गुजरात में दक्षिण कोरियाई तकनीक से बन रहे 2 रबर डैम, सिंचाई की समस्या होगी दूर, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा Rubber Dam Technology

गुजरात में दक्षिण कोरियाई तकनीक से बन रहे 2 रबर डैम, सिंचाई की समस्या होगी दूर, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा Rubber Dam Technology

Rubber Dam Technology: गुजरात में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पहली बार दक्षिण कोरियाई तकनीक पर आधारित दो आधुनिक एयर-फिल्ड रबर डैम बनाए जा रहे हैं। करीब 160 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत छोटा उदयपुर और तापी जिलों में इन रबर डैमों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य बारिश के पानी का बेहतर संरक्षण करना, किसानों को सालभर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना और भूजल स्तर में सुधार लाना है।

अधिकारियों के अनुसार दोनों परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और अब तक करीब 75 से 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इन हाईटेक रबर डैमों के शुरू होने के बाद बारिश के अतिरिक्त पानी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा, जिससे भूजल रिचार्ज, सिंचाई क्षमता में वृद्धि और बाढ़ नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना आधुनिक जल प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी और इससे हजारों किसानों को खेती के लिए नियमित जल उपलब्धता का लाभ मिलेगा। Rubber Dam Technology

Rubber Dam Technology
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गुजरात सरकार ने जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण परियोजना शुरू की है। इसके तहत राज्य में पहली बार दक्षिण कोरियाई तकनीक पर आधारित दो अत्याधुनिक एयर-फिल्ड (हवा से फुलाए जाने वाले) रबर डैम बनाए जा रहे हैं। करीब 160 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस परियोजना को भविष्य की जल सुरक्षा और कृषि विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। Rubber Dam Technology

सरकारी योजना के अनुसार पहला रबर डैम छोटा उदयपुर जिले की हेरन नदी पर, जबकि दूसरा तापी जिले की अंबिका नदी पर बनाया जा रहा है। इन आधुनिक रबर डैमों का उद्देश्य वर्षा के पानी का अधिकतम संरक्षण करना और जरूरत के अनुसार जल प्रवाह को नियंत्रित करना है। परियोजना के पूरा होने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए अधिक और नियमित पानी उपलब्ध होगा, जिससे खेती की उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है। Rubber Dam Technology

इसके अलावा, इन रबर डैमों के माध्यम से भूजल स्तर में सुधार, वर्षा जल का बेहतर संचयन और बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना न केवल जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा जैसी चुनौतियों से निपटने में भी किसानों के लिए एक प्रभावी समाधान साबित होगी। Rubber Dam Technology

क्यों चुनी गई रबर डैम तकनीक?

अधिकारियों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में ये परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं वहां की भौगोलिक परिस्थितियां पारंपरिक बांधों की तुलना में रबर डैम तकनीक के लिए अधिक उपयुक्त हैं। इन इलाकों में जमीन अपेक्षाकृत समतल है और नदियों के किनारे भी अधिक ऊंचे नहीं हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य चेक डैम या गेट आधारित बांध जल प्रबंधन के लिहाज से उतने प्रभावी साबित नहीं होते, इसलिए आधुनिक एयर-फिल्ड रबर डैम तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया गया है। Rubber Dam Technology

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रबर डैम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लचीली संचालन प्रणाली है। आवश्यकता पड़ने पर इसमें हवा भरकर पानी को रोका जा सकता है और जब अतिरिक्त पानी छोड़ने की जरूरत हो, तब हवा निकालकर डैम को तुरंत खाली किया जा सकता है। इस तकनीक से सूखे मौसम में नदी के पानी का बेहतर भंडारण संभव होगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा। वहीं, मानसून के दौरान अधिक वर्षा होने पर अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से तेजी से छोड़ा जा सकेगा। Rubber Dam Technology

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक बाढ़ के खतरे को कम करने, नदी किनारों के कटाव (Erosion) को रोकने और गाद (Silt) के अत्यधिक जमाव को नियंत्रित करने में भी प्रभावी साबित होगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और नदी पारिस्थितिकी के संतुलन को बनाए रखने में भी रबर डैम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। Rubber Dam Technology

30 महीनों में पूरा होगा प्रोजेक्ट, किसानों को मिलेगा सिंचाई का बड़ा लाभ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुजरात सरकार का मानना है कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना राज्य में जल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके पूरा होने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी उपलब्ध होगा, भूजल स्तर में सुधार आएगा और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी जल संरक्षण का सीधा लाभ मिलेगा।

राज्य का पहला हाईटेक एयर-फिल्ड रबर डैम छोटा उदयपुर जिले की हेरन नदी पर बनाया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 82.97 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य तेज गति से जारी है और अब तक करीब 75 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। सरकार ने इस परियोजना को अगले 30 महीनों के भीतर पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। Rubber Dam Technology

परियोजना के चालू होने के बाद नदी के पानी का बेहतर प्रबंधन संभव होगा, जिससे वर्षा जल का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा। इससे किसानों को सालभर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और बाढ़ नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। Rubber Dam Technology

3,420 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ

आधुनिक एयर-फिल्ड रबर डैम तकनीक में कंक्रीट के मजबूत आधार पर एक विशेष प्रकार का रबर बैग (ब्लैडर) लगाया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर इस ब्लैडर में हवा भरकर नदी के पानी को रोका जाता है, जबकि अतिरिक्त पानी छोड़ने की जरूरत होने पर हवा निकाल दी जाती है, जिससे नदी का जल सामान्य रूप से बहने लगता है। इस पूरी प्रणाली को ऑटोमेशन तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे जल स्तर के अनुसार डैम का संचालन अधिक सटीक, सुरक्षित और कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ किया जा सकेगा। Rubber Dam Technology

गुजरात का पहला हाईटेक रबर डैम छोटा उदयपुर जिले के बोडेली तालुका के राजवासना गांव के पास हेरन नदी पर बनाया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद इसका सीधा लाभ आसपास के 25 गांवों को मिलेगा। सरकार के अनुसार इस डैम के माध्यम से करीब 3,420 हेक्टेयर कृषि भूमि को नियमित सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों को वर्षभर खेती के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। इसके साथ ही जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी इस परियोजना की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है। Rubber Dam Technology

180 मीटर लंबे रबर ब्लैडर से बढ़ेगी जल भंडारण क्षमता

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 180 मीटर लंबा और 3.5 मीटर ऊंचा एयर-फिल्ड रबर ब्लैडर स्थापित किया जा रहा है। यह आधुनिक रबर ब्लैडर मौजूदा वीयर (जल अवरोधक संरचना) पर लगाया जाएगा, जिससे नदी में पानी को आवश्यकता के अनुसार रोका और छोड़ा जा सकेगा। इसके चालू होने के बाद जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और मौजूदा संरचना की क्षमता बढ़कर करीब 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) तक पहुंच जाएगी। इससे सिंचाई, जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

परियोजना में बाढ़ सुरक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत नदी के बाएं किनारे पर 900 मीटर और दाएं किनारे पर 500 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जा रहा है, ताकि तेज बारिश और अधिक जल प्रवाह की स्थिति में आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जा सके। इससे नदी किनारे होने वाले कटाव को कम करने और बाढ़ से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। Rubber Dam Technology

अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के दीर्घकालिक और सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 10 वर्षों का ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) अनुबंध भी शामिल किया गया है। इसके तहत डैम की नियमित निगरानी, तकनीकी रखरखाव और समय-समय पर आवश्यक मरम्मत की जाएगी, जिससे यह परियोजना लंबे समय तक किसानों और स्थानीय लोगों को निर्बाध रूप से लाभ पहुंचा सके।

जापान के मानकों पर आधारित आधुनिक डिजाइन, 30 साल तक चलेगा रबर डैम

गुजरात में बन रहा यह अत्याधुनिक एयर-फिल्ड रबर डैम अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखते हुए जापान के कोड-2000 (Code-2000) मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। परियोजना में दक्षिण कोरिया में निर्मित विशेष रबर ब्लैडर का उपयोग किया जा रहा है, जिसकी मोटाई 18 से 32 मिलीमीटर के बीच है। विशेषज्ञों के अनुसार इस उच्च गुणवत्ता वाले रबर ब्लैडर की अनुमानित कार्य अवधि करीब 30 वर्ष होगी, जिससे लंबे समय तक कम रखरखाव के साथ प्रभावी जल प्रबंधन संभव हो सकेगा।

अधिकारियों के मुताबिक, डैम की कुल ऊंचाई 4.5 मीटर होगी। इसमें 2 मीटर ऊंचा मजबूत कंक्रीट बेस तैयार किया जाएगा, जिसके ऊपर 2.5 मीटर ऊंचा एयर-फिल्ड रबर ब्लैडर लगाया जाएगा। पूरी संरचना की कुल लंबाई लगभग 280 मीटर होगी और इसे चार अलग-अलग हिस्सों में विकसित किया जा रहा है, ताकि संचालन और रखरखाव अधिक सुरक्षित एवं आसान बनाया जा सके।

इस आधुनिक संरचना के चालू होने के बाद वर्षा जल का बेहतर संरक्षण, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता, भूजल रिचार्ज और बाढ़ नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना गुजरात में आधुनिक जल प्रबंधन और कृषि विकास का एक नया मॉडल साबित होगी।

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