कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली ज्वार की खेती की पूरी जानकारी

कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली ज्वार की खेती की पूरी जानकारी

Jwar Ki Kheti Kaise Kre : ज्वार भारत की प्रमुख अनाज एवं चारा फसलों में से एक है। यह कम पानी और सूखे की परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार देने वाली फसल मानी जाती है। खरीफ सीजन में ज्वार की खेती किसानों के लिए कम लागत में अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा देने का एक बेहतरीन विकल्प है। ज्वार का उपयोग भोजन, पशु चारा, पोल्ट्री फीड, जैव ईंधन और औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

खरीफ में ज्वार की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

ज्वार गर्म जलवायु की फसल है और यह अधिक तापमान को सहन करने की क्षमता रखती है। इसकी अच्छी वृद्धि के लिए 26°C से 30°C तापमान उपयुक्त माना जाता है। ज्वार की खेती समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय दोनों क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छा उत्पादन देती है।

ज्वार की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

ज्वार की खेती कई प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली गहरी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह फसल सूखा सहन करने वाली है, इसलिए हल्की और कम उपजाऊ मिट्टी में भी उगाई जा सकती है। खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों का विकास प्रभावित होता है।

खरीफ ज्वार की उन्नत किस्में

अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उन्नत और प्रमाणित किस्मों का चयन करना आवश्यक है।

प्रमुख संकर किस्में

  • CSH 41
  • CSH 35
  • CSH 30
  • CSH 25
  • CSH 18

प्रमुख उन्नत किस्में

  • CSV 39
  • CSV 36
  • CSV 34
  • CSV 31 (Palamuru Jonna)
  • CSV 27
  • RVJ 1862

ये किस्में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अच्छी पैदावार देती हैं।

खेत की तैयारी कैसे करें(Jwar Ki Kheti Kaise Kre)

ज्वार की खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी आवश्यक होती है। गर्मियों में एक गहरी जुताई करने के बाद 2–3 बार हैरो या कल्टीवेटर से जुताई करें। इसके बाद खेत को समतल बनाएं। अच्छी उपज के लिए प्रति हेक्टेयर 8–10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में मिलानी चाहिए।

खरीफ में ज्वार की बुवाई का सही समय

खरीफ ज्वार की बुवाई मानसून शुरू होने के साथ जून के तीसरे सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। समय पर बुवाई करने से फसल में कीट और रोग का प्रकोप कम होता है।

बीज दर और बुवाई की विधि

  • बीज दर: 7–8 किलो प्रति हेक्टेयर
  • पंक्ति से पंक्ति दूरी: 45 सेंटीमीटर
  • पौधे से पौधे दूरी: 12–15 सेंटीमीटर

अच्छी पौध संख्या बनाए रखने के लिए उचित दूरी पर बुवाई करें।

बीज उपचार का महत्व

बीज उपचार करने से फसल को शुरुआती कीट और रोगों से बचाया जा सकता है।

बीज उपचार के लिए उपयोगी दवाएं

  • इमिडाक्लोप्रिड 70 WS – 5 ग्राम प्रति किलो बीज
  • थायोमेथोक्साम – 3 ग्राम प्रति किलो बीज
  • कार्बेन्डाजिम (बाविस्टिन) – 2 ग्राम प्रति किलो बीज

बीज उपचार करने से अंकुरण अच्छा होता है और पौधे स्वस्थ रहते हैं।Jwar Ki Kheti Kaise Kre

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

हल्की मिट्टी और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए

  • नाइट्रोजन – 30 किलो
  • फॉस्फोरस – 30 किलो
  • पोटाश – 20 किलो प्रति हेक्टेयर

मध्यम एवं गहरी मिट्टी के लिए

  • नाइट्रोजन – 40 किलो
  • फॉस्फोरस – 40 किलो
  • पोटाश – 40 किलो प्रति हेक्टेयर

नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा बुवाई के 30–35 दिन बाद दें। Jwar Ki Kheti Kaise Kre

खरपतवार नियंत्रण

फसल की शुरुआती 35 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण बहुत आवश्यक होता है।

नियंत्रण के उपाय

  • बुवाई के बाद 48 घंटे के भीतर एट्राज़ीन 0.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें।
  • 20 दिन बाद एक निराई-गुड़ाई करें।
  • 21 और 40 दिन बाद अंतर-खेती करें। Jwar Ki Kheti Kaise Kre

ज्वार की अंतरवर्तीय खेती

ज्वार के साथ अरहर, मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी की अंतरफसल लाभदायक मानी जाती है। ज्वार और अरहर की बुवाई 2:1 अनुपात में की जा सकती है। इससे खेत की उर्वरता बढ़ती है और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। Jwar Ki Kheti Kaise Kre

ज्वार के प्रमुख कीट और नियंत्रण

1. शूट फ्लाई (ताना मक्खी)

इस कीट के कारण पौधों में “डेड हार्ट” लक्षण दिखाई देते हैं।

नियंत्रण

  • समय पर बुवाई करें
  • बीज उपचार करें
  • कार्बोफ्यूरान 3G का प्रयोग करें

2. तना छेदक कीट

यह कीट तनों को नुकसान पहुंचाकर पौधों को कमजोर कर देता है।

नियंत्रण

  • संक्रमित पौधों को नष्ट करें
  • कार्बोफ्यूरान 3G का उपयोग करें

3. फॉल आर्मीवर्म

यह ज्वार की फसल को तेजी से नुकसान पहुंचाने वाला खतरनाक कीट है।

नियंत्रण

  • फेरोमोन ट्रैप लगाएं
  • नीम आधारित दवाओं का छिड़काव करें
  • गंभीर प्रकोप पर स्पिनेटोरम या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल का प्रयोग करें. Jwar Ki Kheti Kaise Kre

ज्वार के प्रमुख रोग और नियंत्रण

अनाज की फफूंदी

इस रोग में दानों पर सफेद, गुलाबी या काले रंग की फफूंदी दिखाई देती है।

नियंत्रण

  • रोग सहनशील किस्मों का चयन करें
  • प्रोपीकोनाजोल 0.2% का छिड़काव करें

डाउनी मिल्ड्यू

इस रोग में पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं।

नियंत्रण

  • गहरी जुताई करें
  • मेटालेक्सिल या रिडोमिल से बीज उपचार करें. Jwar Ki Kheti Kaise Kre

ज्वार की कटाई और भंडारण

फसल पकने में 100-120 दिन का समय लेती है। ज्वार की बालियां हल्के पीले रंग की होने पर फसल तैयार मानी जाती है। खरीफ ज्वार की कटाई फसल पूरी तरह पकने के तुरंत बाद करनी चाहिए ताकि फफूंदी लगने की संभावना कम हो। कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाकर 10–12% नमी तक लाएं और फिर जूट या प्लास्टिक बैग में भंडारित करें। Jwar Ki Kheti Kaise Kre

ज्वार की खेती में सफलता के मुख्य बिंदु

  • समय से बुवाई करें
  • शुद्ध बीज का उपयोग
  • बीजोपचार अवश्य करें
  • उर्वरक मृदा परीक्षण के अनुसार
  • बाली और दाना भरने पर सिंचाई
  • कीट/रोगों का समय से नियंत्रण
  • निराई–गुड़ाई अवश्य करें
  • खेत में जलभराव न होने दें
  • फसल चक्र अपनाएँ
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए उचित रसायन Jwar Ki Kheti Kaise Kre

निष्कर्ष

खरीफ में ज्वार की खेती कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली लाभदायक फसल है। यदि किसान सही समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, उचित सिंचाई और कीट-रोग नियंत्रण अपनाएं तो ज्वार की खेती से अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। यह फसल खाद्यान्न के साथ-साथ पशु चारा और औद्योगिक उपयोग के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। Jwar Ki Kheti Kaise Kre

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *