देशभर में खरीफ सीजन के दौरान Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi होने का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। समय पर हुई बारिश और उड़द के अच्छे बाजार भाव के कारण किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर उड़द की खेती की ओर रुख किया है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 जुलाई तक देश में 18.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि के 17.27 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi होने से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में किसानों का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है।
एक सप्ताह में 5 लाख हेक्टेयर से ज्यादा बढ़ी उड़द की बुवाई
Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi का सबसे बड़ा प्रमाण पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों में देखने को मिला है। एक सप्ताह पहले देश में उड़द की बुवाई 13.51 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि अब यह बढ़कर 18.67 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। यानी केवल सात दिनों के भीतर करीब 5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नई बुवाई की गई। इससे साफ है कि बारिश की स्थिति सुधरते ही किसानों ने तेजी से खेतों में बुवाई पूरी की।
अच्छी बारिश और बेहतर बाजार भाव ने बढ़ाया किसानों का भरोसा
विशेषज्ञों का कहना है कि Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi होने के पीछे केवल मानसून ही नहीं, बल्कि उड़द के मजबूत बाजार भाव भी एक बड़ा कारण हैं। इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के मानद सचिव सतीश उपाध्याय के अनुसार पिछले दो सप्ताह में कई राज्यों में अच्छी बारिश होने के बाद किसानों ने तेजी से उड़द की बुवाई की है। उड़द के बेहतर दाम मिलने से बीजों की मांग भी बढ़ी है। गुजरात और राजस्थान के कुछ इलाकों में किसान दोबारा बुवाई (री-सोइंग) की भी तैयारी कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश में बढ़ा रकबा, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi का सबसे अधिक लाभ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में देखने को मिला है। देश के सबसे बड़े उड़द उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में बुवाई का रकबा 13 प्रतिशत बढ़कर 6.17 लाख हेक्टेयर हो गया है।वहीं उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां उड़द की बुवाई 75 प्रतिशत बढ़कर 4.99 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इसी समय यह केवल 2.84 लाख हेक्टेयर थी। यह आंकड़ा बताता है कि किसानों ने इस बार उड़द की खेती को अधिक प्राथमिकता दी है।
राजस्थान और गुजरात में भी बढ़ा उड़द का रकबा
राजस्थान में भी Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi का असर साफ दिखाई दिया। यहां उड़द की बुवाई 16 प्रतिशत बढ़कर 3.25 लाख हेक्टेयर हो गई है। गुजरात में भी लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और कुल रकबा 0.49 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। समय पर बारिश और अनुकूल मौसम ने इन राज्यों में किसानों को उड़द की खेती के लिए प्रोत्साहित किया है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर मानसून का असर
जहां उत्तर भारत में Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi, वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर मानसून का असर देखने को मिला। कृषि मंत्रालय के अनुसार महाराष्ट्र में उड़द की बुवाई 53 प्रतिशत घटकर 1.60 लाख हेक्टेयर रह गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 3.43 लाख हेक्टेयर थी।कर्नाटक में भी उड़द की बुवाई लगभग 24 प्रतिशत घटकर 0.71 लाख हेक्टेयर रह गई है। कम बारिश के कारण इन दोनों राज्यों में किसानों ने उड़द की खेती का रकबा घटा दिया।
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सितंबर और अक्टूबर की बारिश तय करेगी उत्पादन
विशेषज्ञों का मानना है कि Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi जरूर है, लेकिन अंतिम उत्पादन सितंबर और अक्टूबर में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगा। यदि इन महीनों में मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष उड़द का उत्पादन बेहतर होने की संभावना है। वहीं लगातार बारिश या सूखे जैसी स्थिति उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
60 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है उड़द की फसल
आईग्रेन इंडिया के राहुल चौहान के अनुसार उड़द एक ऐसी दलहनी फसल है जो 60 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है। इस फसल को अन्य खरीफ फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि Achhi Barish Se Urad Ki Buwai 8 Percent Badhi होने के साथ-साथ बड़ी संख्या में किसानों ने इसकी खेती का रकबा भी बढ़ाया है।
उत्तर भारत का उत्पादन दक्षिण भारत की कमी पूरी कर सकता है
व्यापारियों का मानना है कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बढ़ा उत्पादन महाराष्ट्र और कर्नाटक में संभावित कमी की काफी हद तक भरपाई कर सकता है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस बार देश में उड़द की उपलब्धता बेहतर रहने की उम्मीद है और किसानों को अच्छे बाजार भाव मिलने की संभावना भी बनी रहेगी।
