Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar पूर्वी चम्पारण के पड़ौलिया गांव के रिटायर्ड सैनिक राजेश कुमार यादव प्राकृतिक खेती अपनाकर कम खर्च में शानदार उत्पादन हासिल कर रहे हैं। उनकी खेती की नई सोच और सफल मॉडल अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद अब एक पूर्व सैनिक खेती के जरिए किसानों के लिए नई मिसाल पेश कर रहा है। पूर्वी चम्पारण जिले के पिपराकोठी प्रखंड के पड़ौलिया गांव निवासी सेवानिवृत्त सैनिक राजेश कुमार यादव प्राकृतिक खेती अपनाकर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बने हुए हैं। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar

Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने नौकरी या कारोबार की जगह खेती को ही अपना लक्ष्य बनाया और रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती का रास्ता चुना। आज उनकी मेहनत और आधुनिक सोच का नतीजा यह है कि उनका खेत प्राकृतिक खेती का जीवंत मॉडल बन चुका है, जहां आसपास के गांवों के किसान और युवा नई खेती तकनीक सीखने पहुंच रहे हैं।
राजेश कुमार यादव ने प्राकृतिक खेती की शुरुआत बिहार सरकार की जैविक खेती प्रोत्साहन योजना के तहत वर्मी कम्पोस्ट यूनिट लगाकर की। इसके बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, पिपराकोठी से प्रशिक्षण प्राप्त किया और केंचुआ खाद का उत्पादन शुरू किया। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
ट्रेनिंग लेकर शुरू की खेती और वर्मी कम्पोस्ट खाद बना रहे
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से उन्हें प्राकृतिक खेती से जुड़ी विशेष किट भी दी गई, जिसकी मदद से बीजामृत, जीवामृत और घन जीवामृत जैसे जैविक पोषक तत्व तैयार किए जाते हैं। साथ ही नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्निअस्त्र जैसे प्राकृतिक कीट एवं रोग नियंत्रण उत्पाद बनाने की तकनीक भी सिखाई गई। इन आधुनिक प्राकृतिक तरीकों को अपनाने के बाद उनकी खेती पूरी तरह बदल गई और उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
व्यापारी खेत पहुंचकर खरीद रहे सब्जियां
आज राजेश कुमार यादव पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से मिश्रित खेती कर रहे हैं और बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं। उनके खेत में लौकी, नेनुआ, करेला, ओल समेत कई तरह की सब्जियों की खेती एक साथ की जा रही है। प्राकृतिक खेती अपनाने से न सिर्फ मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता सुरक्षित बनी हुई है, बल्कि खेती की लागत में भी काफी कमी आई है। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
राजेश यादव का मानना है कि प्राकृतिक खेती से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और जमीन की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है। यही वजह है कि उनकी खेती आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बनती जा रही है। कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलने से उनकी आमदनी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और खेती अब उनके लिए एक सफल एवं लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
उनके खेतों में तैयार होने वाली ताजा और गुणवत्तापूर्ण सब्जियों की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है। हालात यह हैं कि मोतिहारी के व्यापारी खुद गांव पहुंचकर उनकी फसल उचित दाम पर खरीद रहे हैं। इससे न केवल उन्हें बेहतर मुनाफा मिल रहा है, बल्कि गांव के अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

मिश्रित खेती मॉडल को कृषि अधिकारियों ने सराहा
जिला कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह ने राजेश यादव की पहल की सराहना करते हुए कहा कि सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने खेती के क्षेत्र में एक नई और सकारात्मक सोच पेश की है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग लगातार ऐसे प्रगतिशील किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है, जो प्राकृतिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।
मनीष कुमार सिंह के अनुसार राजेश यादव का खेत अब प्राकृतिक खेती का एक सफल मॉडल बन चुका है, जहां नेनुआ, लौकी, करेला और ओल जैसी फसलों की मिश्रित खेती का बेहतरीन प्रदर्शन किया जा रहा है। इस मॉडल को देखने और सीखने के लिए आसपास के किसान और युवा लगातार उनके खेत पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का यह तरीका न केवल लागत कम करता है, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी बेहतर बनाए रखता है। यही कारण है कि राजेश यादव की पहल अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनती जा रही है और कई युवा भी खेती को रोजगार के बेहतर विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
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गोबर से जीवामृत समेत कई जैविक खाद बना रहे
राजेश कुमार यादव का कहना है कि यदि किसान अपने उपलब्ध संसाधनों और पशुधन का सही तरीके से उपयोग करें, तो बिना महंगे रासायनिक उर्वरकों के भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनके पास गाय है, जिसके गोबर और गोमूत्र से वे जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्निअस्त्र जैसे जैविक उत्पाद तैयार करते हैं।
राजेश यादव के अनुसार प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले ये जैविक घोल फसलों की वृद्धि बढ़ाने के साथ-साथ कीट और रोग नियंत्रण में भी मदद करते हैं। इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का तरीका नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का माध्यम भी है। उनका मानना है कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जबकि प्राकृतिक खेती पर्यावरण के अनुकूल और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar

मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक खेती की मिसाल बने राजेश
राजेश यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग की अपील से प्रेरित होकर उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया। उनका कहना है कि शुरुआत में लोगों को यह तरीका नया लगा, लेकिन आज उनकी सफलता को देखकर कई किसान प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं और बेहतर आय भी अर्जित कर रहे हैं। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
पड़ौलिया गांव के इस पूर्व सैनिक ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत संकल्प, मेहनत और सही सोच के साथ खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती के जरिए न केवल अपनी पहचान बनाई है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और युवाओं को भी नई दिशा देने का काम किया है। Success Story Of Ex army Soldir Rajesh Kumar
राजेश कुमार यादव की सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि खेती केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत माध्यम भी बन सकती है। प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान अपनी लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और बेहतर भविष्य मिल सके।
निष्कर्ष:
पूर्व सैनिक राजेश कुमार यादव की सफलता यह साबित करती है कि प्राकृतिक खेती कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने अपने अनुभव, मेहनत और नवाचार से यह दिखाया है कि खेती को आधुनिक और टिकाऊ तरीके से अपनाकर न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना जा सकता है, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
उनकी यह पहल आसपास के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। प्राकृतिक खेती के जरिए वे यह संदेश दे रहे हैं कि यदि किसान अपने संसाधनों का सही उपयोग करें और नई तकनीकों को अपनाएं, तो खेती को लाभकारी व्यवसाय के साथ सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बनाया जा सकता है।
