Onion Farmers PM Kisan: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम किसान सम्मान निधि योजना को लेकर एक बार फिर बदलाव की मांग तेज हो गई है. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने योजना के मौजूदा पात्रता नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में वास्तविक किसान इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं. संगठन का कहना है कि वर्ष 2019 के बाद जिन किसानों ने जमीन खरीदी है या वैध रूप से खेत के मालिक बने हैं, उन्हें भी योजना का लाभ मिलना चाहिए. Onion Farmers PM Kisan
संघ का आरोप है कि वर्तमान नियमों के कारण कई पात्र किसान गलत तरीके से योजना से बाहर हैं और उनकी किस्तें भी रुकी हुई हैं. इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि वह उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और केंद्र सरकार के साथ इस विषय पर चर्चा करेगी, ताकि पात्रता नियमों में आवश्यक बदलाव की संभावनाओं पर मंथन हो सके.

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने केवल पीएम किसान सम्मान निधि योजना ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार की अन्य कृषि योजनाओं में भी पात्रता संबंधी नियमों में राहत देने की मांग की है. संगठन का मानना है कि इससे अधिक से अधिक जरूरतमंद किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. Onion Farmers PM Kisan
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पात्र किसानों की रुकी हुई किस्तें जारी नहीं की गईं और नियमों में संशोधन नहीं हुआ, तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. किसानों का कहना है कि सरकार को वास्तविक किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए. Onion Farmers PM Kisan
महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से पीएम किसान सम्मान निधि योजना और नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के पात्रता नियमों में बदलाव करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि वर्ष 2019 के बाद जिन लोगों ने खरीद, उत्तराधिकार (विरासत) या अन्य वैध माध्यमों से कृषि भूमि प्राप्त की है, उन्हें भी इन योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए. वर्तमान नियमों के कारण ऐसे हजारों किसान सरकारी सहायता से वंचित हैं, जबकि वे नियमित रूप से खेती कर रहे हैं. Onion Farmers PM Kisan
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अनुसार, योजनाओं की शुरुआत के समय तय किए गए पात्रता मानदंडों में अब तक कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया है. बदलते कृषि परिदृश्य और जमीन के स्वामित्व में हुए बदलावों को देखते हुए अब नियमों में लचीलापन जरूरी हो गया है. संगठन का कहना है कि यदि पात्रता नियमों में समय रहते संशोधन किया जाता है, तो बड़ी संख्या में वास्तविक किसानों को इन योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. Onion Farmers PM Kisan

इस नियम में ढील देने की मांग कर रहे किसान
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने सरकार से मांग की है कि वर्ष 2019 के बाद खरीद, विरासत (उत्तराधिकार) या पारिवारिक बंटवारे के माध्यम से कृषि भूमि के मालिक बने सभी पात्र किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) और नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजनाओं के दायरे में शामिल किया जाए. संगठन का कहना है कि वर्तमान पात्रता नियमों के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक किसान सरकारी सहायता से वंचित हैं, जबकि वे लगातार खेती कर रहे हैं और कृषि पर ही निर्भर हैं. Onion Farmers PM Kisan
किसान संघ ने अपने बयान में यह भी मांग की है कि जिन पात्र किसानों को अब तक योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है, उन्हें उनकी सभी लंबित किस्तों का भुगतान किया जाए. इसके अलावा, लाभार्थियों के चयन में जमीन के पुराने रिकॉर्ड की बजाय ‘असली खेती करने वाले किसान’ को मुख्य पात्रता मानदंड बनाया जाए, ताकि वास्तव में खेती करने वाले किसानों को सरकारी सहायता का लाभ मिल सके.
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संगठन ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि छूट गए पात्र किसानों की पहचान करने के लिए राज्यभर में एक विशेष पंजीकरण और सत्यापन अभियान चलाया जाए. उनका मानना है कि इससे उन किसानों को भी योजनाओं से जोड़ा जा सकेगा, जो तकनीकी कारणों या पुराने पात्रता नियमों की वजह से अब तक लाभ पाने से वंचित हैं Onion Farmers PM Kisan
रुकी हुई किस्तें जारी करने की मांग पर अड़े किसान
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ का कहना है कि खेती का पूरा खर्च उठाने और नियमित रूप से कृषि कार्य करने वाले कई वास्तविक किसानों को मौजूदा पात्रता नियमों के कारण योजनाओं से बाहर रखा गया है. संगठन का आरोप है कि ऐसे किसानों को न केवल पीएम किसान सम्मान निधि और नमो शेतकरी महासम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा, बल्कि कई पात्र किसानों की आर्थिक सहायता की किस्तें भी रुकी हुई हैं. Onion Farmers PM Kisan
संघ ने कहा है कि वह अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और संबंधित कृषि विभागों को सौंपेगा. संगठन का आग्रह है कि पात्रता नियमों की समीक्षा कर उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया जाए, ताकि वास्तविक किसानों को योजनाओं का लाभ मिल सके और जिन किसानों की किस्तें लंबित हैं, उन्हें जल्द से जल्द जारी किया जाए.
संघ के संस्थापक भरत दिघोले ने कहा कि दोनों योजनाओं का उद्देश्य किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, इसलिए पात्रता के नियम ऐसे होने चाहिए जो वास्तविक खेती करने वाले किसानों के हितों की रक्षा करें. उन्होंने मांग की कि सभी योग्य किसानों को योजनाओं में शामिल किया जाए और उनकी रुकी हुई सभी किस्तों का भुगतान बिना देरी के किया जाए. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. Onion Farmers PM Kisan
राज्य सरकार ने केंद्र से शुरू किया पत्राचार
किसानों की कर्जमाफी, प्याज की खरीद और कृषि से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर पहले से दबाव झेल रही महाराष्ट्र सरकार अब प्याज उत्पादक किसानों की नई मांगों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार ने किसान संगठनों की मांगों का अध्ययन शुरू कर दिया है और पात्रता नियमों में संभावित बदलाव को लेकर केंद्र सरकार के साथ पत्राचार भी किया जा रहा है. Onion Farmers PM Kisan
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) केंद्र सरकार की योजना है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का संशोधन या पात्रता नियमों में बदलाव का अंतिम निर्णय केंद्र स्तर पर ही लिया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी तक केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
किसानों को सालाना मिलते हैं 12,000 रुपये
वर्तमान में केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में प्रदान करती है. वहीं, महाराष्ट्र सरकार नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के जरिए पात्र किसानों को अतिरिक्त 6,000 रुपये सालाना देती है. इस प्रकार दोनों योजनाओं का लाभ लेने वाले किसानों को कुल 12,000 रुपये प्रति वर्ष की वित्तीय सहायता मिलती है, जिससे खेती की लागत का कुछ बोझ कम करने में मदद मिलती है.
हाल ही में खरीफ बुवाई के मौसम से पहले केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी की थी, जिसके तहत महाराष्ट्र के लगभग 90.85 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे राशि हस्तांतरित की गई. अब किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि पात्रता नियमों में संशोधन कर उन किसानों को भी इस सहायता का लाभ दिया जाए, जो वर्ष 2019 के बाद कृषि भूमि के मालिक बने हैं.
