देशभर में Kharif Bunai me Aayi Tezi देखने को मिल रही है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार किसानों ने 10 जुलाई तक 531.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी कर ली है। हालांकि यह पिछले साल की तुलना में अभी भी कम है, लेकिन धान की रोपाई में आई तेजी ने सरकार और किसानों को बड़ी राहत दी है। दूसरी ओर दलहन और तिलहन की धीमी प्रगति चिंता का कारण बनी हुई है।
531.25 लाख हेक्टेयर तक पहुंची खरीफ बुवाई
इस वर्ष Kharif Bunai me Aayi Tezi के चलते पिछले सप्ताह किसानों ने 180 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई की। इसके बावजूद कुल बुवाई क्षेत्र अभी भी पिछले वर्ष के 632.69 लाख हेक्टेयर के मुकाबले लगभग 16 प्रतिशत कम है। सामान्य बुवाई क्षेत्र का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा अब तक कवर किया जा चुका है।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सामान्य रहा तो Kharif Bunai me Aayi Tezi और मजबूत हो सकती है।
धान की बुवाई ने कम किया अंतर
इस सीजन में Kharif Bunai me Aayi Tezi का सबसे अधिक फायदा धान की खेती में देखने को मिला है। 10 जुलाई तक धान की रोपाई 114.69 लाख हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 125.53 लाख हेक्टेयर थी।5 जुलाई तक धान की बुवाई में 13 प्रतिशत की कमी थी, लेकिन अब यह अंतर घटकर केवल 9 प्रतिशत रह गया है। इससे उम्मीद बढ़ी है कि इस वर्ष चावल उत्पादन बेहतर रह सकता है।
दलहन और तिलहन की धीमी रफ्तार बनी चुनौती
जहां धान में Kharif Bunai me Aayi Tezi दर्ज की गई है, वहीं दलहन और तिलहन की बुवाई अब भी संतोषजनक नहीं है। 10 जुलाई तक दलहन का कुल रकबा 56.63 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 73.85 लाख हेक्टेयर था।तिलहन की बुवाई भी घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 149.18 लाख हेक्टेयर थी। भारत पहले से ही खाद्य तेल और कई दलहनों के आयात पर निर्भर है, इसलिए यह स्थिति सरकार के लिए चिंता बढ़ा सकती है।
मोटे अनाज और कपास की बुवाई भी पिछड़ी
Kharif Bunai me Aayi Tezi के बावजूद मोटे अनाज की बुवाई अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ सकी। इस वर्ष मोटे अनाज का कुल रकबा 98.69 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत कम है।वहीं कपास की बुवाई 79.54 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले वर्ष से लगभग 15 प्रतिशत कम है। सोयाबीन का रकबा 90.51 लाख हेक्टेयर और मूंगफली का रकबा 23.40 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले साल से कम है।
अरहर, मूंग और उड़द की खेती पर असर
दलहन फसलों में अरहर की बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इस बार अरहर की बुवाई 19.54 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष यह 28.03 लाख हेक्टेयर थी। यानी करीब 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।मूंग की बुवाई 21.52 लाख हेक्टेयर और उड़द की बुवाई 9.34 लाख हेक्टेयर रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में सुधार नहीं हुआ तो Kharif Bunai me Aayi Tezi का लाभ इन फसलों को नहीं मिल पाएगा।
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ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी का रकबा घटा
मोटे अनाज की प्रमुख फसलों में ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी सभी का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा। ज्वार की बुवाई 6.88 लाख हेक्टेयर, बाजरा 33.76 लाख हेक्टेयर, रागी 0.93 लाख हेक्टेयर और मक्का 55.97 लाख हेक्टेयर में हुई है।इन आंकड़ों से साफ है कि Kharif Bunai me Aayi Tezi का असर अभी सभी फसलों पर समान रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।
गन्ना और जूट की खेती में बढ़ोतरी
गन्ने की खेती में इस वर्ष सकारात्मक संकेत मिले हैं। 57.58 लाख हेक्टेयर में गन्ने की बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष यह 56.72 लाख हेक्टेयर थी।इसी तरह जूट और मेस्ता का रकबा भी बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह दर्शाता है कि कुछ फसलों में Kharif Bunai me Aayi Tezi का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
सामान्य से कम बारिश बनी सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 1 जून से 13 जुलाई के बीच देश में सामान्य से 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जून में यह कमी 37 प्रतिशत थी, लेकिन जुलाई की शुरुआत में कुछ सुधार हुआ।हालांकि 11 से 13 जुलाई के बीच फिर से बारिश में 42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। मौसम विभाग का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो Kharif Bunai me Aayi Tezi की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
सरकार ने तय किया उत्पादन लक्ष्य
सरकार ने इस खरीफ सीजन में 17.616 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 12.315 करोड़ टन चावल, 84 लाख टन दलहन, 3.104 करोड़ टन मक्का और 1.356 करोड़ टन मोटे अनाज शामिल हैं।इसके अलावा तिलहन उत्पादन का लक्ष्य 2.892 करोड़ टन रखा गया है, जिसमें 1.485 करोड़ टन सोयाबीन और 1.135 करोड़ टन मूंगफली का लक्ष्य शामिल है। यदि मानसून सामान्य रहता है तो Kharif Bunai me Aayi Tezi सरकार के इन उत्पादन लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
