Climate Smart Farming: धान की डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक और गेहूं की जीरो टिलेज (Zero Tillage) पद्धति अपनाने वाले किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक और कृषि परिणाम मिल रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन आधुनिक खेती तकनीकों से उत्पादन लागत में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। Climate Smart Farming
वहीं, फसल की उत्पादकता में करीब 10 प्रतिशत तक वृद्धि देखने को मिली है। सबसे बड़ा फायदा किसानों की आमदनी पर पड़ा है, जहां शुद्ध आय में 23 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। कम लागत, बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफे के कारण DSR और जीरो टिलेज जैसी क्लाइमेट स्मार्ट तकनीकें किसानों के लिए लाभदायक और टिकाऊ खेती का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही हैं। Climate Smart Farming
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बदलते मौसम का असर अब खेती-किसानी पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी लंबे समय तक सूखा, तो कभी बेमौसम और अत्यधिक बारिश जैसी परिस्थितियां किसानों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। इन बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच खेती को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और लाभदायक बनाने के लिए क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर (Climate Smart Agriculture – CSA) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसी क्रम में आईटीसी ने अपनी सालाना रिपोर्ट 2025-26 में दावा किया है कि क्लाइमेट स्मार्ट खेती अपनाने वाले किसानों को उल्लेखनीय लाभ मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल से खेती की उत्पादन लागत में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जबकि शुद्ध आय में 23 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, आधुनिक तकनीकों और संसाधनों के बेहतर उपयोग से फसल उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत मिले हैं। Climate Smart Farming
17 राज्यों के 12 लाख से ज्यादा किसान क्लाइमेट स्मार्ट खेती से जुड़े
आईटीसी की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, कंपनी का क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर (CSA) कार्यक्रम देश के 17 राज्यों के 113 जिलों तक पहुंच चुका है। इस पहल के तहत अब तक 31.93 लाख एकड़ कृषि भूमि को शामिल किया गया है और 12.09 लाख से अधिक किसान इससे जुड़ चुके हैं। इनमें 2.27 लाख महिला किसान भी शामिल हैं, जो आधुनिक और जलवायु-अनुकूल खेती तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। Climate Smart Farming

कंपनी का दावा है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को बदलते मौसम, सूखा, अनियमित बारिश और अन्य जलवायु संबंधी जोखिमों से होने वाले नुकसान को कम करना है। साथ ही, खेती को अधिक टिकाऊ, लाभदायक और संसाधन-कुशल बनाना भी इस कार्यक्रम की प्राथमिकता है।रिपोर्ट में बताया गया है कि धान की डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक और गेहूं की जीरो टिलेज (Zero Tillage) पद्धति अपनाने वाले किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर परिणाम मिले हैं। Climate Smart Farming
इन आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई, जबकि फसल उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके साथ ही किसानों की शुद्ध आय में 23 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कम लागत, बेहतर उत्पादकता और अधिक मुनाफे के कारण क्लाइमेट स्मार्ट खेती भविष्य की टिकाऊ कृषि प्रणाली के रूप में तेजी से उभर रही है। Climate Smart Farming
मिट्टी की सेहत सुधारने और आधुनिक तकनीकों पर खास फोकस
आईटीसी की रिपोर्ट के अनुसार, क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर (CSA) के तहत केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में पिछले वर्ष 5,210 नए कंपोस्ट यूनिट स्थापित किए गए, जिसके बाद देशभर में इनकी कुल संख्या बढ़कर 72,510 हो गई है। इन कंपोस्ट यूनिट्स का उद्देश्य जैविक पोषक तत्वों का उपयोग बढ़ाना, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना है। Climate Smart Farming

किसानों तक नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाने के लिए 13,500 किसान फील्ड स्कूल तथा 13,300 से अधिक चौपाल प्रदर्शन खेत (CPK) विकसित किए गए हैं। इन माध्यमों से किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन, जल संरक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक खेती के तरीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। Climate Smart Farming
इसके अलावा, रिपोर्ट में बताया गया है कि 2,150 एग्री बिजनेस सेंटर किसानों को खेती से जुड़ी विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह, कृषि ऋण, सामूहिक रूप से बीज और उर्वरक खरीदने की सुविधा तथा कृषि यंत्र किराये पर लेने जैसी सेवाएं मिल रही हैं। खास बात यह है कि इनमें से 468 एग्री बिजनेस सेंटर पूरी तरह महिला संचालित हैं, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल रहा है। Climate Smart Farming
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7 हजार से ज्यादा गांव बने क्लाइमेट स्मार्ट विलेज कार्यक्रम का हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाइमेट स्मार्ट विलेज (CSV) कार्यक्रम के तहत अब तक 7,055 गांवों को जोड़ा जा चुका है। इन गांवों में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने, किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने और उन्हें संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। Climate Smart Farming
इसके साथ ही किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक लाभ दिलाने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की छह प्रमुख कृषि योजनाओं से जोड़ने के लिए 28.31 लाख नए लिंकेज बनाए गए। इसके बाद विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े कुल लाभार्थी लिंकेज की संख्या 70 लाख से अधिक हो गई है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और कृषि विकास योजनाओं का लाभ मिल रहा है। Climate Smart Farming
बिहार में मखाना और मध्य प्रदेश में क्लाइमेट स्मार्ट गांवों पर विशेष फोकस
आईटीसी की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने विभिन्न राज्यों की स्थानीय कृषि आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कार्यक्रम शुरू किए हैं। बिहार में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मखाना विकास कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह पहल राज्य के 6 जिलों के 214 गांवों में लागू है, जहां 7,100 से अधिक किसान और करीब 23,150 एकड़ क्षेत्र इस कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। Climate Smart Farming
किसानों को सबौर मखाना-1 और स्वर्ण वैदेही जैसी उन्नत किस्मों की खेती के साथ-साथ संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक उत्पादन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा 1,700 किसानों को मखाना विकास योजना, पीएम-किसान सम्मान निधि और अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा गया है, ताकि उन्हें अधिक से अधिक सरकारी लाभ मिल सके।
वहीं मध्य प्रदेश में जल संरक्षण और क्लाइमेट स्मार्ट विलेज (CSV) कार्यक्रम के तहत बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 8,200 गांवों में किसानों को जलवायु-अनुकूल खेती, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया है। Climate Smart Farming
इसके साथ ही 2,184 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ मिलकर किसानों की बाजार तक पहुंच और सामूहिक कृषि गतिविधियों को मजबूत किया जा रहा है। इनमें 31 महिला किसान उत्पादक संगठन भी शामिल हैं, जो ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। Climate Smart Farming
ड्रोन तकनीक और सुरक्षित खेती को मिल रहा बढ़ावा
रिपोर्ट में बताया गया है कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के 513 गांवों में संचालित ‘आदर्श ग्राम कार्यक्रम’ के तहत किसानों को सुरक्षित और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत किसानों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट के उपयोग, सुरक्षित तरीके से कृषि रसायनों के प्रयोग तथा ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों पर दवा और पोषक तत्वों के छिड़काव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे खेती अधिक सुरक्षित, समय की बचत करने वाली और संसाधन-कुशल बन रही है।
मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और किसानों तक तकनीक पहुंचाने की पहल
रिपोर्ट के अनुसार, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष के दौरान 5,210 नए कंपोस्ट यूनिट स्थापित किए गए, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 72,510 हो गई है। वहीं किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ने के लिए 13,500 किसान फील्ड स्कूल और 13,300 से अधिक चौपाल प्रदर्शन खेत (CPK) संचालित किए गए, जहां उन्हें वैज्ञानिक खेती, जल प्रबंधन और फसल संरक्षण से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।
इसके अलावा 2,150 एग्री बिजनेस सेंटर किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह, कृषि ऋण से जोड़ने, सामूहिक रूप से बीज एवं उर्वरक खरीदने तथा कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इनमें 468 एग्री बिजनेस सेंटर पूरी तरह महिला संचालित हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में उनके नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
