March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafaमार्च-अप्रैल में करें इन सब्जियों की बुवाई, मई – जून तक होगा बड़ा मुनाफा

March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafaमार्च-अप्रैल में करें इन सब्जियों की बुवाई, मई – जून तक होगा बड़ा मुनाफा

March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa मार्च का महीना आखिरकार आ ही गया है, और ऐसा लगने लगा है कि सर्दियों का दौर (आखिरकार!) समाप्त हो गया है और धीरे-धीरे वसंत के लिए रास्ता बना रहा है। मार्च का महीना ऋतुओं के बीच एक ऐसे मोड़ पर स्थित है, जो इसे कुछ महत्वपूर्ण फसलों की बुवाई के लिए आदर्श समय बनाता है। मार्च में बोने के लिए कुछ सबसे भरोसेमंद (और स्वादिष्ट) सब्जियां मिलेंगी।

तो क्या आप सोच रहे हैं कि मार्च में कौन सी सब्जियां लगाएं? आगे पढ़िए, क्योंकि मैं इस महीने बोने के लिए मार्च की कुछ चुनिंदा सब्जियों की सूची लेकर आई हूं । इस शानदार फसल उगाने के मौसम का पूरा फायदा उठाएं!आपको यह पसंद आ सकता हैMarch-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa

March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa

1.ग्वारफली

ग्वारफली की खेती के मुख्य बिंदु:

  • खेत की तैयारी: मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 2-3 बार जुताई करें और 8-10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति एकड़ डालें।
  • बुवाई का समय: मानसून के साथ जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में बुवाई सबसे अच्छी होती है। सिंचित क्षेत्रों में मार्च में भी बुवाई की जा सकती है।
  • बीज की मात्रा और दूरी: प्रति एकड़ 8-10 किलो बीज की आवश्यकता होती है। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सेमी होनी चाहिए।
  • उन्नत किस्में: पुसा नवबहार, पूसा सदाबहार, रतन, एचजी-365 (दाने के लिए)।
  • खाद और उर्वरक: प्रति एकड़ 20-25 किलो यूरिया और 40-50 किलो डीएपी (DAP) बुवाई के समय दें।
  • सिंचाई और खरपतवार: फसल को 2-3 सिंचाई की आवश्यकता होती है। शुरुआती 30-35 दिनों में खरपतवार नियंत्रण आवश्यक है।
  • उत्पादन: 40-45 दिन में तुड़ाई शुरू हो जाती है। औसतन 1000 किलो बीज या 4-5 टन हरी फली प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है। 

सुझाव:

 कीटों (जैसे माहू) से बचाव के लिए उचित कीटनाशक का उपयोग करें और फली के बेहतर विकास के लिए 30-35 दिन बाद 0:52:34 (NPK) का छिड़काव करें। March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa

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2.खीरा

इसे गर्मी (फरवरी-मार्च) और बरसात (जून-जुलाई) में मुख्य रूप से उगाया जाता है। मचान विधि (Trellis) का प्रयोग करने पर प्रति एकड़ 30-35 टन तक बंपर पैदावार मिल सकती है।  March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa

खेती की मुख्य जानकारी:

  • उन्नत किस्में: व्यावसायिक खेती के लिए हाइब्रिड बीजों का चयन करें, जैसे स्टोनवॉल, या स्थानीय बाज़ार में उपलब्ध उन्नत किस्में।
  • मिट्टी और खेत की तैयारी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है। खेत की 2-3 जुताई कर, 2 ट्राली गोबर की खाद डालें।
  • बुवाई का समय और तरीका: गर्मी के लिए 15 फरवरी से मार्च, और बरसात के लिए जून-जुलाई। बीज से बीज की दूरी 1 फीट और कतार से कतार की दूरी 5-6 फीट रखें।
  • मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई: मल्चिंग पेपर का उपयोग करने से नमी बनी रहती है और खरपतवार नहीं उगते। ड्रिप सिंचाई से पानी और खाद (फर्टिगेशन) की बचत होती है।
  • मचान/तार विधि: खीरे के पौधों को बांस और तार के सहारे ऊपर चढ़ाने (मचान विधि) से फल सीधे और हरे रहते हैं, जिससे बाजार में भाव अच्छा मिलता है।
  • खाद और फर्टिलाइजर: बुवाई के समय DAP, पोटाश का उपयोग करें। पौधे की वृद्धि के दौरान ड्रिप के माध्यम से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देते रहें।
  • रोग और कीट: फंगस से बचाव के लिए 5-6 दिन बाद फंगीसाइड का स्प्रे करें। पत्तों के पीलेपन के लिए मैरीबन का प्रयोग कर सकते हैं।
  • तुड़ाई और उत्पादन: रोपाई के लगभग 35-40 दिन बाद पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है। एक एकड़ से लगभग 30-35 टन तक उत्पादन हो सकता हैMarch-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa

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3.ककड़ी

ककड़ी की खेती के मुख्य बिंदु:

  • उपयुक्त समय: 15 फरवरी से 15 मार्च सबसे उत्तम है, लेकिन मार्च के अंत तक भी बोई जा सकती है।
  • मिट्टी और तैयारी: सभी प्रकार की मिट्टी उपयुक्त है, लेकिन रेतीली मिट्टी में सबसे अच्छा उत्पादन होता है। खेत की 2-3 गहरी जुताई करके 5 फीट चौड़ी क्यारी और 2-2.5 फीट की नाली बनाएं।
  • उन्नत किस्में: निर्मल की नगनी, दुर्गापुरी आदि प्रमुख किस्में हैं, जो उच्च उत्पादन देती हैं।
  • बुवाई विधि: एक एकड़ में लगभग 350-400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। बीज को कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) से उपचारित करें। क्यारी में 1 फीट की दूरी पर दो-दो बीज बोएं।
  • खाद और उर्वरक: प्रति एकड़ 100-120 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें। बुवाई के समय 125 किलो एसएसपी (SSP) और 40 किलो पोटाश डालें।
  • सिंचाई और देखभाल: ककड़ी को नमी पसंद है, इसलिए 5-7 दिनों में सिंचाई करें, लेकिन फल तुड़ाई के समय 3-4 दिन का अंतराल रखें।
  • रोग नियंत्रण: गलन और कीटों से बचाने के लिए प्रोफेनोफॉस (Profenofos) या फंगीसाइड का स्प्रे करें।
  • मुनाफा: यह फसल 45-55 दिनों में तोड़ने लायक हो जाती है और लगभग ₹25,000-30,000 की लागत में, प्रति एकड़ 2-3 लाख तक का मुनाफा मिल सकता है।March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa
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4.लौकी

जल निकासी वाली भूमि में मेड़ बनाकर बुवाई करें, मचान विधि (Trellis method) का प्रयोग करें और उन्नत किस्मों जैसे ‘पूसा संदेश’ का चयन करें, जिससे प्रति एकड़ 70-90 क्विंटल तक पैदावार और अच्छी कमाई हो सकती है।

लौकी की खेती के लिए मुख्य बातें:

  • उपयुक्त मिट्टी व जलवायु: गर्म और आर्द्र जलवायु अच्छी रहती है। हल्की दोमट मिट्टी (pH 6.5-7.5) सबसे बेहतर है, जिसमें पानी न रुकता हो।
  • बुवाई का समय:
    • जायद (गर्मी): जनवरी के मध्य से फरवरी-मार्च।
    • खरीफ (बरसात): जून से जुलाई की शुरुआत।
    • रबी (सर्दी): सितंबर के अंत से अक्टूबर।
  • खेत की तैयारी: 3-4 बार जुताई करके मिट्टी भुरभुरी बनाएं और गोबर की खाद (200-250 क्विंटल/हेक्टेयर) मिलाएं।
  • बुवाई और दूरी: एक एकड़ के लिए 1 से 1.5 किलो बीज पर्याप्त है। कतारों के बीच 2-3 मीटर की दूरी और पौधों के बीच 60-90 सेमी की दूरी रखें।
  • खाद और सिंचाई: 100-120 किलो नाइट्रोजन, 50-60 किलो फॉस्फोरस और पोटाश प्रति एकड़ उपयुक्त है। फल आते समय अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। गर्मियों में 4-5 दिन और सर्दियों में 10-12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
  • मचान (Trellis) का उपयोग: लौकी की बेल को मचान (बांस-तार) पर चढ़ाने से फल सीधे और साफ रहते हैं, सड़न कम होती है और पैदावार ज्यादा मिलती है।
  • उन्नत किस्में: पूसा मेघदूत, पूसा मंजरी, काशी बहार, काशी कुंवारी, नरेंद्र लौकी आदि।
  • मुनाफा: उन्नत खेती से 1 एकड़ में 2-3 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।March-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa
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5.तोरई

गर्मियों में 5-7 दिन और बारिश में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। बीज को 2.5×2 मीटर के गड्ढों में बोएं और मचान (ट्रेलिस) विधि से 150-300 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज प्राप्त करें। यह फसल 60-70 दिन में तैयार हो जाती है।

तोरई की खेती की प्रमुख बातें:

  • उपयुक्त मिट्टी और जलवायु: गर्म और आर्द्र जलवायु और अच्छी जल निकासी वाली काली या बलुई दोमट मिट्टी (pH 6.5-7.5) सबसे अच्छी होती है।
  • खेत की तैयारी: खेत की गहरी जुताई करें और अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद (15-20 टन/हेक्टेयर) मिलाएं।
  • बुवाई का समय:
    • गर्मियों के लिए: जनवरी से मार्च।
    • वर्षा ऋतु के लिए: जून से जुलाई।
  • बुवाई विधि और दूरी: मेड़ या नाली विधि अपनाएं। कतार से कतार की दूरी 2.5-3 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 50-60 सेमी रखें।
  • बीज की मात्रा: 3 से 5 किलो प्रति हेक्टेयर।
  • खाद और उर्वरक: प्रति हेक्टेयर लगभग 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करें।
  • सिंचाई और प्रबंधन:
    • गर्मी में 5-7 दिन और सर्दी में 10-15 दिन के अंतर से सिंचाई करें।
    • खरपतवार नियंत्रण के लिए 2-3 बार निराई-गुड़ाई करें।
    • मचान (Trellis) विधि से खेती करने पर पैदावार कई गुना बढ़ जाती है और फल सीधे व साफ रहते हैं।
  • तुड़ाई और उपज: बुवाई के लगभग 45-60 दिनों बाद फल आना शुरू हो जाते हैं। 60-70 दिनों में तुड़ाई शुरू करें और 6-7 दिनों के अंतराल पर बार-बार तुड़ाई करेंMarch-april me kare in sabjiyo ki buvai , may-june tak hoga bda munafa

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