Tamil Nadu Monsoon Update के अनुसार तमिलनाडु में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के कारण कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया है। राज्य के कई प्रमुख जलाशयों में जलस्तर लगातार घट रहा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। इसका सबसे अधिक असर कुरुवई (Kuruvai) धान की खेती पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों और राइस मिलर्स का कहना है कि फिलहाल राज्य में चावल की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
इस वर्ष मानसून की धीमी शुरुआत ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। Tamil Nadu Monsoon Update के अनुसार यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो धान उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
कुरुवई धान की खेती पर मंडराया संकट
कुरुवई धान तमिलनाडु की महत्वपूर्ण खरीफ फसल है, जिसकी बुवाई जून से जुलाई के बीच होती है। यह फसल मुख्य रूप से सिंचाई पर निर्भर रहती है। इस बार बारिश की कमी और जलाशयों में घटते पानी के कारण किसानों को समय पर सिंचाई नहीं मिल पा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा तो कुरुवई धान की उपज प्रभावित हो सकती है। Tamil Nadu Monsoon Update लगातार इस बात की ओर संकेत कर रहा है कि मौसम की स्थिति पर आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
मुल्लापेरियार, वैगई और मेट्टूर बांधों में घटा जलस्तर
राज्य के प्रमुख जलाशय जैसे मुल्लापेरियार, वैगई और मेट्टूर बांध तमिलनाडु की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। लेकिन इस बार इन जलाशयों में जलस्तर सामान्य से कम दर्ज किया गया है।कम पानी के कारण सिंचाई के लिए सीमित मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इसका असर धान सहित अन्य खरीफ फसलों पर भी पड़ सकता है। Tamil Nadu Monsoon Update के अनुसार यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो कई जिलों में खेती प्रभावित हो सकती है।
क्या राज्य में चावल की कमी होगी?
बारिश कम होने के बावजूद विशेषज्ञों ने चावल की उपलब्धता को लेकर राहत भरी जानकारी दी है। तमिलनाडु राइस मिल ओनर्स एंड पैडी राइस डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि राज्य में फिलहाल चावल की कोई कमी नहीं होगी और कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।
एसोसिएशन के सचिव डॉ. ए.सी. मोहन के अनुसार राज्य की राइस मिलों में लगभग 5 लाख टन अतिरिक्त धान का भंडार मौजूद है। यही कारण है कि मौजूदा स्थिति में बाजार में चावल की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। Tamil Nadu Monsoon Update के बीच यह खबर उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए राहत देने वाली है।
राइस मिलों में क्यों रखा जाता है धान का स्टॉक?
डॉ. ए.सी. मोहन ने बताया कि राइस मिलें धान खरीदने के तुरंत बाद उसकी मिलिंग नहीं करतीं। आमतौर पर धान को लगभग आठ महीने तक सुरक्षित रखा जाता है, क्योंकि पुराना चावल बेहतर गुणवत्ता और अधिक कीमत पर बिकता है।
वर्तमान में उपलब्ध अतिरिक्त स्टॉक अगले कई महीनों तक बाजार की मांग पूरी करने में सक्षम माना जा रहा है। इसलिए Tamil Nadu Monsoon Update के बावजूद तत्काल चावल संकट की संभावना नहीं दिखाई दे रही है।
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अगस्त से दूसरे राज्यों से आएगा धान
एसोसिएशन के अनुसार अगस्त महीने से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल से धान की आवक शुरू हो जाएगी।यदि तमिलनाडु में उत्पादन कुछ कम भी रहता है, तो दूसरे राज्यों से आने वाला धान इस कमी को काफी हद तक पूरा कर देगा। इसी वजह से बाजार में चावल की आपूर्ति सामान्य बने रहने की उम्मीद है। Tamil Nadu Monsoon Update में यह पहलू राज्य के खाद्यान्न संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कर्नाटक से हर साल आता है 30 लाख टन धान
तमिलनाडु अपनी जरूरत का बारीक और सुपर फाइन धान काफी हद तक कर्नाटक से मंगाता है। हर वर्ष लगभग 30 लाख टन धान कर्नाटक से राज्य में पहुंचता है।हालांकि इस वर्ष कर्नाटक में स्थानीय मांग बढ़ने के कारण बीपीटी (BPT) और सोना पोन्नी (Sona Ponni) जैसी किस्मों के चावल की कीमत में लगभग 5 से 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।
इसके बावजूद सामान्य चावल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। Tamil Nadu Monsoon Update के अनुसार बाजार में फिलहाल किसी बड़ी महंगाई की आशंका नहीं है।
सांबा धान की फसल से बनी हुई हैं उम्मीदें
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु की सबसे बड़ी धान फसल सांबा सीजन की होती है। यदि आगामी महीनों में मानसून सामान्य रहता है और सांबा फसल अच्छी होती है, तो पूरे वर्ष चावल उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।इसी कारण सरकार और किसान अब आने वाले मानसून पर नजर बनाए हुए हैं। Tamil Nadu Monsoon Update के अनुसार सांबा सीजन राज्य की खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
सरकार को दी गई ये महत्वपूर्ण सलाह
मैडीट्सिया की फूड पैनल के चेयरपर्सन ए. अंबरासन का कहना है कि यदि कुरुवई धान की खेती प्रभावित होती है, तब भी बाजार में बड़ा संकट नहीं आएगा क्योंकि तमिलनाडु अपनी जरूरत का बारीक चावल दूसरे राज्यों से मंगाता है।
उन्होंने सरकार को सलाह दी कि किसानों को सांबा सीजन में अधिक मांग वाली धान की किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही अतिरिक्त गोदाम और आधुनिक भंडारण सुविधाओं का विस्तार किया जाए ताकि भविष्य में दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम हो सके।
जून में भारी बारिश ने भी पहुंचाया था नुकसान
दिलचस्प बात यह है कि कुछ सप्ताह पहले तमिलनाडु के सिवगंगा जिले में भारी बारिश ने भी किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। लगातार हुई बारिश से तैयार कुरुवई धान और गन्ने की फसलें खेतों में गिर गई थीं और कई क्षेत्रों में जलभराव हो गया था।
थिरुमलाई कोन्नेरीपट्टी और कल्लारथिनिपट्टी जैसे कृषि क्षेत्रों में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। अब Tamil Nadu Monsoon Update में कम बारिश और जलाशयों में घटते पानी की नई चुनौती सामने आ गई है, जिससे किसान दोहरी मार झेल रहे हैं।
आगे क्या है किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय होता है और अच्छी बारिश होती है, तो जलाशयों का जलस्तर सुधर सकता है तथा कुरुवई धान की फसल को राहत मिल सकती है।
लेकिन यदि बारिश की कमी बनी रहती है, तो सिंचाई, उत्पादन और किसानों की आय पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसलिए किसान, कृषि विभाग और जल संसाधन विभाग सभी की नजर अब आगामी मानसूनी गतिविधियों पर टिकी हुई है। Tamil Nadu Monsoon Update के अगले कुछ सप्ताह तमिलनाडु की कृषि और धान उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
