Potato Yellow Leaf: सर्दियों के मौसम में आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए कोहरा और अधिक नमी सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। कई जगह किसानों की शिकायत है कि खेत में खड़ी आलू की फसल की पत्तियां अचानक पीली से भूरी होने लगी हैं, किनारों से सूख रही हैं और पौधे की बढ़वार रुकती नजर आ रही है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या तेजी से पूरे खेत में फैल सकती है और पैदावार पर भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आम भाषा में इसे किसान Potato Yellow Leaf की समस्या कहते हैं, लेकिन इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं।
आलू की पत्तियां पीली–भूरी क्यों हो रही हैं?
कोहरे के मौसम में लगातार नमी बने रहने से आलू की फसल पर रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जब दिन में धूप कम निकलती है और रात में तापमान गिर जाता है, तब पत्तियों पर नमी लंबे समय तक बनी रहती है। यही स्थिति फफूंद (फंगल) रोगों के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है। अधिकतर मामलों में आलू की पत्तियों का पीला और भूरा होना अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट या पोषक तत्वों की कमी का संकेत होता है। Potato Yellow Leaf

अर्ली ब्लाइट (Early Blight) – शुरुआती खतरा
अर्ली ब्लाइट रोग में सबसे पहले पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे गोल छल्लों के रूप में फैलने लगते हैं। समय के साथ पूरी पत्ती पीली होकर सूख सकती है। यह रोग आमतौर पर तब ज्यादा फैलता है जब कोहरे के साथ हल्की गर्मी और नमी बनी रहती है। अगर इसे शुरुआती अवस्था में नहीं रोका गया तो यह पौधे की फोटोसिंथेसिस क्षमता को कम कर देता है और कंद का विकास रुक जाता है।
लेट ब्लाइट (Late Blight) – सबसे खतरनाक रोग
लेट ब्लाइट आलू की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। इसमें पत्तियों के किनारों से गहरे भूरे या काले धब्बे बनने लगते हैं, जो तेजी से फैलते हैं। नमी अधिक होने पर पत्तियों के नीचे सफेद फफूंद जैसी परत भी दिखाई दे सकती है। यह रोग कुछ ही दिनों में पूरी फसल को नष्ट कर सकता है। कोहरे और लगातार ठंडे मौसम में लेट ब्लाइट का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा जाता है। Potato Yellow Leaf
पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है वजह
हर बार पत्तियों का पीला पड़ना रोग ही नहीं होता। कई बार नाइट्रोजन, पोटाश या मैग्नीशियम की कमी के कारण भी आलू की पत्तियां पीली या भूरी दिखने लगती हैं। इस स्थिति में पत्तियों पर धब्बों के बजाय पूरा पत्ता हल्का पीला पड़ता है और पौधा कमजोर नजर आता है। Potato Yellow Leaf
Potato Yellow Leaf से फसल को कैसे बचाएं? (तुरंत उपाय)
अगर आपके खेत में आलू की पत्तियां पीली या भूरी हो रही हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। समय पर सही उपाय अपनाकर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
सबसे पहले खेत में जल निकासी पर ध्यान दें। पानी जमा रहने से नमी बढ़ती है और रोग तेजी से फैलता है। सुबह के समय खेत का निरीक्षण करें और संक्रमित पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर दें ताकि रोग अन्य पौधों तक न फैले।
फंगल रोग की स्थिति में किसान मैनकोजेब, क्लोरोथालोनिल या कॉपर आधारित फफूंदनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। यदि लेट ब्लाइट का प्रकोप दिखे तो सिस्टमिक फफूंदनाशक का प्रयोग अधिक प्रभावी रहता है। छिड़काव हमेशा साफ मौसम में करें और 7–10 दिन के अंतराल पर दोहराएं। Potato Yellow Leaf
पोषक तत्वों की कमी की स्थिति में संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें। फसल पर फोलियर स्प्रे के माध्यम से सूक्ष्म पोषक तत्व देने से पत्तियों की हरियाली जल्दी लौटती है।

बचाव ही सबसे अच्छा उपाय
आलू की फसल को Potato Yellow Leaf जैसी समस्या से बचाने के लिए पहले से सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। प्रमाणित और रोगमुक्त बीज का उपयोग करें। खेत में पौधों के बीच उचित दूरी रखें ताकि हवा का संचार बना रहे और नमी अधिक समय तक न ठहरे। जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें, खासकर कोहरे के दिनों में। Potato Yellow Leaf
निष्कर्ष
कोहरे के मौसम में आलू की पत्तियों का पीला या भूरा होना एक गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। सही समय पर रोग की पहचान और उचित प्रबंधन से न केवल फसल को बचाया जा सकता है, बल्कि पैदावार भी बेहतर की जा सकती है। थोड़ी सी सतर्कता और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान आलू की फसल को स्वस्थ और लाभदायक बना सकते हैं। Potato Yellow Leaf.
