Soybean Production: पिछले खरीफ सीजन में मक्का की खेती करने वाले बड़ी संख्या में किसानों ने इस बार फिर से सोयाबीन की खेती का रुख किया है। बेहतर बाजार संभावनाओं, फसल चक्र और मौसम की अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए कई राज्यों में किसानों का झुकाव सोयाबीन की ओर बढ़ा है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सीजन में देशभर में सोयाबीन का रकबा पिछले खरीफ सीजन की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। Soybean Production
हालांकि, केवल रकबा बढ़ने से अच्छी पैदावार की गारंटी नहीं होगी। सोयाबीन की फसल का उत्पादन काफी हद तक अगले तीन महीनों के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश पर निर्भर करेगा। यदि समय पर और पर्याप्त वर्षा होती है तो उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है, जबकि कम या असमान बारिश की स्थिति में पैदावार प्रभावित हो सकती है। Soybean Production
Soybean Production
देश में इस खरीफ सीजन सोयाबीन की खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले साल मक्का की खेती करने वाले कई किसानों ने इस बार बेहतर बाजार भाव और लाभ की संभावना को देखते हुए फिर से सोयाबीन की बुवाई को प्राथमिकता दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य रहा और मौसम अनुकूल बना रहा, तो इस वर्ष सोयाबीन के रकबे में पिछले खरीफ सीजन की तुलना में 7 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। Soybean Production

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक के अनुसार, पिछले सीजन में मक्का की ओर रुख करने वाले कई किसान अब सोयाबीन की बेहतर कीमतों और मजबूत मांग को देखते हुए दोबारा तिलहन फसल की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों का यह रुझान आने वाले समय में सोयाबीन के कुल रकबे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। Soybean Production
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल रकबा बढ़ने से उत्पादन बढ़ना तय नहीं है। सोयाबीन की पैदावार पूरी तरह अगले कुछ महीनों में होने वाली मानसूनी बारिश की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि समय पर पर्याप्त और समान रूप से वर्षा होती है, तो उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जबकि कम या असमान बारिश की स्थिति में उपज प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। Soybean Production
आगामी तीन महीनों की बारिश तय करेगी सोयाबीन का उत्पादन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खरीफ सीजन में मक्का की खेती छोड़कर बड़ी संख्या में किसान सोयाबीन की ओर लौट रहे हैं, जिससे इसके रकबे में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हुई है। हालांकि, केवल बुवाई का रकबा बढ़ने से बेहतर उत्पादन सुनिश्चित नहीं होगा। सोयाबीन की पैदावार काफी हद तक अगले तीन महीनों में होने वाली मानसूनी बारिश और उसके समान वितरण पर निर्भर करेगी। Soybean Production

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जुलाई से सितंबर के बीच समय पर और पर्याप्त वर्षा होती है, तो फसल की बढ़वार अच्छी रहेगी और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। वहीं, बारिश में कमी या असमान वितरण की स्थिति फसल की वृद्धि और अंतिम उपज दोनों को प्रभावित कर सकती है। Soybean Production
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गौरतलब है कि जून महीने में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा, मौसम विभाग ने जुलाई के दौरान भी कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई है। ऐसे में किसानों की नजर अब पूरी तरह मानसून की चाल पर टिकी है, क्योंकि इसी पर इस साल सोयाबीन उत्पादन की तस्वीर काफी हद तक निर्भर करेगी। Soybean Production
मध्य प्रदेश में 15.56 लाख हेक्टेयर में पूरी हुई बुवाई
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के बुवाई सर्वेक्षण के अनुसार, मानसून में देरी के कारण इस वर्ष सोयाबीन की बुवाई सामान्य से कुछ देर से शुरू हुई। हालांकि, अब प्रमुख उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिश होने के बाद बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। 30 जून तक देशभर में लगभग 29 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई होने का अनुमान है। इसमें सबसे अधिक मध्य प्रदेश में 15.56 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 8.45 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 3.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।
इस साल 116 लाख हेक्टेयर का आंकड़ा पार कर सकता है रकबा
सोपा के अनुसार, वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में देशभर में 114.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हुई थी। औसतन 920 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उत्पादकता के साथ कुल उत्पादन 105.36 लाख टन दर्ज किया गया था। इस बार किसानों के बढ़ते रुझान और मानसून के सक्रिय होने से सोयाबीन का कुल रकबा 116 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। राज्यों में लगातार बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ी है, जिससे बुवाई कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
15 जुलाई तक पूरी हो सकती है बुवाई
सोपा द्वारा किए गए हवाई सर्वेक्षण के मुताबिक, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त बारिश के बाद सोयाबीन की बुवाई तेजी से जारी है और 15 जुलाई तक संभावित पूरे रकबे में बुवाई पूरी होने की उम्मीद है। वहीं, महाराष्ट्र में अभी पर्याप्त मिट्टी नमी नहीं होने के कारण बुवाई की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है, लेकिन अगले दो सप्ताह में इसमें तेजी आने की संभावना है। दूसरी ओर, राजस्थान में सोयाबीन की बुवाई लक्ष्य क्षेत्र के लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और मानसून की प्रगति के साथ इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
इस खरीफ सीजन में किसानों का रुझान एक बार फिर सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। बेहतर बाजार भाव और बढ़ते रकबे से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जरूर है, लेकिन अंतिम पैदावार पूरी तरह मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि जुलाई से सितंबर के बीच समय पर और पर्याप्त बारिश होती है, तो देश में सोयाबीन उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं, कम या असमान वर्षा की स्थिति में किसानों की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में इस सीजन सोयाबीन की फसल के लिए आने वाले तीन महीने बेहद अहम साबित होंगे।
