उड़द की उन्नत खेती कैसे करें ? बुवाई से कटाई तक की पूरी जानकारी

उड़द की उन्नत खेती कैसे करें ? बुवाई से कटाई तक की पूरी जानकारी

Urad Ki Kheti Kaise Kare :उड़द, जिसे Black Gram के नाम से जाना जाता है, भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है। यह प्रोटीन से भरपूर फसल है और देशभर में दाल के रूप में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाती है। उड़द की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ देने वाली खेती मानी जाती है। इसके अलावा यह फसल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है, क्योंकि इसकी जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्षमता होती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से उड़द की खेती करें, तो बेहतर उत्पादन और शानदार मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

Urad Ki Kheti Kaise Kare

उड़द की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

उड़द मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय जलवायु की फसल है। इसके अच्छे विकास के लिए गर्म और आर्द्र मौसम की आवश्यकता होती है। खरीफ मौसम में इसकी खेती सबसे ज्यादा की जाती है, लेकिन कुछ राज्यों में रबी और गर्मी के मौसम में भी सफलतापूर्वक इसकी खेती की जाती है। उड़द की फसल के लिए 25°C से 35°C तापमान उपयुक्त माना जाता है। अधिक ठंड और जलभराव की स्थिति फसल के लिए नुकसानदायक होती है। सामान्य वर्षा और मध्यम नमी वाली जलवायु उड़द की अच्छी पैदावार के लिए बेहतर मानी जाती है। Urad Ki Kheti Kaise Kare

मिट्टी और खेत की तैयारी

उड़द की खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.8 के बीच होना चाहिए। खेती शुरू करने से पहले खेत की 2 से 3 बार अच्छी जुताई करनी चाहिए। खेत को भुरभुरा और खरपतवार मुक्त बनाना आवश्यक होता है। जल निकासी की उचित व्यवस्था रखना बेहद आवश्यक है, क्योंकि खेत में पानी भरने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 3 साल में एक बार गहरी जुताई करना लाभकारी माना जाता है। इससे मिट्टी में छिपे कीट और रोगजनक नष्ट हो जाते हैं।

उड़द की बुवाई का सही समय

खरीफ मौसम में उड़द की बुवाई जून के अंत से जुलाई की शुरुआत तक की जाती है। मानसून आने के तुरंत बाद बुवाई करना सबसे बेहतर माना जाता है। रबी मौसम में दक्षिण भारत के राज्यों में अक्टूबर से नवंबर के बीच बुवाई की जा सकती है। वहीं गर्मी के मौसम में फरवरी के अंतिम सप्ताह से अप्रैल के पहले सप्ताह तक बुवाई करना उपयुक्त रहता है। किसान लाइन विधि या सीड ड्रिल से बुवाई करें, जिससे पौधों की दूरी समान बनी रहती है और उत्पादन बढ़ता है।Urad Ki Kheti Kaise Kare

बीज दर और पौधों की दूरी

खरीफ मौसम में प्रति हेक्टेयर 12 से 15 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना जाता है। रबी मौसम में 18 से 20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। गर्मी के मौसम में लगभग 20 से 25 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर उपयोग किया जाता है। कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। सही दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त धूप और पोषण मिलता है, जिससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है। Urad Ki Kheti Kaise Kare

बीज उपचार क्यों जरूरी है

उड़द की फसल में अच्छे अंकुरण और रोग नियंत्रण के लिए बीज उपचार बेहद आवश्यक माना जाता है। किसान बुवाई से पहले बीजों को थीरम, कार्बेन्डाजिम या अन्य फफूंदनाशकों से उपचारित करें। रस चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा राइजोबियम और पीएसबी कल्चर से बीज उपचार करने पर पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण बढ़ता है और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। Urad Ki Kheti Kaise Kare

उड़द की फसल में उर्वरक प्रबंधन

अच्छी पैदावार के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन बेहद आवश्यक होता है। सामान्यतः प्रति हेक्टेयर 15-20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40-50 किलोग्राम फास्फोरस और 30-40 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा सल्फर और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग भी फसल के लिए लाभकारी माना जाता है। मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार उर्वरकों को बुवाई के समय बीज से 5-7 सेंटीमीटर नीचे डालना चाहिए, ताकि पौधों को पोषक तत्व आसानी से मिल सकें। Urad Ki Kheti Kaise Kare

सिंचाई और जल प्रबंधन

खरीफ मौसम में सामान्य वर्षा होने पर उड़द की फसल को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन यदि फली बनने के समय नमी की कमी हो, तो सिंचाई करना लाभकारी होता है।गर्मी के मौसम में फसल को 3 से 4 सिंचाई की जरूरत होती है। फूल आने और फली बनने की अवस्था में खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। जलभराव से बचाव के लिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करना चाहिए। Urad Ki Kheti Kaise Kare

खरपतवार नियंत्रण कैसे करें

उड़द की फसल में शुरुआती 40 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं, जिससे फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई और जरूरत पड़ने पर दूसरी निराई करनी चाहिए। रासायनिक नियंत्रण के लिए पेंडीमिथालिन का प्री-इमरजेंस छिड़काव किया जा सकता है। Urad Ki Kheti Kaise Kare

उड़द की प्रमुख बीमारियां और बचाव

उड़द की फसल में पीला मोजेक वायरस, पाउडरी मिल्ड्यू और पत्ता झुलसा जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।

पीला मोजेक वायरस

यह रोग सफेद मक्खी के कारण फैलता है। इसमें पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और फसल की बढ़वार रुक जाती है।

बचाव के उपाय:

  • रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से हटाएं
  • सफेद मक्खी नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें
  • प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें

पाउडरी मिल्ड्यू

इस रोग में पत्तियों और तनों पर सफेद चूर्ण जैसा पदार्थ दिखाई देता है। इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं।

बचाव के उपाय:

  • नीम आधारित जैविक दवाओं का छिड़काव करें
  • जरूरत पड़ने पर सल्फर या कार्बेन्डाजिम का उपयोग करें

पत्ता झुलसा रोग

इस रोग में पत्तियों और तनों पर भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जिससे पौधे सूखने लगते हैं।

बचाव के उपाय:

  • बीज उपचार करें
  • रोगग्रस्त पौधों को खेत से हटाएं
  • उचित फफूंदनाशकों का उपयोग करें. Urad Ki Kheti Kaise Kare

उड़द की फसल में कीट प्रबंधन

उड़द की फसल में चेपा, टोबैको कैटरपिलर, फली छेदक और पॉड बग जैसे कीट नुकसान पहुंचाते हैं।

चेपा

यह कीट पौधों का रस चूसता है, जिससे पत्तियां मुड़ जाती हैं।

टोबैको कैटरपिलर

यह सुंडी पत्तियों को खाकर फसल को नुकसान पहुंचाती है।

फली छेदक

यह कीट फलियों में छेद करके दानों को नुकसान पहुंचाता है।

कीट नियंत्रण के उपाय:

  • नीम का अर्क और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें
  • जरूरत पड़ने पर अनुशंसित रासायनिक दवाओं का छिड़काव करें
  • खेत की नियमित निगरानी करें. Urad Ki Kheti Kaise Kare

कटाई, मड़ाई और भंडारण

जब फसल की लगभग 70 से 80 प्रतिशत फलियां पककर काली हो जाएं, तब कटाई करनी चाहिए। अधिक देरी करने पर फलियां फट सकती हैं और दाने गिरने लगते हैं।

कटाई के बाद फसल को 3-4 दिन धूप में अच्छी तरह सुखाना चाहिए। इसके बाद मड़ाई करके दानों को अलग किया जाता है।

भंडारण से पहले बीजों की नमी 8-10 प्रतिशत तक कम करनी चाहिए। सुरक्षित भंडारण के लिए साफ और सूखे गोदाम का उपयोग करना चाहिए।Urad Ki Kheti Kaise Kare

उड़द की खेती से किसानों को होगा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार उड़द की वैज्ञानिक खेती किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकती है। बाजार में उड़द दाल की मांग लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है। यदि किसान सही समय पर बुवाई, संतुलित पोषण प्रबंधन, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाएं, तो उड़द की खेती से शानदार उत्पादन और अच्छा मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। Urad Ki Kheti Kaise Kare

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