Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti, Dhan Or Makka Ka Rakaba Ghata , Daalo Ki Or Badhe Kisan जायद फसलों की बुवाई में सुस्ती, धान और मक्का का रकबा घटा, दालों की ओर बढ़े किसान

Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti, Dhan Or Makka Ka Rakaba Ghata , Daalo Ki Or Badhe Kisan जायद फसलों की बुवाई में सुस्ती, धान और मक्का का रकबा घटा, दालों की ओर बढ़े किसान

Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24 मार्च तक कुल 4.27 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी की फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 4.37 मिलियन हेक्टेयर था. पिछले साल कुल जायद फसलों का रकबा 8.4 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंचा था. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti
देश में इस साल गर्मी (जायद) की फसलों की बुवाई थोड़ी धीमी नजर आ रही है.भारत में कृषि पैटर्न लगातार बदल रहा है। इस बार जायद सीजन में बुवाई की रफ्तार धीमी देखी जा रही है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 मार्च तक कुल बोया गया रकबा पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है और स्थिति संभल सकती है. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

इस बार जहां धान और मक्का जैसी फसलों का रकबा घटा है, वहीं दालों की खेती में बढ़ोतरी एक सकारात्मक संकेत के रूप में सामने आई है. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti कितनी हुई बुवाई, क्या कहते हैं आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24 मार्च तक कुल 4.27 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी की फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 4.37 मिलियन हेक्टेयर था. गौर करने वाली बात यह है कि बुवाई का सीजन अभी जारी है. पिछले साल कुल जायद फसलों का रकबा 8.4 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंचा था, इसलिए उम्मीद है कि इस बार भी अंतिम आंकड़े बेहतर हो सकते हैं. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

यद फसल क्या होती है, समझिए

भारत में खेती मुख्य रूप से तीन सीजन में होती है रबी, खरीफ और जायद. जायद यानी गर्मी की फसलें मार्च से जून के बीच उगाई जाती हैं. ये फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और ज्यादातर सिंचाई वाले क्षेत्रों में बोई जाती हैं. इसमें धान, मक्का, दालें और कुछ तिलहन शामिल होते हैं. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

धान और मक्का की बुवाई में कमी

इस साल धान की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है. धान का रकबा घटकर 2.78 मिलियन हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 2.86 मिलियन हेक्टेयर था.

मक्का की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही. इसका रकबा घटकर 4.24 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल यह 5 लाख हेक्टेयर था. इस वजह से कुल मोटे अनाज (कोर्स सीरियल) का क्षेत्र भी घटकर 6.04 लाख हेक्टेयर रह गया है. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

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दालों ने दिखाया अच्छा प्रदर्शन

जहां कुछ फसलें पीछे रहीं, वहीं दालों की खेती ने अच्छा प्रदर्शन किया है. इस साल दालों का कुल रकबा बढ़कर 4.09 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 3.47 लाख हेक्टेयर था. खासकर मूंग और उड़द जैसी फसलों की बुवाई बढ़ी है. किसान अब ऐसी फसलों की ओर झुक रहे हैं जो कम समय में तैयार हो जाएं और जिनमें लागत भी कम लगे. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

दालों की खेती की ओर बढ़ता रुझान

किसान अब दालों की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके पीछे कई फायदे हैं: Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

1. कम पानी में अधिक उत्पादन

दालों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है, जो जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है।

2. बेहतर बाजार मूल्य

दालों की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिलता है।

3. मिट्टी की उर्वरता में सुधार

दालें नाइट्रोजन फिक्सेशन के जरिए मिट्टी को उपजाऊ बनाती हैं। Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

तिलहन में ज्यादा बदलाव नहीं

तिलहन फसलों के क्षेत्र में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया है. इस साल इनका रकबा करीब 4.69 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल 4.73 लाख हेक्टेयर था. इससे यह साफ है कि तिलहन की खेती में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

क्यों आई बुवाई में कमी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार शुरुआती मौसम पूरी तरह अनुकूल नहीं रहा, जिसकी वजह से बुवाई धीमी हुई. कई जगहों पर तापमान ज्यादा था और नमी की कमी भी देखने को मिली, जिससे किसानों ने बुवाई में देरी की. हालांकि अब मौसम में सुधार हो रहा है, जिससे आगे बुवाई तेज होने की उम्मीद है. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

देश में अनाज का स्टॉक मजबूत

एक अच्छी खबर यह भी है कि देश में अनाज का भंडार पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 तक देश के पास कुल 58.4 मिलियन टन खाद्यान्न का स्टॉक था, जो तय बफर सीमा 21.41 मिलियन टन से काफी ज्यादा है. इसमें गेहूं का स्टॉक 27.46 मिलियन टन और चावल का स्टॉक 30.93 मिलियन टन रहा. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

इससे साफ है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और अन्य योजनाओं के लिए फिलहाल अनाज की कोई कमी नहीं है. Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

निष्कर्ष

जायद सीजन में बुवाई की सुस्ती और फसल पैटर्न में बदलाव एक संकेत है कि भारतीय किसान अब अधिक समझदारी से खेती कर रहे हैं। धान और मक्का की जगह दालों की ओर झुकाव भविष्य में टिकाऊ कृषि प्रणाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है। Jayad Fasalo Ki Buvai Me Susti

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