Til Ki Top Varieties : भारत में तिल (Sesame) एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल मानी जाती है, जिसकी खेती खरीफ सीजन में बड़े पैमाने पर की जाती है। तिल की खेती कम पानी, कम लागत और कम समय में अच्छी कमाई देने वाली फसल के रूप में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। विशेषतौर पर ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी की कमी होती है, वहां तिल की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार तिल की उन्नत किस्मों की खेती करके किसान कम समय में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान समय में कई ऐसी उन्नत वैरायटीज उपलब्ध हैं, जो केवल 70 से 80 दिनों में तैयार होकर अच्छा उत्पादन देती हैं। आइए जानते हैं तिल की प्रमुख उन्नत किस्मों और उनकी विशेषताओं के बारे में।
आरटी-346 (RT-346) तिल किस्म
RT-346 तिल की उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्म मानी जाती है। यह किस्म लगभग 75 से 80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई वाले होते हैं और इसमें फलियों की संख्या ज्यादा पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार किसान इस किस्म से लगभग 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। यह किस्म सूखा सहन करने की क्षमता भी रखती है, जिससे कम पानी वाले क्षेत्रों में इसकी खेती फायदेमंद मानी जाती है।
टीकेजी-22 (TKG-22) तिल किस्म
TKG-22 तिल की लोकप्रिय किस्मों में शामिल है। यह किस्म कम समय में तैयार होने और बेहतर उत्पादन के लिए जानी जाती है। इसकी फसल लगभग 70 से 75 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म की विशेषता यह है कि इसमें तेल की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। किसान इससे लगभग 7 से 9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। यह किस्म कई रोगों के प्रति भी सहनशील मानी जाती है।
गुजरात तिल-2 (Gujarat Til-2)
गुजरात तिल-2 किस्म गर्म और शुष्क जलवायु के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है। यह किस्म लगभग 75 दिनों में तैयार हो जाती है और कम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाला तिल उत्पादन देने में मदद करती है। इसके दानों में तेल की मात्रा अधिक होने के कारण बाजार में इसकी मांग अच्छी रहती है। Til Ki Top Varieties
आरटी-351 (RT-351) तिल किस्म
RT-351 तिल की उन्नत किस्मों में शामिल है, जिसे अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। यह किस्म लगभग 70 से 80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता है। किसान इससे लगभग 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। Til Ki Top Varieties
स्वेता तिल किस्म
स्वेता तिल किस्म सफेद दानों वाली उन्नत किस्म मानी जाती है। इसके दानों की गुणवत्ता अच्छी होती है और बाजार में इसका अच्छा भाव मिलता है। यह किस्म लगभग 70 दिनों में तैयार हो जाती है और कम लागत में अच्छा मुनाफा देने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस किस्म की खेती करके किसान कम समय में बेहतर कमाई कर सकते हैं। Til Ki Top Varieties
टीकेजी-306 (TKG-306) तिल किस्म
TKG-306 तिल की उन्नत और जल्दी पकने वाली किस्मों में शामिल है। यह किस्म लगभग 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई वाले होते हैं और इसमें दानों की गुणवत्ता काफी अच्छी मानी जाती है। किसान इससे लगभग 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। Til Ki Top Varieties
प्रगति तिल किस्म
प्रगति तिल किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह किस्म सूखा सहनशील मानी जाती है और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी बेहतर उत्पादन देती है। इसके दानों में तेल की मात्रा अधिक होती है, जिससे बाजार में इसका अच्छा भाव मिलता है। यह किस्म लगभग 75 दिनों में तैयार हो जाती है। Til Ki Top Varieties
वीआरआई-1 (VRI-1) तिल किस्म
VRI-1 तिल की उन्नत किस्मों में शामिल है, जिसे दक्षिण भारत और गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह किस्म जल्दी पकने के साथ-साथ रोगों के प्रति भी काफी सहनशील होती है। किसान इससे बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। Til Ki Top Varieties
गुजरात तिल-10 (Gujarat Til-10)
गुजरात तिल-10 उन्नत उत्पादन क्षमता वाली किस्म मानी जाती है। यह किस्म कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार देती है और इसके पौधों में फलियों की संख्या अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म लगभग 75 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है और किसानों को अच्छा मुनाफा देने की क्षमता रखती है। Til Ki Top Varieties
कृष्णा तिल किस्म
कृष्णा तिल किस्म को उच्च तेल उत्पादन वाली किस्म माना जाता है। इसके दाने काले रंग के होते हैं और बाजार में इसकी मांग काफी अधिक रहती है। यह किस्म कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है और लगभग 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है। Til Ki Top Varieties
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तिल की खेती किसानों के लिए क्यों है लाभदायक?
तिल की खेती कम लागत और कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। इसमें सिंचाई और उर्वरक की आवश्यकता अन्य फसलों की तुलना में कम होती है। यही कारण है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसान तेजी से तिल की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। तिल की बाजार में मांग लगातार बनी रहती है, क्योंकि इसका उपयोग तेल, मिठाई और कई खाद्य उत्पादों में किया जाता है। ऐसे में किसान उन्नत तिल किस्मों की खेती करके कम समय में बेहतर उत्पादन और अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। Til Ki Top Varieties
निष्कर्ष
आज के समय में तिल की उन्नत वैरायटीज किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला बेहतरीन विकल्प बन चुकी हैं। RT-346, TKG-22, Gujarat Til-2, RT-351 और स्वेता जैसी किस्में कम समय में तैयार होकर अच्छा उत्पादन देती हैं। यदि किसान सही किस्म का चयन करके वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो केवल 70 से 80 दिनों में शानदार उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। Til Ki Top Varieties
