Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai : कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरपाल सिंह बताते है कि उड़द और मूंग दलहनी फसलें है, जो कम समय में तैयार हो जाती है. इन फसलों को लगाने में ज्यादा लागत भी नहीं आती और किसान कम समय में अच्छा लाभ कमा सकते है. खास बात यह है कि ये फसलें लगभग 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. अगर किसान मार्च या अप्रैल महीने में इनकी बुवाई कर देते है तो मानसून आने से पहले ही फसल तैयार हो जाती है.

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में इन दिनों गेहूं की फसल पककर तैयार हो रही है और कई किसान कटाई भी शुरू कर चुके है. अक्सर देखा जाता है कि गेहूं की कटाई के बाद किसान कुछ समय के लिए खेत खाली छोड़ देते है. लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समय सही फसल बो दी जाए तो किसान अतिरिक्त आय कमा सकते है. गेहूं की कटाई के बाद उड़द और मूंग की बुवाई किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
लोकल 18 से बातचीत के दौरान केवीके के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरपाल सिंह बताते है कि उड़द और मूंग दलहनी फसलें है, जो कम समय में तैयार हो जाती है. इन फसलों को लगाने में ज्यादा लागत भी नहीं आती और किसान कम समय में अच्छा लाभ कमा सकते है. खास बात यह है कि ये फसलें लगभग 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. अगर किसान मार्च या अप्रैल महीने में इनकी बुवाई कर देते है तो मानसून आने से पहले ही फसल तैयार हो जाती है. उन्होंने बताया कि मूंग लगभग 70 से 80 दिन में तैयार हो जाता है वही उड़द 80 से 90 दिन में तैयार हो जाता है.कृषि अधिकारी ने बताया कि मूंग की फसल 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है. एक बीघा खेत में इसकी बुवाई करने में करीब 7 से 8 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि मुनाफा लगभग 70 से 80 हजार रुपये तक हो सकता है. इस तरह कम समय में किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है. इसलिए, किसानों को सलाह दी जाती है कि खेत खाली छोड़ने के बजाय मूंग या उड़द की बुवाई जरूर करें. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
क्या है मूंग बुवाई का तरीका Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
लाइनों में बुवाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना लाभकारी होता है. इस फसल में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती. एक या दो बार सिंचाई से ही पूरी फसल तैयार हो जाती है और इसमें खाद व दवाओं का खर्च भी बहुत कम होता है. इसलिए यह किसानों के लिए लाभकारी फसल मानी जाती है. जब इस फसल में फलियां निकलने लगती हैं तो किसान इसकी दो से तीन बार तुड़ाई कर सकते हैं .मूंग की बुवाई, किसान दो विधियों से कर सकते हैं. पहली, रस्सी की मदद से लाइनों में बुवाई और दूसरी, छिटाई विधि से बुवाई. एक बीघा खेत में बुवाई के लिए लगभग 4 से 5 किलो बीज पर्याप्त होता है. किसान कृष्ण बीज गोदाम से संपर्क कर बीज प्राप्त कर सकते हैं. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
किसान अगेती गेहूं की कटाई के तुरंत बाद मूंग की बुवाई कर सकते हैं. अगर बुवाई में देरी हो जाती है तो आगे चलकर बरसात के मौसम में दिक्कतें बढ़ जाती हैं और फसल में रोग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. बरसात के समय फलियों पर भी इसका असर पड़ सकता है. इसलिए किसान भाई सरसों, चना और मटर की कटाई के तुरंत बाद मूंग की बुवाई कर दें. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
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हल्की नमी रह जाए तब करें मूंग की बुवाई
कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद मौर्य ने बताया कि जो किसान चना, सरसों, मटर या मसूर की कटाई कर चुके हैं, उनके लिए खेत खाली छोड़ने से बेहतर है कि समय पर मूंग की बुवाई कर दें. मूंग की बुवाई करने से पहले कटाई के तुरंत बाद खेत में पानी लगाकर पलेवा कर देना चाहिए. जब खेत में हल्की नमी रह जाए तो जुताई करके मूंग की बुवाई कर देनी चाहिए. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai

उड़द और मूंग की बुवाई करने से खेत में फायदे
डॉ. हरपाल सिंह के अनुसार उड़द और मूंग की खेती करने से खेत की मिट्टी की सेहत भी बेहतर होती है. दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने का काम करती है, जिससे अगली फसल को भी फायदा मिलता है. इस वजह से किसान एक ही खेत से दोहरी कमाई कर सकते है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
उड़द और मूंग की बुवाई से पहले क्या करें
डॉ . हरपाल सिंह बताते हैं कि गेहूं की कटाई के तुरंत बाद खेत की हल्की जुताई कर लेनी चाहिए. इसके बाद खेत को समतल कर बीज की बुवाई करनी चाहिए. उड़द और मूंग की बुवाई लाइन से करने पर पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और फसल की देखभाल भी आसान हो जाती है. बीज की सही मात्रा और उन्नत किस्मों का चयन करने से पैदावार भी बेहतर मिलती है. उन्होंने बताया कि बुवाई के पहले खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए और अच्छी क्वालिटी का बीज होना चाहिए और बीज को कार्बेन्डाजिम और ट्राइकोडर्मा से शोधित जरूर करना चाहिए. ताकि जमाव अच्छा हो और पैदावार अच्छी मिले. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
कौन सी वैरायटी की मूंग करें बुवाई
डॉ. हरपाल सिंह बताते हैं कि मूंग की खास वैरायटी मालवीय ज्योति, मूंग जनप्रिय, HUM-16 और सम्राट प्रजापत की बुवाई करके किसान भाई मूंग की अच्छी पैदावार कर सकते है. यह वैरायटी गोंडा के वातावरण में काफी अच्छी पैदावार देती है. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
कौन सी उड़द की करें बुवाई
डॉ. हरपाल सिंह बताते हैं कि गोंडा के वातावरण के लिए उड़द की कुछ खास वैरायटी है जैसे शेखर 2, उत्तरा, आजाद और आजाद 2 ये वैरायटी गोंडा के वातावरण के लिए काफी अच्छी मानी जाती है. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
डॉ. हरपाल सिंह बताते है कि उड़द और मूंग की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, इसलिए गर्मी के मौसम में भी किसान इसे आसानी से उगा सकते है. अगर समय-समय पर हल्की सिंचाई और खेत की साफ-सफाई की जाए तो फसल अच्छी तैयार होती है. साथ ही, कीट और रोग से बचाव के लिए किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
डॉ. हरपाल सिंह का कहना है कि किसान अगर गेहूं की कटाई के बाद खेत खाली न छोड़कर उड़द या मूंग की खेती करें, तो उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है. कम समय में तैयार होने वाली इन फसलों से किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलता है और खेत का भी सही उपयोग हो जाता है. इस तरह गेहूं के बाद उड़द और मूंग की खेती किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. सही समय पर बुवाई और उचित देखभाल करने से किसान कम लागत में अच्छी पैदावार लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते है. Gehu Ki Katai K Baad Kare Udad-Mung Ki Buwai
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