भारत में कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar पर तेजी से काम हो रहा है। इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान की उन्नति के लिए ट्रस्ट (TAAS), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और भारतीय बीज उद्योग परिसंघ (FSII) के संयुक्त सहयोग से एक उच्चस्तरीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, कृषि विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar को लेकर आवश्यक नीतिगत बदलावों और सुरक्षित जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।
GM और GE फसलों के लिए आधुनिक नियामक व्यवस्था की जरूरत
सम्मेलन की अध्यक्षता ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने की। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा वैज्ञानिक और पारदर्शी नियामक ढांचा विकसित करना होगा, जिससे आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित हो सके। उनका मानना है कि Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar के माध्यम से खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और सतत कृषि विकास के लक्ष्यों को बेहतर तरीके से हासिल किया जा सकता है।
बदलती जलवायु में बायोटेक फसलों का बढ़ता महत्व
TAAS के अध्यक्ष डॉ. आर.एस. परोदा ने कहा कि बढ़ती आबादी, घटते प्राकृतिक संसाधन और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar किसानों तक नई और उन्नत किस्मों को तेजी से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत का मौजूदा नियामक ढांचा
भारत में ट्रांसजेनिक फसलों का नियमन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और 1989 के नियमों के तहत किया जाता है। इस प्रक्रिया में IBSC, RCGM, GEAC और FSSAI जैसी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि CRISPR-Cas जैसी जीनोम-संपादन तकनीकों के विकास के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar के तहत मौजूदा नियमों को और अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और समयानुकूल बनाने की आवश्यकता है।
वैश्विक अनुभवों से सीखने पर जोर
सम्मेलन में TAAS के सचिव डॉ. भागमल, SABC के अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह, ISAAA Inc. की कार्यकारी निदेशक डॉ. रोडोरा रोमेरो-एल्डेमिता तथा ब्रिटेन के कृषि अर्थशास्त्री ग्राहम ब्रूक्स ने वैश्विक अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने बताया कि कई देशों में आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ी है और किसानों की आय में भी सुधार हुआ है। उनका मानना है कि Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar भारत को भी इस दिशा में नई गति दे सकते हैं।
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किसानों और कृषि क्षेत्र को क्या होगा लाभ?
यदि वैज्ञानिक मानकों और जैव सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए आधुनिक बायोटेक फसलों को अपनाया जाता है, तो किसानों को कीट-प्रतिरोधी, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-अनुकूल बीज उपलब्ध हो सकते हैं। इससे उत्पादन बढ़ेगा, खेती की लागत कम होगी और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar भारतीय कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भारत के कृषि भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल
गोलमेज सम्मेलन का निष्कर्ष रहा कि राष्ट्रीय आवश्यकताओं और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर GM और GE फसलों के लिए अधिक प्रभावी, पारदर्शी और संतुलित नियामक प्रणाली विकसित की जानी चाहिए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि जैव सुरक्षा से समझौता किए बिना Biotech Fasalon Ke Niyamak Sudhar को लागू करना भारत की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और कृषि नवाचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में यही सुधार भारत को कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेंगे।
