तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में इस बार मानसून के दौरान भी किसानों को राहत नहीं मिल पाई है। Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। कम बारिश, सूखी झीलों और सिंचाई के लिए पानी की कमी के कारण करीब 16 हजार हेक्टेयर में लगी मूंगफली की फसल प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat अब पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गया है।
धर्मपुरी में कम बारिश से बढ़ा जल संकट
धर्मपुरी जिले के करीमंगलम क्षेत्र में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहा है। सामान्य तौर पर यहां लगभग 403 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक सामान्य से 20 प्रतिशत से भी कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी कारण Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat की स्थिति पैदा हो गई है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं है और सिंचाई के लिए उपलब्ध जल स्रोत भी तेजी से सूख रहे हैं।कम बारिश का असर जलाशयों, तालाबों और भूजल स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। किसान अब केवल बारिश पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
16 हजार हेक्टेयर में मूंगफली की खेती पर संकट
धर्मपुरी जिले में लगभग 16,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती होती है। इनमें से लगभग 3,800 हेक्टेयर क्षेत्र केवल करीमंगलम में स्थित है। इस समय Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat सबसे अधिक इसी इलाके में देखने को मिल रहा है।किसानों का कहना है कि फसल की बढ़वार रुक गई है और कई खेतों में पौधे सूखने लगे हैं। यदि अगले कुछ दिनों में पानी नहीं मिला, तो हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सात झीलें सूखने से बढ़ी परेशानी
लगातार कम बारिश के कारण करीमंगलम क्षेत्र की सात प्रमुख झीलें पूरी तरह सूख चुकी हैं। भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है। किसानों के अनुसार अब केवल 800 फीट से अधिक गहरे बोरवेल से ही सीमित मात्रा में पानी मिल रहा है।ऐसे हालात में Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat और गंभीर होता जा रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो गया है।
समय पर बुवाई के बाद भी फसल की बढ़वार रुकी
करीमंगलम के किसानों ने मई महीने में मूंगफली की बुवाई की थी। उम्मीद थी कि जुलाई के अंत तक फसल अच्छी स्थिति में पहुंच जाएगी, लेकिन बारिश नहीं होने और सिंचाई का पानी नहीं मिलने से पौधों की बढ़वार रुक गई है।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पानी नहीं मिला, तो Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है।
KRP बांध की दाहिनी नहर से पानी छोड़ने की मांग
प्रभावित किसानों ने लोक निर्माण विभाग (PWD-WRD) और जिला प्रशासन से मांग की है कि KRP बांध की दाहिनी (राइट) नहर से पानी छोड़कर डिंडल, बंदारहल्ली और करीमंगलम की झीलों तक पहुंचाया जाए।किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया गया, तो Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और हजारों हेक्टेयर में लगी फसल बचाई जा सकती है।
प्रशासन ने दिया आश्वासन
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि KRP बांध से पानी छोड़ा जा रहा है और किसानों की मांग पर स्थिति की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार आवश्यकता के अनुसार पानी का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि किसानों को उनका उचित हिस्सा मिल सके।हालांकि किसान चाहते हैं कि प्रशासन जल्द निर्णय ले, क्योंकि Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat हर गुजरते दिन के साथ और गंभीर होता जा रहा है।
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सांबा धान की खेती भी प्रभावित
तमिलनाडु में केवल मूंगफली ही नहीं, बल्कि कावेरी डेल्टा की सांबा धान की खेती भी पानी की कमी से प्रभावित हो रही है। मेट्टूर बांध में पर्याप्त जल भंडारण नहीं होने के कारण अब तक सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है।यदि जल्द पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो लगभग 6 लाख एकड़ में सांबा धान की बुवाई प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे करीब 12 लाख टन धान उत्पादन का नुकसान हो सकता है। इससे साफ है कि Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat के साथ-साथ राज्य की अन्य प्रमुख फसलें भी जल संकट का सामना कर रही हैं।
किसानों की बढ़ी चिंता
मानसून के मौसम में भी पानी की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। Barsat Me Bhi Jal Sankat Se Moongfali Ki Fasal Par Sankat केवल धर्मपुरी की समस्या नहीं है, बल्कि यह बदलते मौसम और अनियमित वर्षा की चुनौती को भी दर्शाता है। यदि जल्द सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो हजारों किसानों की मेहनत और आय दोनों प्रभावित होंगी। किसान लगातार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि KRP बांध की दाहिनी नहर से पानी छोड़कर फसलों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
