El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga यह सवाल इस समय किसानों, मौसम वैज्ञानिकों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी (BoM) ने चेतावनी दी है कि जून 2026 से सक्रिय एल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है। यदि इसकी यही रफ्तार बनी रही तो यह 1950 के बाद सबसे शक्तिशाली El Nino घटनाओं में शामिल हो सकता है। इसका असर भारत के मॉनसून, कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर भी देखने को मिल सकता है।
प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रही गर्माहट
ऑस्ट्रेलियाई एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान लगातार सामान्य से अधिक बना हुआ है। 26 जुलाई तक El Nino 3.4 Index +1.94°C दर्ज किया गया, जो एल नीनो की सक्रिय सीमा से काफी ऊपर है। पिछले दो सप्ताह में इसमें लगभग 0.5°C की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ती समुद्री गर्माहट El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga जैसे सवालों को और गंभीर बना रही है।
हिंद महासागर डाइपोल भी बदल रहा है
रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल Indian Ocean Dipole (IOD) तटस्थ स्थिति में है, लेकिन इसका इंडेक्स +0.44°C तक पहुंच चुका है। यदि यह स्थिति लगातार बनी रहती है तो सकारात्मक IOD की घोषणा की जा सकती है। सकारात्मक IOD कई बार भारत के मॉनसून को कुछ हद तक सहारा देता है, इसलिए El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga इसका अंतिम जवाब केवल एल नीनो से तय नहीं होगा।
कमजोर ट्रेड विंड बढ़ा रही हैं चिंता
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में ट्रेड विंड सामान्य से कमजोर बनी हुई हैं। वहीं Southern Oscillation Index (SOI) लगातार नकारात्मक स्तर पर बना हुआ है। ये दोनों संकेत बताते हैं कि एल नीनो आने वाले महीनों में और अधिक मजबूत हो सकता है। इसी वजह से El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga इस पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारत के मॉनसून पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि कोई पूछता है कि El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga, तो सबसे पहला असर मॉनसून पर देखने को मिल सकता है। सामान्य तौर पर मजबूत एल नीनो के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है और कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। हालांकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्पष्ट किया है कि भारत का मानसून केवल एल नीनो पर निर्भर नहीं करता। हिंद महासागर डाइपोल, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अन्य वायुमंडलीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
खेती और किसानों पर कितना पड़ेगा असर?
El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga इसका सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिल सकता है। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो धान, मक्का, दालें, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही जलाशयों में पानी की उपलब्धता कम होने से रबी फसलों की तैयारी पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए कृषि विशेषज्ञ किसानों को मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन और सिंचाई की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं।
सरकार और IMD लगातार कर रहे हैं निगरानी
भारत सरकार और भारतीय मौसम विभाग प्रशांत महासागर तथा हिंद महासागर की गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। यदि मौसम में बड़े बदलाव के संकेत मिलते हैं तो किसानों और राज्यों के लिए समय-समय पर नई एडवाइजरी जारी की जाएगी। ऐसे में El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga इसका सटीक आकलन आने वाले महीनों में और स्पष्ट हो सकेगा।
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2027 तक बना रह सकता है प्रभाव
ऑस्ट्रेलियाई मौसम एजेंसी का अनुमान है कि प्रशांत महासागर की गर्माहट नवंबर 2026 तक बनी रह सकती है। इसके बाद फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच एल नीनो अपने चरम स्तर पर पहुंच सकता है और इसका प्रभाव 2027 की शरद ऋतु तक जारी रहने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga इसका असर केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों के मौसम और कृषि पर भी देखने को मिल सकता है।
जलवायु परिवर्तन के बीच बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 वैश्विक स्तर पर अब तक के सबसे गर्म जून महीनों में शामिल रहा। वैश्विक समुद्री सतह का औसत तापमान 1991–2020 के औसत से 0.51°C अधिक दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्री गर्माहट और जलवायु परिवर्तन के कारण El Nino 2026 Ka Bharat Par Kya Asar Hoga यह पहले से अधिक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। आने वाले महीनों में किसानों, मौसम वैज्ञानिकों और सरकार की नजर लगातार मौसम की बदलती परिस्थितियों पर बनी रहेगी।
