Kharif Sowing: देशभर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। मौसम विभाग के अनुसार 9 जुलाई को मॉनसून ने पूरे भारत को कवर कर लिया, जो सामान्य समय से सिर्फ एक दिन बाद है। जून में कम बारिश के कारण Kharif Sowing की रफ्तार धीमी पड़ गई थी, लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई अच्छी बारिश ने किसानों को राहत दी है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो Kharif Sowing में तेजी आएगी और खरीफ उत्पादन पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। इसके साथ ही किसान धान के अलावा कम पानी में तैयार होने वाली मोटे अनाज की फसलों की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं।
पूरे देश में पहुंचा मॉनसून, Kharif Sowing के लिए बनी अनुकूल स्थिति
देशभर के किसानों के लिए राहत की खबर है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब पूरे भारत में पहुंच चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के शेष हिस्सों में भी मॉनसून सक्रिय हो गया है। जून में बारिश की कमी के कारण कई राज्यों में खेतों में पर्याप्त नमी नहीं थी, जिससे Kharif Sowing प्रभावित हुई थी।
अब जुलाई की लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ रही है और किसान तेजी से धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा, कपास और दालों की बुवाई शुरू कर रहे हैं। मौसम विभाग का मानना है कि यदि बारिश सामान्य बनी रहती है तो Kharif Sowing आने वाले दिनों में और रफ्तार पकड़ सकती है।
यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली में भारी बारिश, Kharif Sowing को मिलेगा फायदा
भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए डिप्रेशन में बदल गया है। इसका असर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में दिखाई दे रहा है।
आज उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि उत्तराखंड में आज और कल बहुत भारी बारिश का अनुमान है। दिल्ली-एनसीआर के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन राज्यों में होने वाली अच्छी बारिश Kharif Sowing के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करेगी और खेतों में नमी बढ़ने से किसानों को समय पर बुवाई पूरी करने में मदद मिलेगी।
जून में कम बारिश से Kharif Sowing हुई थी प्रभावित
इस वर्ष जून किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। पूरे देश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इसका सीधा असर Kharif Sowing पर पड़ा और धान, सोयाबीन, कपास, दलहन तथा अन्य खरीफ फसलों की बुवाई अपेक्षित गति से नहीं हो सकी।कई राज्यों में खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण किसानों को बुवाई टालनी पड़ी। इससे खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ और कई इलाकों में खरीफ सीजन की शुरुआत धीमी रही।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों में Kharif Sowing की स्थिति
कृषि मंत्रालय के अनुसार 5 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई लगभग 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 442.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी।यानी इस बार अब तक लगभग 21 प्रतिशत कम क्षेत्र में Kharif Sowing दर्ज की गई है। हालांकि जुलाई में बढ़ी बारिश के बाद आने वाले दिनों में इस अंतर के कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जुलाई की बारिश से Kharif Sowing में तेजी आने की उम्मीद
जुलाई की शुरुआत किसानों के लिए राहत लेकर आई है। महीने के पहले नौ दिनों में सामान्य से लगभग 38 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। अच्छी बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनने लगी है, जिससे Kharif Sowing की रफ्तार बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है।
जुलाई को मॉनसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है क्योंकि इसी दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दलहन और तिलहन जैसी अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई पूरी होती है। समय पर होने वाली Kharif Sowing बेहतर उत्पादन की नींव रखती है।
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Kharif Sowing के दौरान मोटे अनाज की खेती पर बढ़ा किसानों का फोकस
बदलते मौसम और बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए किसान अब धान के साथ-साथ मोटे अनाज की खेती पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। बाजरा, ज्वार और रागी जैसी फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं और कम समय में तैयार भी हो जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में Kharif Sowing के दौरान मोटे अनाज की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन रही है। इससे पानी की बचत के साथ खेती की लागत भी कम हो सकती है।
कई राज्यों में कम बारिश, Kharif Sowing पर अब भी बना असर
हालांकि मॉनसून पूरे देश में पहुंच चुका है, लेकिन पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, केरल और असम सहित 13 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।1 जून से 9 जुलाई के बीच पूरे देश में 204.7 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य औसत 239.1 मिमी है। यानी अब भी लगभग 14 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में बारिश सामान्य रहती है तो Kharif Sowing की रफ्तार में और सुधार देखने को मिल सकता है।
क्यों Kharif Sowing के लिए सबसे अहम माना जाता है जुलाई?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई का महीना Kharif Sowing के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी समय किसान धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा, कपास और दालों जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई पूरी करते हैं।
यदि जुलाई में अच्छी बारिश होती है तो फसल की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है, सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना मजबूत होती है। समय पर पूरी हुई Kharif Sowing का लाभ रबी फसलों की बुवाई पर भी देखने को मिलता है।
मौसम विभाग की सलाह: Kharif Sowing की योजना मौसम के अनुसार बनाएं
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और बारिश की स्थिति के अनुसार खेती की योजना बनाएं। जहां खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो, वहां बिना देरी किए Kharif Sowing पूरी करें। जिन क्षेत्रों में वर्षा अभी भी सामान्य से कम है, वहां पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।आने वाले हफ्तों में यदि मॉनसून सक्रिय बना रहता है तो Kharif Sowing में तेजी आएगी, खरीफ उत्पादन मजबूत होगा और किसानों को बेहतर पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
