Pashmina Farmer Scheme: लद्दाख प्रशासन ने पश्मीना बकरी पालकों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब पश्मीना ऊन बेचने वाले पालकों को सरकारी खरीद मूल्य के साथ-साथ 25 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। Pashmina Farmer Scheme
इसके अलावा, भुगतान में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए प्रशासन ने 8 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड भी स्थापित किया है। इस फंड के जरिए किसानों और पश्मीना पालकों को उनकी ऊन का भुगतान समय पर मिल सकेगा, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और पश्मीना उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। Pashmina Farmer Scheme
Pashmina Farmer Scheme
लद्दाख अपनी उच्च गुणवत्ता वाली पश्मीना ऊन के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखता है। इस पारंपरिक उद्योग से जुड़े पशुपालकों की आय बढ़ाने और पश्मीना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लद्दाख प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। लद्दाख पश्मीना विकास बोर्ड की पहली बैठक में पश्मीना पालकों के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को मंजूरी दी गई, जिसके तहत उन्हें सरकारी खरीद मूल्य के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा। Pashmina Farmer Scheme

इसके अलावा, पश्मीना खरीद के भुगतान में देरी की समस्या को दूर करने के लिए 8 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस फंड से पशुपालकों को उनकी उपज का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इन पहलों से विशेष रूप से खानाबदोश (घुमंतू) पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, पश्मीना बकरी पालन को बढ़ावा मिलेगा और लद्दाख के पश्मीना उद्योग को नई मजबूती मिलेगी। Pashmina Farmer Scheme
सरकार देगी 25 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि
नई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत अब पश्मीना पालकों को कच्ची पश्मीना ऊन बेचने पर सरकारी खरीद मूल्य के अलावा 25 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। यह लाभ पशुधन विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम (Livestock Development Incentive Programme) के अंतर्गत दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पश्मीना बकरी पालन को बढ़ावा देना, ऊन उत्पादन में वृद्धि करना और पशुपालकों की आय में स्थायी सुधार लाना है। Pashmina Farmer Scheme
प्रशासन का कहना है कि अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलने से पश्मीना पालकों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे इस पारंपरिक व्यवसाय को अधिक उत्साह के साथ जारी रख सकेंगे। साथ ही, यह योजना युवाओं को भी पश्मीना बकरी पालन की ओर आकर्षित करेगी, जिससे लद्दाख के पश्मीना उद्योग को मजबूती मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

अब पश्मीना पालकों को समय पर मिलेगा भुगतान
पश्मीना ऊन बेचने के बाद भुगतान में होने वाली लंबी देरी से राहत देने के लिए लद्दाख प्रशासन ने नई भुगतान व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। पहले कई पश्मीना पालकों को अपनी ऊन का पैसा मिलने के लिए 8 से 10 महीने तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। Pashmina Farmer Scheme
नई व्यवस्था के तहत ऑल चांगथांग पश्मीना ग्रोवर्स कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी (ACPGCMS) ऊन खरीदते समय ही कुल खरीद राशि का 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत करेगी। शेष 50 प्रतिशत राशि अधिकतम दो महीने के भीतर सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारु और समयबद्ध बनाने के लिए प्रशासन ने 8 करोड़ रुपये का विशेष रिवॉल्विंग फंड भी स्थापित किया है, जिससे भुगतान में देरी की समस्या खत्म होगी और पश्मीना पालकों को समय पर उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा।
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प्रोत्साहन राशि का इस्तेमाल कैसे होगा?
सरकार ने अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के प्रभावी उपयोग के लिए एक स्पष्ट योजना तैयार की है, ताकि इसका लाभ केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहे, बल्कि पश्मीना उत्पादन और पशुपालन के विकास में भी योगदान दे। इस योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग तय मानकों के अनुसार किया जाएगा।
- 60 फीसदी राशि पश्मीना बकरियों की बेहतर नस्ल विकसित करने और वैज्ञानिक प्रजनन (Scientific Breeding) को बढ़ावा देने पर खर्च की जाएगी, जिससे उत्पादन क्षमता और ऊन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- 20 फीसदी राशि आधुनिक कंघी (Combing) उपकरण, ऊन संग्रहण और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च की जाएगी।
- शेष 20 फीसदी राशि पशुपालक अपने परिवार की जरूरतों, दैनिक खर्चों और अन्य घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग कर सकेंगे।
प्रशासन का उद्देश्य इस निवेश के जरिए पश्मीना उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय सुधार लाना है।
तीन साल में दोगुनी होगी पश्मीना बकरियों की संख्या
लद्दाख प्रशासन ने पश्मीना उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए अगले तीन वर्षों में पश्मीना बकरियों की संख्या लगभग 2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही केवल बकरियों की संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि प्रति बकरी मिलने वाली पश्मीना ऊन की उत्पादकता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वर्तमान में एक पश्मीना बकरी से औसतन करीब 200 ग्राम ऊन प्राप्त होती है। प्रशासन वैज्ञानिक प्रजनन, बेहतर नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों की मदद से इसे बढ़ाकर 350 ग्राम प्रति बकरी तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगा। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो पश्मीना उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पशुपालकों की आय में भी बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा। Pashmina Farmer Scheme
घुमंतू पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ
लद्दाख के हजारों घुमंतू (नोमैडिक) परिवारों की आजीविका पश्मीना बकरी पालन पर निर्भर करती है। यह केवल उनकी आय का प्रमुख स्रोत नहीं, बल्कि उनकी पारंपरिक संस्कृति और जीवनशैली का भी अहम हिस्सा है। प्रशासन द्वारा शुरू की गई नई योजनाओं से इन पशुपालकों को समय पर भुगतान, अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि, बेहतर नस्ल की बकरियां, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन का लाभ मिलेगा।
इन पहलों से पश्मीना उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही, उत्पादन लागत कम होगी, आय में वृद्धि होगी और इस पारंपरिक व्यवसाय को लंबे समय तक टिकाऊ एवं लाभदायक बनाने में मदद मिलेगी।
लद्दाख की पश्मीना बनी भारत की वैश्विक पहचान
लद्दाख की उच्च गुणवत्ता वाली पश्मीना ऊन अपनी महीन बनावट और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बेहद लोकप्रिय है। इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की नई योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में लद्दाख का पश्मीना उद्योग और अधिक मजबूत होगा। इससे घुमंतू पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत के पश्मीना निर्यात को भी नई रफ्तार मिलेगी।
