1250 एकड़ में जैविक खेती और डेयरी से 40 करोड़ का टर्नओवर – लेखराम यादव की सफलता की कहानी Success story of organic farmer lekhram yadav

1250 एकड़ में जैविक खेती और डेयरी से 40 करोड़ का टर्नओवर – लेखराम यादव की सफलता की कहानी Success story of organic farmer lekhram yadav

Success story of organic farmer lekhram yadav : राजस्थान के कोटपूतली के रहने वाले प्रगतिशील किसान लेखराम यादव आज देशभर के किसानों और युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुके हैं। एक समय ऐसा था जब वे भी सामान्य किसानों की तरह पारंपरिक खेती और सीमित संसाधनों के बीच अपना जीवन जी रहे थे, लेकिन उन्होंने खेती को केवल जीविका का साधन नहीं बल्कि एक बड़े बिजनेस अवसर के रूप में देखा। यही सोच उन्हें बाकी किसानों से अलग बनाती है।

लेखराम यादव ने बायोटेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और इसके बाद एक NABL-मान्यता प्राप्त लैब में Technical Manager के रूप में काम किया। वहां वे DNA Fingerprinting और GMO Testing जैसे हाई-टेक कार्यों से जुड़े थे। अच्छी नौकरी, अच्छा वेतन और शहर में बेहतर करियर होने के बावजूद उनका मन हमेशा गांव और खेती से जुड़ा रहा। उन्होंने महसूस किया कि रासायनिक खेती के कारण मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसी सोच ने उन्हें नौकरी छोड़कर खेती में कुछ नया और बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। Success story of organic farmer lekhram yadav

2013 में 120 एकड़ से शुरू की जैविक खेती Success story of organic farmer lekhram yadav

साल 2013 में लेखराम यादव ने करीब 120 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने एलोवेरा की खेती पर बड़ा निवेश किया, लेकिन बाजार में सही कीमत नहीं मिलने और अनुभव की कमी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। कई लोगों ने उन्हें खेती छोड़ने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने असफलता को सीख में बदल दिया।

उन्होंने खेती को वैज्ञानिक तरीके से समझना शुरू किया। वे लगातार कृषि विशेषज्ञों से मिले, सेमिनार और ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया और इंटरनेट व यूट्यूब के जरिए नई-नई तकनीकों की जानकारी हासिल की। धीरे-धीरे उन्होंने जैविक खेती के हर पहलू को समझा और अपने फार्म पर प्रयोग शुरू किए। यही प्रयोग आगे चलकर उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बने। Success story of organic farmer lekhram yadav

आज 550 एकड़ से ज्यादा में कर रहे हैं ऑर्गेनिक फार्मिंग

धीरे-धीरे लेखराम यादव ने अपनी खेती का विस्तार करना शुरू किया और आज वे राजस्थान के जयपुर, नागौर और जैसलमेर जिलों के साथ गुजरात के बोटाद क्षेत्र में 550 एकड़ से अधिक भूमि पर जैविक खेती कर रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी खेती का क्षेत्र 1100 एकड़ तक बताया गया है।

उनके फार्म में अनाज, दालें, मसाले, फल, सब्जियां, एलोवेरा और पशुओं के लिए हरा चारा उगाया जाता है। खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। वे गोबर खाद, जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग करते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उनके ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बड़े शहरों तक है, क्योंकि लोग अब केमिकल-फ्री और हेल्दी खाद्य पदार्थों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। Success story of organic farmer lekhram yadav

TCBT और वृक्षायुर्वेद तकनीक से बदली खेती

लेखराम यादव ने खेती में आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक भारतीय कृषि पद्धतियों का शानदार मिश्रण अपनाया। उन्होंने ताराचंद बेलजी तकनीक (TCBT) और वृक्षायुर्वेद जैसी प्राकृतिक खेती तकनीकों का उपयोग शुरू किया। इन तकनीकों की मदद से उन्होंने मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई और फसलों की गुणवत्ता में सुधार किया।

उनका मानना है कि खेती में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। प्राकृतिक खेती अपनाने से उनकी खेती की लागत कम हुई और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हुई। यही कारण है कि उनके उत्पाद बाजार में सामान्य फसलों की तुलना में अधिक कीमत पर बिकते हैं। Success story of organic farmer lekhram yadav

120 साहीवाल गायों से शुरू की A2 डेयरी

कोविड काल के दौरान लेखराम यादव को जैविक खेती के लिए पर्याप्त मात्रा में गोबर और गौमूत्र उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इसके बाद उन्होंने खुद की A2 डेयरी शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने करीब 120 देसी साहीवाल गायों के साथ डेयरी की शुरुआत की।

साहीवाल नस्ल की गायें भारतीय जलवायु के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं और उच्च गुणवत्ता वाला A2 दूध देती हैं। आज उनकी डेयरी से A2 दूध, जैविक घी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की बाजार में काफी मांग है और लोग इन्हें प्रीमियम कीमत पर खरीदते हैं। डेयरी से होने वाली आय ने उनके बिजनेस मॉडल को और मजबूत बनाया। Success story of organic farmer lekhram yadav

खेती और डेयरी को बनाया सस्टेनेबल मॉडल

लेखराम यादव ने खेती और पशुपालन को एक-दूसरे से जोड़कर एक सस्टेनेबल मॉडल तैयार किया है। गायों से मिलने वाला गोबर और गौमूत्र उनकी जैविक खेती में उपयोग होता है, जिससे खेती की लागत काफी कम हो जाती है। वहीं खेतों में उगाया गया हरा चारा पशुओं के भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस मॉडल से न केवल खर्च कम हुआ बल्कि उत्पादन क्षमता भी बढ़ी। उनका मानना है कि अगर किसान खेती और पशुपालन को साथ जोड़कर काम करें तो कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। Success story of organic farmer lekhram yadav

“56 भोग वाटिका” से शुरू किया एग्रो-टूरिज्म

खेती और डेयरी के अलावा लेखराम यादव ने एग्रो-टूरिज्म सेक्टर में भी कदम रखा। उन्होंने 22 एकड़ भूमि पर “56 भोग वाटिका” नाम से एग्रो-टूरिज्म प्रोजेक्ट विकसित किया। यह प्रोजेक्ट राजस्थान के Agriculture Tourism Department में रजिस्टर्ड है। यहां लोग गांव की जीवनशैली, जैविक खेती और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव लेने आते हैं। स्कूल, कॉलेज और कृषि संस्थानों के छात्र भी उनके फार्म का दौरा करते हैं और आधुनिक जैविक खेती की जानकारी प्राप्त करते हैं। यह प्रोजेक्ट उनकी आय का एक नया स्रोत बन चुका है और लोगों को खेती के प्रति जागरूक भी कर रहा है। Success story of organic farmer lekhram yadav

“UB Organic India” ब्रांड से बेचते हैं उत्पाद

लेखराम यादव ने केवल खेती करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी विशेष ध्यान दिया। “UB Organic India” नाम से वे अपने ऑर्गेनिक उत्पाद बाजार में बेचते हैं। उनकी कंपनी अनाज, मसाले, फल, सब्जियां और डेयरी उत्पाद ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंचाती है। सीधे ग्राहकों तक पहुंचने से उन्हें बेहतर कीमत मिलती है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है। यही वजह है कि उनका बिजनेस तेजी से बढ़ता गया। Success story of organic farmer lekhram yadav

17 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार

ऑर्गेनिक फार्मिंग, A2 डेयरी और एग्रो-टूरिज्म को मिलाकर लेखराम यादव का वार्षिक कारोबार 17 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। उनकी सफलता को देखते हुए उन्हें “Millionaire Organic Farmer of India” जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर किसान आधुनिक सोच, नई तकनीक और सही मार्केटिंग रणनीति के साथ काम करें तो खेती में भी करोड़ों का कारोबार खड़ा किया जा सकता है। Success story of organic farmer lekhram yadav

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किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा

लेखराम यादव आज लाखों किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उन्होंने यह दिखाया है कि खेती को केवल पारंपरिक पेशा नहीं, बल्कि एक सफल स्टार्टअप और बिजनेस मॉडल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए बड़ा संदेश है जो खेती को कम मुनाफे वाला क्षेत्र मानते हैं। मेहनत, सही योजना, नई तकनीक और लगातार सीखने की इच्छा हो तो खेती में भी असीम संभावनाएं हैं। Success story of organic farmer lekhram yadav

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