किसानों के लिए फायदेमंद सलाह: खरीफ से पहले इस फसल की खेती, 3 बोरी तक यूरिया की बचत, कृषि विभाग दे रहा 50% सब्सिडी

किसानों के लिए फायदेमंद सलाह: खरीफ से पहले इस फसल की खेती, 3 बोरी तक यूरिया की बचत, कृषि विभाग दे रहा 50% सब्सिडी

Dhaincha Farming Subsidy : खेती में बढ़ती लागत और रासायनिक उर्वरकों के लगातार बढ़ते उपयोग के कारण किसानों की उत्पादन लागत में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे में कृषि विभाग किसानों को हरी खाद तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। हरी खाद के रूप में ढैंचा (सेसबेनिया) की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बनकर उभर रही है। यह फसल न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले खर्च को भी कम करती है। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग ढैंचा बीज की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी प्रदान कर रहा है।

ढैंचा की खेती क्यों है किसानों के लिए लाभदायक?

ढैंचा एक दलहनी हरी खाद फसल है, जो मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने का काम करती है। इसकी जड़ों में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु वातावरण से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में स्थिर करते हैं। यही कारण है कि धान-गेहूं, धान-चना, धान-सब्जी और सोयाबीन आधारित फसल चक्र अपनाने वाले किसानों के लिए ढैंचा की खेती बेहद लाभदायक मानी जाती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसल को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। Dhaincha Farming Subsidy

प्रति हेक्टेयर 2 से 3 बोरी यूरिया की हो सकती है बचत

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, जब ढैंचा की फसल को खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, तब यह सड़कर जैविक खाद का रूप ले लेती है। इससे प्रति हेक्टेयर लगभग 40 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन मिट्टी को प्राकृतिक रूप से प्राप्त होती है। इतनी मात्रा में नाइट्रोजन प्राप्त करने के लिए सामान्यतः किसानों को 90 से 130 किलोग्राम यूरिया का उपयोग करना पड़ता है। इस प्रकार ढैंचा की हरी खाद अपनाने से अगली फसल में प्रति हेक्टेयर लगभग 2 से 3 बोरी यूरिया की बचत संभव है। इससे खेती की लागत कम होती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।

मानसून के साथ करें ढैंचा की बुवाई

कृषि विभाग के अनुसार ढैंचा की बुवाई मानसून की शुरुआत के साथ करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में ढैंचा की खेती के लिए लगभग 25 से 30 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। किसान इसे सामान्य बुवाई विधि से आसानी से बो सकते हैं। समय पर बुवाई करने से फसल का विकास बेहतर होता है और हरी खाद के रूप में इसका अधिकतम लाभ मिलता है। Dhaincha Farming Subsidy

ढैंचा को खेत में कब और कैसे पलटें?

बुवाई के लगभग 35 से 40 दिन बाद, जब पौधे 1 से 1.5 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाएं और उनमें फूल आने की शुरुआत न हुई हो, तब इन्हें खेत में पलट देना चाहिए। इसके लिए किसान डिस्क हैरो, रोटावेटर या मिट्टी पलटने वाले हल का उपयोग कर सकते हैं। फसल को मिट्टी में दबाने के बाद खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी होता है ताकि पौधे अच्छी तरह गल सकें। सामान्यतः 15 से 20 दिनों के भीतर ढैंचा पूरी तरह सड़कर जैविक खाद में बदल जाता है। इसके बाद किसान धान या अन्य मुख्य फसलों की बुवाई अथवा रोपाई कर सकते हैं। Dhaincha Farming Subsidy

मिट्टी की उर्वरता और जलधारण क्षमता बढ़ाने में सहायक

लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और उसकी उत्पादक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। ढैंचा जैसी हरी खाद फसलें मिट्टी की सेहत सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके विघटन से मिट्टी में जैविक कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। साथ ही मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, जलधारण क्षमता बढ़ती है और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि होती है। इससे पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है और फसल का विकास अधिक संतुलित तरीके से होता है। Dhaincha Farming Subsidy

टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती का बेहतर विकल्प

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक यूरिया का असंतुलित उपयोग लंबे समय में मिट्टी को कमजोर बना सकता है। वहीं ढैंचा जैसी हरी खाद फसलों का नियमित उपयोग टिकाऊ खेती को बढ़ावा देता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। यही वजह है कि वर्तमान समय में हरी खाद तकनीक को आधुनिक और लाभकारी खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। Dhaincha Farming Subsidy

ढैंचा बीज पर मिलेगा 50 प्रतिशत तक अनुदान Dhaincha Farming Subsidy

ढैंचा की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग किसानों को बीज की लागत पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रहा है। किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय, बीज प्रक्रिया केंद्र या बीज निगम कार्यालय से संपर्क कर रियायती दरों पर उन्नत गुणवत्ता वाले ढैंचा बीज प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों को कम लागत में हरी खाद तकनीक अपनाने का अवसर मिलेगा। Dhaincha Farming Subsidy

किसानों से कृषि विभाग की अपील

कृषि विभाग छत्तीसगढ़ ने किसानों से अपील की है कि वे मानसून शुरू होते ही ढैंचा की बुवाई करें और हरी खाद तकनीक को अपनी खेती का हिस्सा बनाएं। इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा और भविष्य की फसलों का उत्पादन व गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगे। विभाग का मानना है कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, उर्वरकों पर खर्च घटाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। Dhaincha Farming Subsidy

निष्कर्ष

ढैंचा की खेती किसानों के लिए कम लागत में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने का प्रभावी उपाय है। कृषि विभाग द्वारा बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलने से किसान आसानी से इस हरी खाद तकनीक को अपना सकते हैं। यदि किसान मानसून से पहले ढैंचा की बुवाई करते हैं, तो वे न केवल 2 से 3 बोरी यूरिया की बचत कर सकते हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन और स्वस्थ मिट्टी का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। Dhaincha Farming Subsidy

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