Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan भारत में खाद उत्पादन को लेकर एक बड़ी चिंता सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव के चलते देश में खाद उत्पादन 10-15% तक घट सकता है। खाद की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार सब्सिडी देती है. लेकिन जब कच्चे माल और आयातित खाद की कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार का खर्च भी बढ़ जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट के कारण सरकार की सब्सिडी का बोझ 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत के उर्वरक (फर्टिलाइजर) सेक्टर पर भी दिखने लगा है. Crisil Ratings की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो देश में यूरिया और अन्य खादों का उत्पादन 10 से 15 फीसदी तक घट सकता है. यह स्थिति किसानों, खाद कंपनियों और सरकार तीनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadanसप्लाई चेन में बाधा क्यों बनी बड़ी वजह
भारत में खाद उत्पादन का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है. खासकर यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर (DAP, NPK) के लिए जरूरी कच्चा माल जैसे प्राकृतिक गैस, अमोनिया और फॉस्फोरिक एसिड विदेशों से आते हैं. यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस जरूरी होती है, जिसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है।
मिडिल ईस्ट इन कच्चे माल का प्रमुख स्रोत है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में इस्तेमाल होने वाले एलएनजी का करीब 60-65 फीसदी और अमोनिया का 75-80 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. ऐसे में अगर यहां से सप्लाई बाधित होती है, तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
खाद की खपत और आयात की सच्चाई
भारत में खाद की खपत का ढांचा भी इस निर्भरता को साफ दिखाता है. यूरिया देश की कुल खाद खपत का लगभग 45 फीसदी हिस्सा है. वहीं DAP और NPK जैसे कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का हिस्सा करीब एक-तिहाई है, जबकि SSP और MOP बाकी हिस्से को पूरा करते हैं. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
हालांकि देश में उत्पादन होता है, फिर भी यूरिया का करीब 20 फीसदी हिस्सा आयात करना पड़ता है और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का लगभग एक-तिहाई हिस्सा विदेशों से आता है. इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर भारतीय कृषि पर पड़ता है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
उत्पादन घटने का अनुमान और असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले तीन महीनों तक गैस और अमोनिया की सप्लाई प्रभावित रहती है, तो उत्पादन में 10-15 फीसदी की गिरावट आ सकती है. हालांकि सरकार ने यूरिया कंपनियों को 70 फीसदी गैस आवंटित करने का निर्देश दिया है, जिससे असर कुछ हद तक कम हो सकता है. इसके अलावा देश में लगभग तीन महीने का स्टॉक भी मौजूद है, जिससे तत्काल संकट टल सकता है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
और जाने –
क्या खाद का कोई संकट नहीं है? सरकारी आंकड़ों ने खोल दी हकीकत.. जानिए खाद डिमांड, स्टॉक और उत्पादन
बढ़ती लागत से कंपनियों पर दबाव
कच्चे माल की कीमतों में तेजी ने खाद कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अमोनिया की कीमतों में करीब 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है और उन्हें ज्यादा वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ रही है. साथ ही, उत्पादन घटने से उनकी क्षमता उपयोग भी कम होगी, जिससे मुनाफे पर असर पड़ेगा. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
कंपनियों की कमाई पर कैसे पड़ेगा असर
यूरिया कंपनियों की कमाई मुख्य रूप से ऊर्जा दक्षता पर निर्भर करती है. अगर उत्पादन कम होता है, तो ऊर्जा का उपयोग भी कम प्रभावी हो जाता है, जिससे लाभ घटता है. कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर कंपनियों के लिए भी स्थिति आसान नहीं है. उन्हें बढ़ती लागत, सरकारी सब्सिडी दर और बाजार कीमतों के बीच संतुलन बनाना होगा. अगर सरकार सब्सिडी नहीं बढ़ाती, तो कंपनियों के मुनाफे पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी का बोझ
खाद की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार सब्सिडी देती है. लेकिन जब कच्चे माल और आयातित खाद की कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार का खर्च भी बढ़ जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट के कारण सरकार की सब्सिडी का बोझ 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है. यह वित्तीय दबाव सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
किसानों के लिए क्या है चिंता
खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग सबसे ज्यादा होती है. ऐसे में अगर उत्पादन घटता है या सप्लाई प्रभावित होती है, तो किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाएगा. इसके अलावा, अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो खेती की लागत भी बढ़ जाएगी. इससे किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
राहत देने वाले कारक भी मौजूद
हालांकि कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं. बड़ी खाद कंपनियों के पास पर्याप्त नकदी और संसाधन हैं, जिससे वे इस संकट का सामना कर सकती हैं. इसके अलावा सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड भी अच्छा रहा है, जिसने समय-समय पर सब्सिडी और नीतिगत फैसलों के जरिए इस सेक्टर को सहारा दिया है. जरूरत पड़ने पर अन्य देशों से आयात बढ़ाकर भी स्थिति को संभाला जा सकता है. Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो खाद उत्पादन में गिरावट और सब्सिडी का बढ़ता बोझ देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। Bhart Me 10-15% Ghat Sakta H Khad Utpadan

