हिसार में 80 हजार हेक्टेयर में नहीं हुई बुवाई, मूंग-कपास और धान पर बढ़ा संकट Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit

हिसार में 80 हजार हेक्टेयर में नहीं हुई बुवाई, मूंग-कपास और धान पर बढ़ा संकट Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit

हरियाणा में इस बार कमजोर मॉनसून का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है। Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। सबसे ज्यादा असर हिसार जिले में देखने को मिल रहा है, जहां करीब 80 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर अब तक खरीफ फसलों की बुवाई नहीं हो सकी है। कम बारिश की वजह से मूंग, कपास और धान जैसी प्रमुख फसलें भी नमी की कमी से प्रभावित हो रही हैं।

Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit, हिसार में बुवाई का लक्ष्य अधूरा

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, हिसार जिले में अब तक लगभग 2.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 3 लाख हेक्टेयर से अधिक था। यानी इस बार करीब 80 हजार हेक्टेयर भूमि अभी भी खाली पड़ी है। यही वजह है कि Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit होने की स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

कम बारिश से मूंग, कपास और धान की फसलें संकट में

बारिश की कमी का असर केवल नई बुवाई पर ही नहीं बल्कि पहले से बोई गई फसलों पर भी दिखाई दे रहा है। मूंग, कपास और धान की फसलें लंबे समय से पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण कमजोर हो रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

हरियाणा में सामान्य से कम दर्ज हुई बारिश

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के कृषि मौसम विभाग के अनुसार, इस मॉनसून सीजन में अब तक राज्य में 176 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य रूप से इस अवधि तक 231 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। सामान्य से कम वर्षा के चलते Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit होने की स्थिति कई जिलों में देखने को मिल रही है।

हिसार में जुलाई के दौरान सिर्फ 44.5 मिमी बारिश

जुलाई महीने में हिसार जिले में अब तक केवल 44.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 140 मिमी है। पिछले वर्ष जुलाई के अंतिम दो दिनों में ही 103 मिमी बारिश हुई थी, जिससे पूरे महीने का आंकड़ा लगभग 170 मिमी तक पहुंच गया था। इस साल बारिश की कमी ने Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit होने की समस्या को और बढ़ा दिया है।

पिछले साल बाढ़, इस साल सूखे जैसी स्थिति

पिछले वर्ष हिसार जिले में अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी और हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी। लेकिन इस बार हालात पूरी तरह उलट हैं। बारिश की कमी के कारण खेत सूखे पड़े हैं और Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit होने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

अगस्त के पहले सप्ताह तक बुवाई पूरी होने की उम्मीद

जिले के उप कृषि निदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि धान की रोपाई अभी जारी है और अगस्त के पहले सप्ताह तक यह कार्य पूरा होने की संभावना है। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit की स्थिति में सुधार आ सकता है और किसान समय पर बुवाई पूरी कर सकेंगे।

कपास का रकबा घट सकता है, धान और बाजरा बढ़ने की संभावना

कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम रह सकता है। वहीं धान और बाजरा की खेती का क्षेत्र बढ़ने की संभावना जताई गई है। मौसम में सुधार होने पर Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit की स्थिति से राहत मिलने की उम्मीद है।

किसानों की उम्मीद अब अच्छी बारिश पर

फिलहाल हरियाणा के किसानों की निगाहें मॉनसून पर टिकी हुई हैं। यदि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो बुवाई का लक्ष्य पूरा होने के साथ मूंग, कपास और धान की फसलों को भी नया जीवन मिल सकता है। हालांकि बारिश में और देरी होने पर Haryana Mein Kam Barish Se Kharif Fasal Prabhavit का असर खरीफ उत्पादन पर साफ दिखाई दे सकता है।

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