El Nino Effect on India Monsoon 2026 : भारत में Monsoon 2026 को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार चिंताएं बढ़ रही हैं। मौसम विशेषज्ञों ने प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे El Nino के कारण मानसून कमजोर पड़ने की आशंका जताई है। हालांकि अब किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया के मौसम ब्यूरो (BoM) की नई रिपोर्ट के अनुसार अगस्त और सितंबर के दौरान Positive Indian Ocean Dipole (IOD) विकसित होने की संभावना है, जो भारत के मानसून को अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।
अल नीनो का बढ़ता प्रभाव बढ़ा रहा है चिंता El Nino Effect on India Monsoon 2026
ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 7 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में Nino 3.4 Index +0.81 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह स्तर अल नीनो की आधिकारिक सीमा +0.80 डिग्री सेल्सियस से थोड़ा ऊपर है। यह संकेत देता है कि प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है और आने वाले महीनों में अल नीनो और मजबूत हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अल नीनो की स्थिति मजबूत होती है, तो इसका असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ सकता है। आमतौर पर अल नीनो के दौरान भारत में वर्षा सामान्य से कम दर्ज की जाती है, जिससे कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ जाता है। El Nino Effect on India Monsoon 2026
सकारात्मक IOD भारत के लिए क्यों है अच्छी खबर?
हालांकि अल नीनो को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन हिंद महासागर से मिल रहे संकेत उम्मीद जगा रहे हैं। वर्तमान में Indian Ocean Dipole (IOD) तटस्थ स्थिति में है और इसका सूचकांक -0.34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। लेकिन अधिकांश वैश्विक जलवायु मॉडल अगस्त और सितंबर के दौरान इसके सकारात्मक चरण में पहुंचने की संभावना जता रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार Positive IOD भारत के लिए अनुकूल माना जाता है क्योंकि यह हिंद महासागर से भारतीय उपमहाद्वीप की ओर अधिक नमी पहुंचाने में मदद करता है। इससे मानसून को अतिरिक्त समर्थन मिलता है और वर्षा में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। El Nino Effect on India Monsoon 2026
क्या है इंडियन ओशन डायपोल (IOD)?
Indian Ocean Dipole (IOD) हिंद महासागर में समुद्री सतह के तापमान में होने वाले अंतर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जलवायु प्रणाली है। यह पश्चिमी हिंद महासागर (अफ्रीका के निकट) और पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के पास) के बीच तापमान के अंतर को दर्शाती है। जब पश्चिमी हिंद महासागर का पानी अपेक्षाकृत अधिक गर्म और पूर्वी हिंद महासागर का पानी अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है, तो इसे सकारात्मक IOD कहा जाता है। इस स्थिति में भारत की ओर अधिक नमी पहुंचती है, जिससे मानसूनी वर्षा को मजबूती मिल सकती है। El Nino Effect on India Monsoon 2026
IOD की तीन अवस्थाएं होती हैं:
- सकारात्मक (Positive IOD)
- नकारात्मक (Negative IOD)
- तटस्थ (Neutral IOD)
इनमें से सकारात्मक IOD को भारत के मानसून के लिए सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है। El Nino Effect on India Monsoon 2026
अल नीनो और सकारात्मक IOD का संयुक्त प्रभाव
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक तरफ अल नीनो सक्रिय हो और दूसरी तरफ सकारात्मक IOD विकसित हो जाए, तो दोनों का प्रभाव एक-दूसरे को काफी हद तक संतुलित कर सकता है। सरल शब्दों में कहें तो यदि अल नीनो की वजह से मानसून कमजोर पड़ने का खतरा बनता है, तो सकारात्मक IOD हिंद महासागर से भारत की ओर अतिरिक्त नमी पहुंचाकर वर्षा की कमी की आंशिक भरपाई कर सकता है। यही कारण है कि मौसम वैज्ञानिक केवल अल नीनो पर ही नहीं बल्कि IOD की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखते हैं। El Nino Effect on India Monsoon 2026
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संकेत?
भारत की कृषि व्यवस्था आज भी काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। खरीफ फसलों जैसे धान, सोयाबीन, कपास, मक्का और दालों की बुवाई और उत्पादन सीधे तौर पर वर्षा की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि अगस्त और सितंबर के दौरान सकारात्मक IOD विकसित होता है, तो:
- मानसून को अतिरिक्त नमी मिल सकती है।
- वर्षा में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।
- खरीफ फसलों को बेहतर नमी उपलब्ध हो सकती है।
- सिंचाई पर दबाव कम हो सकता है।
- जलाशयों और भूजल स्तर में सुधार हो सकता है।
इसी वजह से कृषि क्षेत्र के लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। El Nino Effect on India Monsoon 2026
IMD के संशोधित पूर्वानुमान ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के अपने पूर्वानुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत (LPA) के 90 प्रतिशत तक कर दिया है। इसके अलावा मानसून का आगमन भी सामान्य से कुछ दिन देरी से हुआ और अब तक देश में सामान्य से लगभग 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण किसानों, जल संसाधन विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। ऐसे समय में सकारात्मक IOD की संभावना राहत की खबर बनकर सामने आई है। El Nino Effect on India Monsoon 2026
ये भी देखें : एल नीनो क्या है और इसके क्या प्रभाव हैं?
अगले दो से तीन महीने होंगे बेहद अहम
मौसम एजेंसियों के अनुसार अभी अल नीनो की अंतिम तीव्रता को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। कई वैश्विक मॉडल मध्यम से मजबूत अल नीनो की संभावना जता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सकारात्मक IOD के विकसित होने की उम्मीद भी बनी हुई है। ऐसे में जुलाई से सितंबर के बीच की अवधि यह तय करेगी कि Monsoon Forecast 2026 कितना सफल साबित होता है और भारतीय कृषि क्षेत्र को इससे कितना लाभ मिलता है। यदि सकारात्मक IOD मजबूत रूप से विकसित होता है, तो यह भारत के मानसून को महत्वपूर्ण समर्थन देकर अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है। El Nino Effect on India Monsoon 2026
निष्कर्ष
Monsoon 2026 को लेकर जहां एक ओर अल नीनो की आशंका चिंता बढ़ा रही है, वहीं Positive IOD की संभावना भारत के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। यदि अगस्त-सितंबर में सकारात्मक IOD विकसित होता है, तो यह मानसून को अतिरिक्त नमी देकर वर्षा में सुधार ला सकता है। इसका सीधा फायदा किसानों, कृषि उत्पादन और जल संसाधनों को मिल सकता है। आने वाले कुछ महीने भारतीय मानसून और कृषि क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। El Nino Effect on India Monsoon 2026
