खेती से जुड़े हैं Anar Ki Kheti March Me Shuru Kare

