पशु खोया तो मिलेगा वापस.. टैग तकनीक का कमाल, 200KM दूर पहुंची भैंसों को टैग से पहचान मालिक तक पहुंचाया

पशु खोया तो मिलेगा वापस.. टैग तकनीक का कमाल, 200KM दूर पहुंची भैंसों को टैग से पहचान मालिक तक पहुंचाया

राजस्थान सरकार की टैगिंग तकनीक से मेहताजी का खेड़ा गांव में मिली चार भटकी भैंसें 200 किमी दूर उनके असली मालिक तक पहुंचाई गईं. यह घटना तकनीक और प्रशासन की सफल पहल का बेहतरीन उदाहरण बनी है.

तकनीक की ताकत और सरकार की पहल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अगर सिस्टम सही हो, तो खोया वस्तू हुआ भी मिल सकता है- फिर चाहे वह मोबाइल हो, गाड़ी हो या फिर एक मवेशी. राजस्थान सरकार द्वारा पशुओं के कानों में लगाए जा रहे टैग ने चार भटकी हुई भैंसों को उनके असली मालिक तक पहुंचा दिया, वो भी 200 किलोमीटर दूर. यह घटना बडलियास क्षेत्र के मेहताजी का खेड़ा गांव की है, जिसने पूरे इलाके में टैग प्रणाली की उपयोगिता का उदाहरण पेश किया.

रात में पहुंचे अनजान मेहमान, टैग ने खोला राज

पशुपालन विभाग, राजस्थान सरकार के अनुसार मेहताजी का खेड़ा निवासी बद्री सिंह चौहान ने मंगलवार रात गांव में चार अनजान भैंसों को घूमते देखा. पशुओं के कानों में पीले रंग के टैग लगे हुए थे, जो राजस्थान सरकार की “पशु पहचान योजना” के तहत लगाए जाते हैं. बद्री सिंह ने तत्काल पशु चिकित्सा केंद्र सुरास के प्रभारी रतनलाल खटीक को इसकी सूचना दी. खटीक ने मौके पर पहुंच कर टैग नंबरों की ऑनलाइन जांच की और जो जानकारी सामने आई, उसने सबको चौंका दिया.

ऑनलाइन डाटाबेस ने जोड़ा 200 किमी दूर का रिश्ता

जांच में सामने आया कि ये भैंसें आसींद तहसील के गांव तिलौली निवासी महिला पशुपालक और जगदीश चंद्र बलाई की थीं। वे कई दिनों से अपने मवेशियों के लापता होने से परेशान थे और ढूंढते-ढूंढते थक चुके थे. टैग की सहायता से जब उन्हें खबर दी गई कि उनकी भैंसें मिल गई हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. तुरंत ही संपर्क स्थापित कर इन पशुओं को उनके असली मालिकों को सौंप दिया गया.

तकनीक का कमाल- अब नहीं खोएंगे पशु

यह घटना इस बात का सटीक उदाहरण है कि किस तरह से आधुनिक तकनीक ग्रामीण भारत के लिए वरदान साबित हो रही है. जैसे मोबाइल फोन या मोटर गाड़ी के चोरी होने पर FIR दर्ज कर लोकेशन ट्रैक कर मालिक तक पहुंचाया जा सकता है, ठीक वैसे ही अब पशुपालक भी अपने मवेशियों को ट्रैक कर सकते हैं. सरकार द्वारा लगाए गए टैग में पशु का यूनिक आईडी नंबर होता है, जिससे उसका पूरा विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज रहता है- मालिक का नाम, पता और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी.

भविष्य के लिए प्रेरणा

इस घटना ने अन्य पशुपालकों को भी जागरूक किया है. अब लोग स्वेच्छा से अपने पशुओं को टैग कराने के लिए आगे आ रहे हैं. सरकार का यह प्रयास न केवल मवेशियों की सुरक्षा में सहायक है, बल्कि पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में भी एक क्रांतिकारी कदम है.

जहां एक ओर तकनीक ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी आसान की है, वहीं अब यह ग्रामीण समाज और पशुपालन क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव ला रही है. यह घटना उन लोगों के लिए एक सीख है जो अभी भी आधुनिक सुविधाओं को अपनाने से हिचकिचाते हैं.

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