Soyabean Ki Buwai में बड़ा उछाल! सरकारी आंकड़ों से आगे निकली बुआई, MP-महाराष्ट्र सबसे आगे

Soyabean Ki Buwai में बड़ा उछाल! सरकारी आंकड़ों से आगे निकली बुआई, MP-महाराष्ट्र सबसे आगे

देशभर में मॉनसून के सक्रिय होने के बाद Soyabean Ki Buwai ने रफ्तार पकड़ ली है। सोयाबीन उत्पादक राज्यों में किसानों ने तेजी से खेतों में बुवाई शुरू कर दी है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) का दावा है कि इस बार वास्तविक बुवाई सरकारी रिकॉर्ड से काफी आगे निकल चुकी है। संगठन का कहना है कि खेतों से आने वाले आंकड़ों को सरकारी पोर्टल पर अपडेट होने में समय लगता है, इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई देता है। लगातार हो रही बारिश के कारण आने वाले दिनों में Soyabean Ki Buwai का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

सरकारी आंकड़ों और SOPA के रिकॉर्ड में क्यों दिख रहा है अंतर?

SOPA के अनुसार 30 जून तक देश में लगभग 28.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में Soyabean Ki Buwai पूरी हो चुकी थी। वहीं सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसी अवधि के दौरान केवल 6.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र दर्ज किया गया है।विशेषज्ञों का कहना है कि किसान पहले खेतों में बुवाई पूरी कर लेते हैं, लेकिन यह जानकारी जिला और राज्य स्तर से होकर सरकारी पोर्टल तक पहुंचती है। इसी प्रक्रिया में समय लगने के कारण Soyabean Ki Buwai के वास्तविक आंकड़े और सरकारी रिकॉर्ड में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

अच्छी बारिश के बाद किसानों ने बढ़ाई रफ्तार

इस वर्ष मॉनसून की शुरुआत सामान्य से कुछ धीमी रही थी। इसके कारण कई किसानों ने बारिश का इंतजार किया। लेकिन जैसे ही मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अच्छी वर्षा हुई, किसानों ने तेजी से खेतों में काम शुरू कर दिया। अब अधिकांश क्षेत्रों में Soyabean Ki Buwai तेज गति से आगे बढ़ रही है।SOPA का अनुमान है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम अनुकूल बना रहा तो जुलाई के मध्य तक अधिकांश राज्यों में बुवाई का काम लगभग पूरा हो जाएगा।

बेहतर बाजार भाव से बढ़ा किसानों का भरोसा

पिछले सीजन में कई किसानों ने मक्का की खेती को प्राथमिकता दी थी क्योंकि उन्हें बेहतर दाम मिले थे। इस बार बाजार में सोयाबीन की मजबूत मांग और अच्छे भाव मिलने की संभावना के कारण किसान फिर से Soyabean Ki Buwai की ओर लौटे हैं।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम साथ देता है तो इस वर्ष सोयाबीन का रकबा बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

मध्य प्रदेश में सबसे आगे Soyabean Ki Buwai

देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 15.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में Soyabean Ki Buwai पूरी हो चुकी है। जबकि सरकार के रिकॉर्ड में यह आंकड़ा केवल 4.30 लाख हेक्टेयर बताया गया है।SOPA का मानना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो 15 जुलाई तक राज्य में लगभग पूरे लक्ष्य के अनुसार बुवाई पूरी हो जाएगी। मध्य प्रदेश की प्रगति इस बार देश के कुल उत्पादन पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

महाराष्ट्र में भी तेजी से बढ़ रही बुवाई

देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में अब तक लगभग 8.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में Soyabean Ki Buwai हो चुकी है। जबकि सरकार के रिकॉर्ड में यह आंकड़ा केवल 1.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।हालांकि सभी जिलों में स्थिति एक जैसी नहीं है। जिन इलाकों में समय पर बारिश हुई है, वहां 40 से 50 प्रतिशत तक बुवाई पूरी हो चुकी है। वहीं कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मिट्टी में नमी की कमी के कारण किसानों को अभी भी बारिश का इंतजार है। अच्छी वर्षा होने पर यहां Soyabean Ki Buwai और तेज होने की उम्मीद है।

राजस्थान में भी बढ़ रहा सोयाबीन का रकबा

राजस्थान में मॉनसून की सक्रियता के बाद किसानों ने तेजी से खेतों में बुवाई शुरू की है। SOPA के अनुसार राज्य में लगभग 3.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में Soyabean Ki Buwai पूरी हो चुकी है। यह राज्य के कुल लक्ष्य का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा है।मौसम अनुकूल रहने पर आने वाले दिनों में राजस्थान में भी सोयाबीन का रकबा तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे राज्य के किसानों को बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद है।

अन्य राज्यों में भी संतोषजनक प्रगति

SOPA का कहना है कि देश के अन्य प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में भी Soyabean Ki Buwai अच्छी गति से आगे बढ़ रही है। शुरुआती देरी के बावजूद इस बार कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष के मुकाबले बेहतर रहने की संभावना है।विशेषज्ञों का कहना है कि अब किसानों की उम्मीद पूरी तरह जुलाई, अगस्त और सितंबर में होने वाली बारिश पर टिकी है। यदि समय पर और संतुलित वर्षा होती रही तो Soyabean Ki Buwai बेहतर उत्पादन में बदल सकती है और किसानों को अच्छी पैदावार के साथ बेहतर बाजार भाव भी मिलने की संभावना रहेगी।

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