Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa बढ़ा मूंगफली का क्रेज ,बाजार की मांग और अच्छे दाम के कारण किसान छोड़ रहे कपास की खेती

Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa  बढ़ा मूंगफली का क्रेज ,बाजार की मांग और अच्छे दाम के कारण  किसान छोड़ रहे कपास की खेती

Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa भारत में कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले किसान बड़े पैमाने पर कपास की खेती करते थे, वहीं अब मूंगफली की ओर उनका रुझान तेजी से बढ़ रहा है। मूंगफली की मांग सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके इस्तेमाल में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. आजकल लोग मूंगफली को स्नैक के तौर पर ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इसके अलावा पशु चारे के रूप में भी इसकी खपत बढ़ रही है. गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में मूंगफली की खपत करीब 9 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है. Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

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 देश में खेती का पैटर्न धीरे-धीरे बदल रहा है. अब किसान परंपरागत फसलों से हटकर ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026-27 में मूंगफली (ग्राउंडनट) की खेती और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी होने की संभावना है. इसका सबसे बड़ा कारण है बेहतर दाम, लगातार बनी मांग और कम जोखिम वाली खेती. Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

क्यों बदल रहा है किसानों का रुझान?

कई राज्यों में किसान अब कपास जैसी फसलों से दूरी बना रहे हैं. कपास की खेती में लागत ज्यादा है और कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बना रहता है. इसके मुकाबले मूंगफली की खेती किसानों को ज्यादा फायदा दे रही है. यही वजह है कि किसान धीरे-धीरे अपनी खेती की रणनीति बदल रहे हैं और तिलहन फसलों की तरफ बढ़ रहे हैं. Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

मूंगफली के रकबे और उत्पादन में बढ़ोतरी

यूएसडीए के स्थानीय कार्यालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 में मूंगफली का रकबा करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 5.7 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल 5.62 मिलियन हेक्टेयर था.

उत्पादन की बात करें तो इसमें भी करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है और यह 7.75 मिलियन टन तक पहुंच सकता है. गुजरात जैसे राज्यों में उन्नत बीजों और नई तकनीकों के इस्तेमाल से पैदावार में लगातार सुधार हो रहा है, जिससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद और मजबूत हो गई है.Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

खपत और प्रोसेसिंग में भी बढ़ेगा दायरा

मूंगफली की मांग सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके इस्तेमाल में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. आजकल लोग मूंगफली को स्नैक के तौर पर ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इसके अलावा पशु चारे के रूप में भी इसकी खपत बढ़ रही है.

गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में मूंगफली की खपत करीब 9 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है. वहीं इसकी पेराई यानी प्रोसेसिंग में भी लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

मूंगफली की खली और तेल में बढ़ेगा उत्पादन

मूंगफली से बनने वाली खली (ऑयलमील), जो पशुओं के चारे में इस्तेमाल होती है, उसके उत्पादन में भी करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है और यह 1.8 मिलियन टन तक पहुंच सकती है. इसके अलावा मूंगफली तेल के उत्पादन में भी 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. बढ़ती मांग और बेहतर कीमतों के कारण तेल उद्योग को भी इससे फायदा मिलेगा. Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

निर्यात में भी दिखेगा उछाल

मूंगफली के निर्यात में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. खासकर चीन जैसे देशों से लगातार मांग बढ़ रही है. रिपोर्ट के अनुसार, मूंगफली के निर्यात में करीब 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. यह भारत के लिए एक बड़ा मौका है, क्योंकि इससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का फायदा मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी. Bda Mungfali Ka Craz

कपास की खेती में गिरावट

जहां मूंगफली की खेती बढ़ रही है, वहीं कपास का रकबा घटने की संभावना है. अनुमान है कि 2026-27 में कपास की खेती करीब 2 प्रतिशत तक कम हो सकती है. इसका असर कपास के बीज यानी बिनौला के उत्पादन पर भी पड़ेगा, जो घटकर 9.9 मिलियन टन रह सकता है. इसके साथ ही बिनौला खली का उत्पादन भी कम होकर करीब 4 मिलियन टन रहने का अनुमान है.Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

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कुल तिलहन उत्पादन पर असर

हालांकि मूंगफली के उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन कुल तिलहन उत्पादन में थोड़ी गिरावट आ सकती है. इसका कारण यह है कि किसान सोयाबीन जैसी फसलों से दूरी बना रहे हैं.

2026-27 में कुल तिलहन उत्पादन करीब 41 मिलियन टन रहने का अनुमान है. वहीं कुल पेराई लगभग 34 मिलियन टन पर स्थिर रह सकती है. सोयाबीन उत्पादन घटने से कुल खली उत्पादन भी घटकर 20.1 मिलियन टन तक आ सकता है, क्योंकि सोयाबीन से सबसे ज्यादा खली निकलती है. Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

कृषि विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार आधारित खेती (Market-Oriented Farming) का यह बदलाव भविष्य में और तेज हो सकता है। यदि सरकार और नीतिगत समर्थन मिला, तो मूंगफली भारत की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो सकती है। Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

किसानों के लिए क्या मतलब है?

यह बदलाव किसानों के लिए सकारात्मक संकेत देता है. ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की तरफ रुख करने से उनकी आय में सुधार हो सकता है. साथ ही जोखिम भी कम होगा, क्योंकि मूंगफली जैसी फसलें बाजार में स्थिर मांग बनाए रखती हैं. Mungfali Ki Kheti Se Jyada Munafa

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क्यों बढ़ रहा है मूंगफली का क्रेज?

मूंगफली की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:

1. बेहतर बाजार मांग

खाद्य तेलों की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे मूंगफली की कीमतों में मजबूती आई है। घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात में भी मूंगफली की अच्छी मांग देखी जा रही है।

2. अच्छे और स्थिर दाम

किसानों को मूंगफली के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे उनकी आय में स्थिरता आ रही है। इसके विपरीत, कपास के दामों में उतार-चढ़ाव किसानों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

3. कम लागत, ज्यादा फायदा

मूंगफली की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है। इसमें सिंचाई, कीटनाशक और उर्वरकों का खर्च कपास के मुकाबले कम होता है, जिससे किसानों को अधिक मुनाफा मिलता है।

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